
- हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्ली
गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में नाद योग चिकित्सा को आधुनिक समय की प्रभावी उपचार पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध योगगुरु डॉ. नवदीप जोशी ने नाद योग के बहुआयामी लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. जोशी ने बताया कि नाद योग, जो ध्वनि और कंपन पर आधारित प्राचीन ध्यान पद्धति है, आज के दौर में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि सभी आयु वर्ग के लोग इसके अभ्यास से लाभान्वित हो सकते हैं।

बच्चों में बढ़ती चिड़चिड़ापन, बेचैनी और हाइपरएक्टिविटी जैसी समस्याओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि नाद योग के नियमित अभ्यास से इन स्थितियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, तनाव और मानसिक अस्थिरता के समाधान में भी यह पद्धति कारगर साबित हो रही है। इसके अभ्यास से मन को शांति मिलती है, एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि नाद योग में वर्णित तकनीकें गर्भावस्था के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं और सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) की संभावना को भी बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि नियमित अभ्यास से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर सहित 40 से अधिक बीमारियों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि योग को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक (supportive therapy) के रूप में अपनाना अधिक उचित है।

शिविर के दौरान प्रतिभागियों को “ॐ” जप, मंत्र ध्यान और ध्वनि पर एकाग्रता के माध्यम से नाद योग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों ने इसे मानसिक रूप से शांति देने वाला, ऊर्जा बढ़ाने वाला और संतुलन प्रदान करने वाला अनुभव बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, नाद योग न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भावनात्मक संतुलन, बेहतर नींद, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और आध्यात्मिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच नाद योग एक सरल, प्रभावी और प्राचीन समाधान के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
