समसामयिक

‘एक प्रेमकथा का अंत’ का लोकार्पण

‘एक प्रेमकथा का अंत’ का लोकार्पण

रवांई क्षेत्र की सुप्रसिद्ध लोकगाथा गजू मलारी पर आधारित
नाटक ‘एक प्रेम कथा का अंत’

— महाबीर रवांल्टा

सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) व टीम रवांई लोक महोत्सव के संयुक्त तत्वावधान में यमुना वैली पब्लिक स्कूल नौगांव में आयोजित कार्यक्रम में रवांई क्षेत्र की सुप्रसिद्ध लोकगाथा गजू मलारी पर आधारित नाटक एक प्रेमकथा का अंत का लोकार्पण हेमवतीनन्दन बहुगुणा गढ़वाल(केन्द्रीय)विश्व विद्यालय श्रीगर गढ़वाल के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डा अजीत पंवार, जिला शैक्षणिक प्रशिक्षण संस्थान बडकोट के प्राचार्य वी पी सेमल्टी, रंगकर्मी पृथ्वीराज कपूर, वयोवृद्ध कवि खिलानन्द बिजल्वाण, डा मनमोहन रावत, युवा कवि दिनेश रावत, क्षेत्र पंचायत प्रमुख रचना बहुगुणा की मंच पर उपस्थिति के साथ हुआ ।अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्य क्रम का आरम्भ हुआ। लोक गायक जितेन्द्र राणा के रवांई की विभूतियों पर केंद्रित गीत के बाद लोकार्पण हुआ। मनवीर रावत, ध्यान सिंह रावत, लोक गायक अनिल बेसारी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।इस सत्र का संचालन रंगकर्मी व पत्रकार प्रेम पंचोली ने किया।

रवांई एक चिंतन सत्र में सुखदेव रावत, ज्येष्ठ प्रमुख प्रकाश असवाल, जौनपुर से पधारे अमेन्द्र विष्ट, तिलक रमोला, राधेकृष्ण उनियाल, जौनसार से पधारे इन्द्र सिंह नेगी, प्रदीप रावत रवांल्टा मंचासीन रहे।पत्रकार सुनील थपलियाल, नीरज उतराखण्डी, अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के संजीव बिजल्वाण, अपील सिंह चौहान, केन्द्र सिंह राणा ने भी अपने विचार रखे। सत्र का संचालन दिनेश रावत ने किया।

मेरी रवांल्टी कविता डऽर के गीत का नमूना भी उपस्थित लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।इस आयोजन से अभिभूत हूं ।अपने क्षेत्र में अपने ही लोगों द्वारा किसी साहित्यकार की कृति के लिए ऐसा आयोजन करना भविष्य के लिए लोक कला, साहित्य व संस्कृति के प्रति अच्छी संभावनाएं जगाता है।

संयोजन से जुड़ी असिता डोभाल, अमिता नौटियाल, श्वेता बधानी ने अपनी सक्रियता से इसे सफल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी तो रुद्रेश्वर स्वयं सहायता समूह की दल नायक लता नौटियाल ने अपने दल के साथ रवांई के स्थानीय परोसकर कार्यक्रम को लोक की सुवास से सराबोर कर दिया। रवांई लोक महोत्सव टीम के नरेश नौटियाल कार्य क्रम के संयोजनपक्ष मे अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह करते रहे। वीणा रिकार्डिंग स्टूडियो के विकास बडेडी, कैलाश, डा संजय कोठारी सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को गरिमा प्रदान की।अनिल बेसारी द्वारा मेरी रवांल्टी कविता डऽर के गीत का नमूना भी उपस्थित लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।इस आयोजन से अभिभूत हूं ।अपने क्षेत्र में अपने ही लोगों द्वारा किसी साहित्यकार की कृति के लिए ऐसा आयोजन करना भविष्य के लिए लोक कला, साहित्य व संस्कृति के प्रति अच्छी संभावनाएं जगाता है।

आयोजन के संयोजक शशि मोहन रवांल्टा ने सभी लोगों की उपस्थिति के लिए उनका आभार व्यक्त किया। साहित्य को लेकर उल्लेखनीय पक्ष यह भी रहा कि छात्र दिनकर राणा की पहल पर लगी पुस्तकों की प्रदर्शनी में से मेरी अनेक पुस्तकें उपस्थिति लोगों द्वारा खुले मन से क्रय की गई। पुस्तकों पर मेरे हस्ताक्षर लिए। एक प्रेमकथा का अंत की सभी प्रतियां बिक गई। कुछ पाठकों को निराश भी होना पड़ा। साहित्य के प्रति मेरे क्षेत्र में लोग सजग एवं संवेदनशील हैं, मुझे यह बात आप सभी के साथ साझा करते हुए अच्छा लग रहा है।

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Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

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