नई दिल्ली में गूंजा उत्तराखंड का ‘रैबार’, डोभाल-चौहान-रावत-लखेड़ा ने रखा भविष्य का विज़न

NSA Ajeet Doval Trivendra Singh Rawat & CDS Gen Anil Chauhan

 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शिरकत की हिल मेल द्वारा आयोजित ‘रैबार -7 आयोजन में

  • सी एम पपनै, नई दिल्ली

नई दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच 17 जनवरी की वह शाम कुछ अलग थी। कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर सभागार में उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि स्मृति, संस्कृति और संकल्प के रूप में उपस्थित था। अवसर था प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान हिल मेल द्वारा आयोजित रैबार–7 : ब्रांड उत्तराखंड का—एक ऐसा मंच, जहां नीति, परंपरा, सुरक्षा और समाज एक-दूसरे से संवाद कर रहे थे।

Raibbar 7

राष्ट्रीय नेतृत्व, उत्तराखंड की आत्मा के साथ

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल थे। विशिष्ट अतिथियों में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, महानिदेशक असम राइफल्स लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, पौड़ी गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत सहित सेना, प्रशासन और बौद्धिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां मंचासीन रहीं।
मंच पर बैठे ये चेहरे केवल पदों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे, बल्कि उत्तराखंड की विकास यात्रा के साक्षी थे।

दीप से शुरू हुआ संवाद

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद कर्नल अजय कोठियाल के मार्गदर्शन में यूथ फाउंडेशन की टीम ने चल कदम, चल कदम वंदेमातरम्…” पर आधारित अनुशासित और ऊर्जावान प्रस्तुति दी—जिसमें परेड, खेल और नृत्य का अनूठा संगम था।
लोकसंस्कृति का शिखर तब दिखा, जब पद्मश्री प्रीतम भरतवाण के जागर गायन और ढोल-नाद ने सभागार को पहाड़ों की आत्मा से जोड़ दिया।

Hill Mail Magazine 10 years

हिल मेल के दस वर्ष : एक विचार यात्रा

हिल मेल पत्रिका के दस वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाशित विशेष अंक का लोकार्पण केवल एक पत्रिका का विमोचन नहीं था, बल्कि उस विचार यात्रा का उत्सव था, जिसने उत्तराखंड को राष्ट्रीय विमर्श में निरंतर स्थान दिलाया। चेयरमैन चेतना नेगी और संस्थापक मंजीत नेगी की उपस्थिति में यह क्षण भावुक और गौरवपूर्ण रहा।

Lt Gen Vikas Lakhera & Anil Baluni

विकास के आंकड़े, भविष्य की चिंता

लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने उत्तराखंड के सैन्य योगदान और आर्थिक प्रगति को रेखांकित करते हुए बताया कि दिल्ली में ही लगभग दस लाख उत्तराखंडी रहते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैनिकों की धरती है और देश की सुरक्षा व विकास में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

अनिल बलूनी ने जनगणना और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि पर्वतीय क्षेत्रों में जनसंख्या और प्रतिनिधित्व घटा, तो राज्य निर्माण की मूल भावना को खतरा होगा। उनके शब्दों में, रैबार जैसे मंच चेतना जगाने का माध्यम बन सकते हैं।

CDS Gen Anil Chauhan

उत्तराखंड : भारत की आत्मा

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का वक्तव्य केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि दार्शनिक भी था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड नदियों का स्रोत ही नहीं, सभ्यता का स्रोत है। पहाड़ सदियों से आध्यात्मिक और रचनात्मक प्रेरणा देते आए हैं। उन्होंने विकसित भारत–2047 के लक्ष्य के संदर्भ में सीमांत सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय विकास को समान रूप से महत्वपूर्ण बताया और रैबार में हुए विमर्श को राज्य सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया।

Trivendra Singh Rawat

खेती, पर्यटन और आत्मनिर्भरता

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहाड़ की खेती, सहकारी मॉडल और पर्यटन की संभावनाओं पर बात करते हुए कहा कि उत्तराखंड का भविष्य साहसिक पर्यटन, जैव विविधता और नवाचार में निहित है। उन्होंने चीड़ आधारित उत्पादों और सहकारी खेती को आर्थिक परिवर्तन की कुंजी बताया।

NSA Ajeet Doval

जब डोभाल बोले गढ़वाली में

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब अजीत डोभाल ने गढ़वाली भाषा में संबोधन किया। उन्होंने रैबार को “दिलों से जोड़ने वाला संवाद” बताते हुए कहा—

मेरे चारों ओर लगा है मेला,
चार दिशाओं का…”

उनका संदेश स्पष्ट था—जहां भी रहें, पहाड़ी पहचान और जड़ों से रिश्ता टूटे। उन्होंने विदेशों में बसे उत्तराखंडियों के उदाहरण देकर संस्कृति की निरंतरता को रेखांकित किया।

सम्मान और समापन

इस अवसर पर त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा रचित पुस्तक का विमोचन हुआ और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को हिल रत्न सम्मान से नवाजा गया।
दूसरे सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रैबार पर लघु फिल्म और उत्तराखंड की चुनौतियां विषय पर गहन पैनल चर्चा हुई।

Manjeet Negi

रैबार : एक आयोजन नहीं, एक आंदोलन

समापन पर संस्थापक मंजीत नेगी ने कहा—रैबार किसी एक व्यक्ति की कल्पना नहीं, यह सामूहिक श्रम और साझा सपने का परिणाम है।
रैबार–7 यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि उत्तराखंड केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक चेतना है, जिसे जोड़ने, समझने और आगे ले जाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

Team Hillmail

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