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आंदोलन, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और इतिहास: स्वतंत्रता के बाद भारत

आंदोलन, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और इतिहास: स्वतंत्रता के बाद भारत

समसामयिक
 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र राजनीति एवं मीडिया विशेषज्ञ भारत की स्वतंत्रता केवल सत्ता के हस्तांतरण की घटना नहीं थी; यह एक ऐसे राष्ट्र के पुनर्निर्माण की शुरुआत थी, जिसने सदियों की राजनीतिक अस्थिरता, औपनिवेशिक शासन, विभाजन और सामाजिक चुनौतियों के बाद स्वयं को लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। 1947 के बाद भारत का इतिहास केवल सरकारों और राजनीतिक दलों का इतिहास नहीं है। यह आंदोलनों, जनभावनाओं, असहमतियों, संघर्षों, बलिदानों और उन निर्णयों का इतिहास भी है, जिन्होंने देश की दिशा को बार-बार प्रभावित किया। यदि हम स्वतंत्र भारत के इतिहास को ध्यान से देखें, तो पाएँगे कि अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन आंदोलनों और जनदबाव के परिणामस्वरूप हुए। कभी आंदोलन ने सरकार को अपनी नीति बदलने के लिए विवश किया, कभी उसने लोकतंत्र को मजबूत किया और कभी किसी आंदोलन ने देश की एकता तथा संवैधानिक व्यवस्था ...
दिल्ली के सेन्ट्रल पार्क में साकार हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान

दिल्ली के सेन्ट्रल पार्क में साकार हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान

दिल्ली-एनसीआर
हजारों लोगों की उपस्थिति में अध्यात्म, संस्कृति, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रभावी संदेशहिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीपर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा प्रकृति के सम्मान,पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पर्व के रूप में वर्ष 2005 से निरंतर संचालित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव इस बार सुखी परिवार फाउंडेशन और दिल्ली सरकार के सहयोग से नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुआ. सर्वप्रथम सुप्रसिद्ध जैन संत डॉ.गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज के सान्निध्य में आचार्य मोहन भट्ट और आचार्य रमेश भट्ट ने सृष्टि रक्षा समरसता महायज्ञ पूर्ण किया. जन परिसंवाद में विद्वान् विशेषज्ञ वक्ताओं ने तीन शताब्दी व्यक्तित्वों-राजनीति क्षेत्र के अजातशत्रु नेता भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी,पर्यावरण पुरोधा पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा और पृथक उत्तराखंड राज्य के जनक हिमालय गौरव इंद्रमणि...