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बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 3पहाड़ की मिट्टी से जुड़कर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही हैं उत्तरकाशी की दीपिका कैंतुरा। गांव के खाली और अंधेरे कमरों से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन आज एक बड़े उद्यम का रूप ले चुका है। अपनी मेहनत, संकल्प और परिवार के सहयोग से दीपिका ने साबित किया है कि पहाड़ की बेटियां केवल सपने देखती ही नहीं, उन्हें साकार करना भी जानती हैं। पढ़ाई में सामान्य, कक्षा में अक्सर डरी-सहमी रहने वाली, लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान लिए एक लड़की ने शायद ही कभी सोचा होगा कि एक दिन उसकी पहचान पूरे क्षेत्र में ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में होगी। विद्यालयी जीवन में खेलकूद और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली दीपिका कैंतुरा बचपन से ही अपनी अलग पहचान बनाने का हुनर रखती थीं। पढ़ाई में भले ही वह असाधारण नहीं थीं, लेकिन उनकी सक्रियता, सहज स्वभाव और कुछ नया करने की ललक ने उन्हे...
ये तो  पापा की परी है…

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आधी आबादी
विश्व बेटी दिवस पर विशेषडॉ. दीपा चौहान राणायूँ  तो बेटी हर किसी कीbecauseलाडली होती है, पर क्या आप जानते हैं कि एक बेटी अपने पिता की जान होती है. आज बेटियों के लिए बेहद खास दिन है, क्योंकि आज डॉटर्स-डे यानी विश्‍व बेटी दिवस है. दुनिया भर में यह दिन अलग-अलग महीनों में मनाया जाता है, लेकिन भारत में यह दिन सितंबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता है.सप्तेश्वर बेटियां आज भले ही किसी भी so क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. हर क्षेत्र में हैं वो तरक्की कर रही हैं, लेकिन आज भी समाज में कई जगह उन्हें कमतर आंका जाता है. इसे देखते हुए कुछ देश की सरकार ने मिलकर समानता को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया. जिससे लोग जागरूक हो और इस बात को समझे कि हर इंसान बराबर है. सप्तेश्वरसप्तेश्वर यूं तो बेटी हर किसी की butलाडली होती है, पर क्या आप जानते हैं कि बेटी और पिता के बीच खास बॉन्डिंग क्यों होती ...