
देवभूमि की ‘पधानी’: सेवा, साधना और समर्पण
नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला – 4सेवा ही साधना और प्रकृति ही आराधना- इस जीवनदृष्टि को अपने कर्मों से साकार कर रही हैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद की माहेश्वरी रावत। दाई के रूप में मातृसेवा, ग्रामसभा में नेतृत्व, पारंपरिक घराट का संचालन, सामुदायिक हित में अपना मकान समर्पित करने और देववृक्षों के रोपण तक उनका जीवन लोककल्याण तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रेरणादायक उदाहरण है।कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान किसी बड़े पद, प्रतिष्ठा या उपलब्धि से नहीं, बल्कि उनके निस्वार्थ कर्मों से बनती है। वे अपने जीवन को परिवार तक सीमित रखने के बजाय समाज, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला हैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि विकासखंड स्थित भटवाणी-बड़ेथ गाँव की निवासी माहेश्वरी रावत, जिन्हें स्थानीय स्तर पर स्नेह...
