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शब्दों से मन तक – “दिल से दिल तक” की यात्रा

शब्दों से मन तक – “दिल से दिल तक” की यात्रा

पुस्तक-समीक्षा
 आशिता डोभाल “गिर गए हैं सफर में तो फिर उठ जाएंगे, कदम अब रुकेंगे नहीं भले ही हम मिट जाएंगे…”                                          — शशि कुड़ियाल “चंद्रभा” लिखना केवल शब्दों को कागज़ पर उतार देना नहीं होता, यह अपनी ही बिखरी हुई कड़ियों को जोड़ने का एक मौन अनुष्ठान है। यह स्वयं को खाली करने की नहीं, बल्कि स्वयं को नए सिरे से भरने की प्रक्रिया है। लिखने की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हम अपनी सोच, अपने एकांत और अपनी पीड़ाओं को एक चेहरा दे पाते हैं। कई बार पंक्तियाँ किसी सोचे-समझे प्रयास से नहीं जन्म लेतीं; वे मन के किसी अनदेखे कोने से स्वतः बह निकलती हैं। धीरे-धीरे वे शब्द आकार लेते हैं, पंक्तियों में ढलते हैं और उन्हीं से कविता, ग़ज़ल, नज़्म, किस्से और कहानियाँ जन्म लेती हैं। शायद इसी भावभूमि से जन्मा है शशि कुड़ियाल जी का पहला काव्य-संग्रह “दिल से दिल तक”। यह संग्रह केवल...