
तिलाड़ी कांड की 96वीं बरसी आज: रवांई घाटी के शहीदों को नमन, ‘गढ़वाल का जलियांवाला बाग’ आज भी रुला देता है इतिहास
नीरज उत्तराखंडी | रवांई घाटी/उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी की रवांई घाटी में यमुना नदी के तट पर स्थित तिलाड़ी मैदान आज भी उस दर्दनाक इतिहास का मौन साक्षी है, जिसने पूरे गढ़वाल को झकझोर दिया था। आज तिलाड़ी कांड की 96वीं बरसी है। 30 मई 1930 को टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपने हक-हकूकों की रक्षा के लिए एकत्रित निहत्थे ग्रामीणों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी में अनेक लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इतिहास में यह घटना ‘गढ़वाल के जलियांवाला बाग’ के नाम से दर्ज है।
आज भी जब तिलाड़ी कांड का जिक्र होता है, तो रवांई घाटी के लोगों की आंखें नम हो जाती हैं और उस दिन की भयावह स्मृतियां लोगों को भीतर तक झकझोर देती हैं।वन बंदोबस्त बना आंदोलन की वजह
टिहरी रियासत ने वर्ष 1927 में रवांई क्षेत्र में वन बंदोबस्त लागू किया था। इसके तहत ग्रामीणों के जंगलों पर पारंपरिक अधिकार सीम...
