
चांदणी धार पूजन : जहां पक्षियों से संवाद करती है आस्था
तुंगनाथ घाटी : लोकज्ञान, पर्यावरण और विज्ञान का अद्भुत संगमआशिता डोभाल
उत्तराखंड का पहाड़ केवल भौगोलिक संरचना भर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व का जीवंत दर्शन है। यहां की जीवनशैली में जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन—इन ‘5 ज’ का गहरा रिश्ता है। यही कारण है कि पर्वतीय समाज ने प्रकृति को संसाधन नहीं, बल्कि संबंध माना है। इस संबंध की एक अनूठी मिसाल रुद्रप्रयाग जिले की तुंगनाथ घाटी में आज भी जीवित है—चांदणी धार पूजन।
विरासत में मिली पर्यावरण चेतना
तुंगनाथ बाबा का शीतकालीन प्रवास स्थल मक्कूमठ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यह क्षेत्र वन आंदोलनों की भूमि रहा है। यहाँ की लोकमानस में गूंजने वाला नारा—
“मौण द्यौला पर बौण ना” (गर्दन कटवा देंगे, पर जंगल नहीं कटने देंगे) यह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति...
