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‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’

‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’

इतिहास
6 सितम्बर, 1932 पौड़ी क्रान्ति के नायक-  जयानन्द ‘भारतीय’ डॉ. अरुण कुकसाल हाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे,  भाग चला, लाट निज साथियों की रेल में, जनता-पुलिस मध्य, शेर यहां घेर लिया, वीर जयानन्द, चला पौड़ी वाली जेल में. - शान्तिप्रकाश ‘प्रेम’ ‘मैं वीर जयानन्द ‘भारतीय’ का शुक्रिया अदा करता हूं कि उसने मुझे जान से नहीं मारा’. सर विलियम मेलकम हैली ने ये बात पौड़ी से बच निकलने के बाद कही थी. किस्सा, देश की स्वाधीनता से पूर्व सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौर का है. इस आंदोलन के विरोध स्वरूप अंग्रेजों के पिठ्ठू संगठन ‘अमन सभा’ ने 6 सितम्बर, 1932 को पौड़ी में तत्कालीन संयुक्त प्रांत के वायसराय मेलकम हैली का सम्मान समारोह आयोजित किया था. इस कार्यक्रम के प्रति स्थानीय लोगों में गुस्सा तो था परन्तु वे सामने विरोध करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे. ऐसे समय में देश की आजादी के सच्चे सिपाही की भूम...