Home Posts tagged बुग्याल
नैनीताल साहित्यिक-हलचल

हिमांतर प्रकाशन की प्रथम पुस्तक ‘मेरे हिस्से का हिमालय’ का विमोचन

हिमांतर ब्यूरो, हल्द्वानी यात्रा का अनुभव एकल से सामूहिकता की प्रक्रिया है. कोई मनुष्य कभी अकेले यात्रा नहीं करता है. उसकी यात्रा में बहुत कुछ दृश्य-अदृश्य साथ होता है. तनुजा जोशी ‘गुलमोहर गर्ल’ because की सद्य प्रकाशित पुस्तक “मेरे हिस्से का हिमालय” इस बात की तस्दीक
पुस्तक-समीक्षा

संस्मरणों, यात्राओं और अनुभवों का पुलिंदा है हिमालय दर्शन

सुनीता भट्ट पैन्यूली जैसा कि लेखक दिगम्बर दत्त थपलियाल लिखते हैं – “जिस हिमालय की हिम से ढकी चोटियां मेरी अन्तश्चेतना और अनुभुतियों का अविभाज्य अंग बन गयी हैं, जहां एक क्वारी धरती गहरे नीले आकाश के नीचे सतत सौन्दर्य रचना में डूबी रहती है, उसकी विभूति और वैभव को किस प्रकार इन पृष्ठों पर […]
देहरादून

राज्य की जैवविविधता, बुग्यालों, राष्ट्रीय पार्कों एवं नदियों का सरंक्षण जरूरी

अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, 2021 पर यूसर्क द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजन हिमांतर ब्यूरो, देहरादून अंतराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) (Uttarakhand Science Education & Research Centre) द्वारा because एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की समन्वयक यूसर्क की वैज्ञानिक डा. मंजू सुन्दरियाल के
खेती-बाड़ी

किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है कुटकी

बेहद कड़वी, लेकिन जीवनरक्षक है कुटकी जे. पी. मैठाणी मध्य हिमालय क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान के हिमालयी क्षेत्रों में बुग्यालों में जमीन पर रेंगने वाली गाढ़े हरे रंग की वनस्पति है कुटकी. उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्र जो अधिकतर 2000 मीटर यानी 6600 फीट से ऊपर अवस्थित हैं उन बुग्यालों में कुटकी पायी […]
उत्तराखंड हलचल

प्रकृति की गोद में बसा हरकीदून, बुग्याल और कई किस्म के फूलों की महक जीत लेती है दिल

शशि मोहन रावत ‘रवांल्‍टा’ मानव प्रकृति प्रेमी है. प्रकृति से ही उसे आनंद की अनुभूति होती है. मानव का प्रकृति से प्रेम भी स्वाभाविक ही है, क्योंकि प्रकृति उसकी सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करती है. इसी प्रकृति ने पर्वतराज हिमालय की गोद में अनेक पर्यटन स्थलों का निर्माण किया है. इन्हीं पर्यटन स्थलों में […]