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साहित्‍य-संस्कृति

उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

चन्द्रशेखर तिवारी प्राचीन समय में समस्त उत्तराखण्ड में परम्परागत तौर पर विभिन्न पादप प्रजातियों के because तनों से प्राप्त रेशे से मोटे कपड़े अथवा खेती-बाड़ी व पशुपालन में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों का निर्माण किया जाता था. पहाड़ में आज से आठ-दस दशक पूर्व भी स्थानीय संसाधनों से कपड़ा बुनने का
धर्मस्थल

फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

कुमाऊं में मनिया मंदिर: एक पुनर्विवेचना -3 डॉ. मोहन चंद तिवारी द्वाराहाट के ‘मनिया मंदिर समूह’ के सन्दर्भ में पिछली दो पोस्टों में विस्तार से चर्चा की गई है.किंतु मन्याओं के बारे में इतिहास और पुरातत्त्व के विद्वानों द्वारा कोई खास जानकारी नहीं दी गई है. because इसी सन्दर्भ में फेसबुक के माध्यम से कुमाऊं […]
बागेश्‍वर

मिलिए, उत्तराखंड के उस शख्स से जिनका पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में लिया नाम

ललित फुलारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के बागेश्वर निवासी जगदीश कुन्याल के पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निजात दिलाने वाले because कार्यों की सराहना की. पीएम मोदी ने कहा कि उनका यह कार्य बहुत कुछ सीखाता है. उनका गांव और आसपास का क्षेत्र पानी की जरूरत […]