जिसकी कलम में गाँठ….

जिसकी कलम में गाँठ….

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—4 रेखा उप्रेती छोटे थे तो किसी भी बात पर सहज विश्वास कर लेते. हवा, पानी, पेड़, पहाड़- जैसे हमारे लिए साक्षात थे वैसे ही बड़ों से सुने हुए किस्से-कहानियाँ-कहावतें भी…. उन दिनों बाँस की कलम प्रयोग में लायी जाती थी और कलम मोटी, पतली, टेड़ी-मेड़ी भले ही हो पर गाँठ […]

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