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62 की उम्र में भी जोश बरकरार: पुरोला के वृजमोहन ने बर्फ से रचा रोजगार

62 की उम्र में भी जोश बरकरार: पुरोला के वृजमोहन ने बर्फ से रचा रोजगार

उत्तरकाशी
  20 रुपये की कटोरी, हजारों की आमदनी: पुरोला के बुजुर्ग की मिसालनीरज उत्तराखंडी, पुरोला उत्तरकाशीपुरोला के महरगांव निवासी 62 वर्षीय वृजमोहन सिंह रावत ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति में कुछ करने की लगन और स्वावलंबन के संस्कार हों, तो उम्र कभी भी बाधा नहीं बनती. जब एक ओर पुरोला में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर बाजार में सड़क किनारे परात में प्राकृतिक बर्फ को जायकेदार बनाकर बेचते वृजमोहन सिंह रावत लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे. वे न केवल स्वाद परोस रहे हैं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रहे हैं.जिज्ञासा वश पूछने पर उन्होंने बताया कि वे पुरोला में लगने वाले मेला-जातर में बर्फ बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा चुके हैं. बर्फ लाना भले ही कठिन होता है, लेकिन मेहनत रंग लाती है. “शाम तक एक हजार से दो से ढाई हजार रुपये की बिक्री हो जात...
ना जाने कहां खो गई पोई और चुल्लू की महक

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उत्तराखंड हलचल
आशिता डोभालपहाड़ों में बहुत—सी चीजें हमारे बुजुर्गों ने हमें विरासत के रूप में सौंपी हैं पर आज आधुनिकता की चमक—दमक और भागदौड़ भरी जीवनशैली में हम इन चीजों से कोसों दूर जा चुके हैं. हम अपनी पुराने खान—पान की चीजों को सहेजना और समेटना लगभग भूल ही गए हैं. अपने खान—पान में हमने पुराने अनाजों, पकवानों को कहीं न कहीं बहुत पीछे छोड़ दिया है. आज लोग उस खान—पान को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिसमें पौष्टिकता बहुत कम मात्रा में होती है और शरीर को नुकसान अलग से होता है, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ रही है. हमारा शरीर रोगों से लड़ने के लिए कमजोर होता जा रहा है. जिस खाने में नाममात्र की भी पौष्टिकता नहीं होती है बल्कि शरीर को मजबूत बनाना तो दूर, कमजोर ज्यादा बना रहा है, ऐसे खान—पान को हमने अपने आज खाने में शामिल किया हुआ है.रवांई घाटी एक ऐसी घाटी है जहां पर लोगों ने आज भी अपनी परम्पराओ...