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साहित्‍य-संस्कृति

ऐश्वर्य और सहज आत्मीयता की अभिव्यक्ति श्रीराम

राम नवमी पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  सनातनी यानी सतत वर्त्तमान की अखंड अनुभूति के लिए तत्पर मानस वाला भारतवर्ष का समाज देश-काल में स्थापित और सद्यः अनुभव में ग्राह्य सगुण प्रत्यक्ष को परोक्ष वाले व्यापक और सर्व-समावेशी आध्यात्म से जुड़ने का माध्यम because बनाता है. वैदिक चिंतन से ही व्यक्त और
ट्रैवलॉग

पैठणी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है औरंगाबाद का पैठण

पोथी सागणें… मंजू दिल से… भाग-14 मंजू काला मनुष्य से आज के सुसंस्कृत मनुष्य तक की यात्रा के साथ चित्र परंपराओं की एक यात्रा समानांतर रूप से चलती है. इस समानांतर यात्रा में मानव विकास के विविध सोपानों को पढ़ा जा सकता है. because इसमें मानव मन की क्रमिक गूँज-अनुगूँज को भी सुना जा सकता […]