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स्मृति-शेष

एक ‘खामोश नायक’ का ‘जीवंत किवदंती’ बनने का जीवनीय सफ़र

डॉ. अरुण कुकसाल ‘श्री नलनीधर जयाल आज किन्नौर की खूबसूरत वादियों में एक ‘जिंदा कहानी’ के तौर पर लोगों के दिल-दिमागों, वहां के बाग-बगीचों, खेत-खलिहानों, स्कूलों, लोगों के शानदार रोजगारों और प्राकृतिक एवं मानवीय समृद्धि के अनेकों रंग-रूपों में रचे-बसे हैं. वह किन्नौर में एक ‘जीवंत किवदंती’ हैं.