Tag: टनकपुर

उत्तराखंड : केंद्र की सौगात, टनकपुर-देहरादून के बीच नई ट्रेन को मंजूरी

उत्तराखंड : केंद्र की सौगात, टनकपुर-देहरादून के बीच नई ट्रेन को मंजूरी

उत्तराखंड हलचल
चंपावत : केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। टनकपुर-देहरादून के बीच नई ट्रेन के संचालन को रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है। जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने नई ट्रेन के संचालन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी और रेल मंत्री का आभार जताया है। CM धामी ने कहा कि पूर्व में उनके द्वारा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से टनकपुर-देहरादून के बीच रेल सेवा के संचालन का अनुरोध किया गया था। जिसके बाद रेल मंत्रालय ने पूर्व में किए अनुरोध को स्वीकार करते हुए टनकपुर-देहरादून के बीच साप्ताहिक रुप से नई रेल सेवा को मंजूरी दे दी है। सीएम धामी ने कहा कि इस नई ट्रेन के चलने से यात्रियों को काफी सुविधा होगी। “विकास की तेज रफ्तार, डबल इंजन सरकार” पूर्व में किए अनुरोध को स्वीकार करते हुए केन्द्र सरकार द्वारा टनकपुर-देहरादून के मध्य साप्ताहिक रुप से नई रेल सेवा को मंजूरी देने पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्...
सौगात : टनकपुर-देहरादून के बीच दौड़ेगी वोल्वो, CM ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

सौगात : टनकपुर-देहरादून के बीच दौड़ेगी वोल्वो, CM ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

उत्तराखंड हलचल
चम्पावत : चम्पावत को आदर्श बनाए जाने की परिकल्पना के दृष्टिगत प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नित नए नए आयाम गढ़े जा रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा चंपावत की जनता को एक और सौगात दी गयी है। अपने विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत टनकपुर में शुक्रवार को *मुख्यमंत्री जी ने देहरादून को 42 सीटर वोल्वो बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जिससे उत्तराखंड परिवहन निगम टनकपुर, चंपावत के बेड़े में दो वोल्वो बस शामिल हो गयी है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने बनबसा में जगबुड़ा पुल पर बस की विधिवत पूजा अर्चना की। ततपश्चात जगबुड़ा पुल से टनकपुर तक करीब आठ किमी वाल्वो में सफर किया। जनपद के सीमांत क्षेत्र टनकपुर और राजधानी देहरादून के बीच वोल्वो सेवा शुरू होने से लोगों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। टनकपुर और नेपाल सीमा से लगे इलाकों के लोग अब वोल्वो बस से सीधे राजधानी देहरादून तक का सफर कर सकेंगे। इससे आवागमन सुगम होगा। शु...
मृत्यु तक स्वयं से जूझती रही वह

मृत्यु तक स्वयं से जूझती रही वह

किस्से-कहानियां
त्याग: सत्य घटना पर आधारित कहानी प्रभा पाण्डेय आज से पन्द्रह-बीस साल पहले तक हमारे पहाड़ की महिलाओं की स्थिति बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं थी क्योंकि मैंने अपने ही गांव में अनेक महिलाओं को इन परिस्थितियों की भेंट चढ़ते देखा. रामदेव नाम के एक व्यक्ति का सबसे बड़ा एक बेटा और चार छोटी बेटियां थी, बहुत कम पढ़ा-लिखा और स्वभाव से कुछ अहंकारी होने के because कारण रामदेव बेकार था. परन्तु समय ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि उसने पण्डिताई का काम शुरू कर दिया.इस काम में उसे अधिकतर घर से बाहर रहना पड़ता. चारों तेज तर्रार बेटियां, तेज तर्रार माँ के साथ अपनी  थोड़ी बहुत पुश्तैनी खेती के साथ-साथ दूसरों के खेतों में मजदूरी कर  अपना गुजारा कर लेते थे जैसे-तैसे दो बड़ी बेटियों का विवाह भी हो गया. ज्योतिष एक दिन रामदेव का छोटा भाई अपने बच्चों व पत्नी सहित पुश्तैनी घर आ गया. वह  भी भाबर क्षेत्र में रहकर पण्डिताई ...