November 29, 2020
Home Posts tagged जांदरी
संस्मरण

अब घट नहीं आटा पीसने जाते हैं

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—6 प्रकाश उप्रेती इसको हम- जानहर, जंदरु, जांदरी कहते हैं. यह एक तरह से घरेलू चक्की है. उन दिनों बिजली तो होती नहीं थी. पानी की चक्की वालों के पास जाना पड़ता था. वो पिसे हुए का ‘भाग’ (थोड़ा आटा) भी लेते थे. इसलिए कई बार घर पर ही […]