September 18, 2020
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संस्मरण

कैद होते जंगलों के बीच पतरोल का आतंक

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—33 प्रकाश उप्रेती आज बात- “पतरौ” और जंगलात की. ‘पतरौ’ का मतलब एक ऐसा व्यक्ति जिसे सरकार ने ग्राम -प्रधान के जरिए हमारे जंगलों की रक्षा के नाम पर तैनात किया हुआ था. रक्षा भी हमसे और वह भी हमारे जंगलों की. धीरे-धीरे हमें पता चला कि रक्षा
संस्मरण

कहाँ गए ‘दुभाणक संदूक’

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—11 प्रकाश उप्रेती आज बात ‘दुभाणक संदूक’. यह वो संदूक होता था जिसमें सिर्फ दूध, दही और घी रखा जाता है. लकड़ी के बने इस संदूक में कभी ताला नहीं लगता है. अम्मा इसके ऊपर एक ढुङ्ग (पत्थर) रख देती थीं ताकि हम और बिल्ली न खोल सकें. हमेशा […]