September 24, 2020
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संस्मरण

च्यला देवी थान हैं ले द्वी बल्हड़ निकाल दिए

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—32 प्रकाश उप्रेती आज बात-“उमि” की. कच्चे गेहूँ की बालियों को आग में पकाने की प्रक्रिया को ही ‘उमि’ कहा जाता था. गेहूँ कटे और उमि न पके ऐसा हो ही नहीं सकता था. उमि पकाने के पीछे का एक भाव ‘तेरा तुझको अर्पण’ वाला था. साथ ही