Home Posts tagged आकाशवाणाी
साहित्‍य-संस्कृति

अचानक याद आना एक गीत का

चारु तिवारी ‘गरुड़ा भरती, कौसाणी ट्रेनिंगा…!’ उन दिनों हमारे क्षेत्र बग्वालीपोखर में न सड़क थी और न बिजली. मनोरंजन के लिये सालभर में लगने वाला ‘बग्वाली मेला’ और ‘रामलीला’. बाहरी दुनिया से परिचित होने का because एक माध्यम हुआ- रेडियो. वह भी कुछ ही लोगों के पास हुआ. सौभाग्य से हमारे घर में