November 25, 2020
रंगमंच

उत्तराखंड में भारत रंग महोत्सव

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  • महाबीर रवांल्टा

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में संस्कृति विभाग एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 21वां भारत रंग महोत्सव 6 फरवरी से 12 फरवरी 2020 तक हुआ. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा भारत रंग महोत्सव देश के चार शहरों में पांडिचेरी, नागपुर, शिलांग व देहरादून में आयोजित किए गए जिनमें देश के चयनित नाट्य दलों के साथ ही विदेशी नाट्य दलों की प्रस्तुतियां भी शामिल रही.

6 फरवरी को रिस्पना पुल के निकट नवनिर्मित प्रेक्षागृह के लोकार्पण एवं नाट्य महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद के उपाध्यक्ष घनानंद गगोड़िया, संस्कृति विभाग की निदेशक डॉ बीना भट्ट की उपस्थिति में प्रेक्षागृह को रंगकर्मियों को समर्पित किया. उदघाटन सत्र में सुप्रसिद्ध कवि पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, प्रख्यात रंगमंच एवं सिने अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निदेशक प्रो सुरेश शर्मा के साथ ही बड़ी संख्या में रंगकर्मी, साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी शामिल हुए. अध्यक्षता राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ अर्जुन देव ने की. संचालन महोत्सव के संयोजक डॉ. सुवर्ण रावत ने किया. उदघाटन सत्र की नाट्य प्रस्तुति गाथा नाट्य दल दिल्ली का महाकवि भासा द्वारा लिखित एवं ललित सिंह पोखरिया दर्शाया संस्कृत से हिन्दी में अनूदित नाटक चारुदत्त रहा. डेढ़ घंटे अवधि के इस हिन्दी नाटक का निर्देशन भूपेश जोशी ने किया था. दूसरे दिन ब्रह्मपुत्र कल्चरल फाउंडेशन जोरहाट (असम) की ओर से शिल्पिका बोरदोलोई द्वारा लिखित एवं निर्देशित असमिया नाटक ह्यूमन इन्डेवर प्रस्तुत किया गया जिसकी अवधि एक घंटा थी. तीसरे दिन रजिता हेतियाराच्ची द्वारा लिखित एवं निशान्त डिसिल्वा द्वारा निर्देशित अंग्रेजी नाटक ग्रीज याका रिटर्न्स मंचित हुआ. आनन्द डामा श्रीलंका द्वारा प्रस्तुत यह नाटक एक घंटा पांच मिनट अवधि का था. महोत्सव के चौथे दिन लिटिल अर्थ स्कूल आफ थियेटर पलक्कड़ (केरल) की ओर से पी वी शाजिकुमार लिखित मलयाली नाटक बाली्वियन स्टार्स प्रस्तुत किया गया. डेढ़ घंटा अवधि का यह नाटक अरुण लाल ने निर्देशित किया था.

महोत्सव के पांचवें दिन प्राच्यानाट बांग्लादेश की ओर से आजाद अबुल कलाम द्वारा लिखित एवं निर्देशित एक घंटा बीस मिनट अवधि का बांग्ला नाटक द ट्रेजडी आफ पलाशबाड़ी का मंचन हुआ तो छठे दिन विप्लव प्रतीक द्वारा नेपाली में अनूदित मन्नू भंडारी के नाटक महाभोज का मंडला थियेटर नेपाल ने अनूप बराल के निर्देशन में मंचित किया. महोत्सव के आखिरी दिन मिर्नवा

रेपर्टरी थिएटर कोलकाता की बांग्ला प्रस्तुति नासिका पुराण रही. अशोक मुखोपाध्याय द्वारा लिखा यह नाटक सन् 1897 में फ्रांस में मंचित एडमंड रोस्टैंड के नाटक से प्रेरित था. डेढ़ घंटा अवधि के इस नाटक का निर्देशन विप्लव बंद्धोपाध्याय ने किया था.

महोत्सव के समापन पर उत्तराखंड के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज, सुप्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद के उपाध्यक्ष घनानंद गगोड़िया, संस्कृति विभाग की निदेशक डॉ बीना भट्ट, अभिनेता बलराज नेगी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से संयोजक सुमन वैद्य एवं उत्तराखंड में महोत्सव के संयोजक डॉ सुवर्ण रावत उपस्थित रहे. प्रतिदिन निर्देशक दर्शक संवाद का सफल संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीश डोभाल ने किया.

प्रतिदिन की नाट्य प्रस्तुतियों के निर्देशक एवं नाट्य दल से जुड़े सदस्यो को प्रेक्षागृह में उपस्थित रंगकर्मियों एवं साहित्यकारों द्वारा सम्मानित करने एवं प्रस्तुति पर अपनी बेबाक राय देने का सिलसिला भी बदस्तूर जारी रहा. इनमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ अर्जुन देव चारण,प्रभारी निदेशक डॉ सुरेश शर्मा, रंगमंच एवं सिने अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी,पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, संस्कृति विभाग की निदेशक डॉ बीना भट्ट, संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद के उपाध्यक्ष घनानंद गगोड़िया, वरिष्ठ रंगकर्मी अविनन्दा ,एस पी ममगांई, ज्योतिष घिल्डियाल,रोशन धस्माना,प्रो डी आर पुरोहित, शिशिर शर्मा, पत्रकार अनिल चंदोला, उत्तराखंड भाषा संस्थान की पूर्व निदेशक डॉ सविता मोहन,प्रख्यात लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार रंगकर्मी महाबीर रवांल्टा, सुप्रसिद्ध गढ़वाली फिल्म अभिनेता बलराज नेगी व दूरदर्शन देहरादून के निदेशक डॉ सुभाष थलेड़ी शामिल थे.

भारत रंग महोत्सव को सफल बनाने में संयोजक डॉ सुवर्ण रावत के साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से राजेश कुमार सिंह,पंकज ध्यानी,कमल काला, रोहित त्रिपाठी,सोमाली बिष्ट,विजय राजवंशी के अलावा दून घाटी के अभिनव गोयल, मिताली पुनेठा, अनुराग वर्मा, योगेश भट्ट,पंकज चौहान,सूरज नेगी, अभिषेक डोभाल का सहयोग रहा था जबकि शुभारंभ से पहले राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्राध्यापक अब्दुल लतीफ खटाना ने देहरादून शिरकत की थी.

प्रेक्षागृह से बाहर खुले मंच पर प्रतिदिन नाट्य प्रस्तुतियों से पूर्व अनेक लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई जिन्हें खूब सराहा गया. आखिरी प्रस्तुति के दिन श्रीवर्णा रावत के कत्थक नृत्य ने लोगों को सम्मोहित किया.इस महोत्सव के दौरान समय साक्ष्य का पुस्तक स्टाल तथा आखिरी दिन संस्कृति विभाग की ओर से उपस्थित लोगों के लिए परम्परागत पकवानों को परोसना लोक की गंध व स्वाद से आयोजन को सराबोर कर गया.

भारत रंग महोत्सव को सफल बनाने में संयोजक डॉ सुवर्ण रावत के साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से राजेश कुमार सिंह,पंकज ध्यानी,कमल काला, रोहित त्रिपाठी,सोमाली बिष्ट,विजय राजवंशी के अलावा दून घाटी के अभिनव गोयल, मिताली पुनेठा, अनुराग वर्मा, योगेश भट्ट,पंकज चौहान,सूरज नेगी, अभिषेक डोभाल का सहयोग रहा था जबकि शुभारंभ से पहले राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्राध्यापक अब्दुल लतीफ खटाना ने देहरादून शिरकत की थी.

सप्ताहभर चले 21वें भारत रंग महोत्सव में रंगकर्मियों, साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति बराबर बनी रही. पहली बार देहरादून में भारत रंग महोत्सव का होना रंगमंच के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की एक बड़ी उपलब्धि के रुप में देखा जा सकता है जिसने अपनी दमदार नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से एक यादगार आयोजन के रुप में अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रहा

सप्ताहभर चले 21वें भारत रंग महोत्सव में रंगकर्मियों, साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति बराबर बनी रही. पहली बार देहरादून में भारत रंग महोत्सव का होना रंगमंच के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की एक बड़ी उपलब्धि के रुप में देखा जा सकता है जिसने अपनी दमदार नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से एक यादगार आयोजन के रुप में अपनी अमिट छाप छोड़ने में सफल रहा. उल्लेखनीय है कि 6 फरवरी 2020 को लोकार्पित नवनिर्मित प्रेक्षागृह को अब गढ़वाली गीत व संगीत के शिखर पुरुष स्व जीत सिंह नेगी के नाम से जाना जाएगा.

(लेखक रंगकर्मी एवं वरिष्ठ साहित्यकार हैं)

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