• हिमांतर ब्‍यूरो, नई दिल्‍ली

पर्वतीय लोकविकास समिति, so उत्तराखंड एकता मंच और भिलंगना क्षेत्र विकास समिति द्वारा अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन बलिदान दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन मिनी मार्केट जनकपुरी नई दिल्ली में किया गया.

पर्यावरण

मुख्य अतिथि शीर्ष सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल ने कहा कि सुमन जी ने पूरे देश की आजादी की लड़ाई लड़ी, 84 दिन तक की भूख हड़ताल इतिहास की बड़ी so घटना है. राजशाही के विरुद्ध अलख जगाने वाले टिहरी के मुक्तिनायक श्रीदेव सुमन की घाटियां और पट्टियां आज भी विकास की राह ताक रही  हैं. भाजपा पर्वतीय प्रकोष्ठ दिल्ली के प्रभारी श्याम लाल मजेड़ा ने कहा कि श्रीदेव सुमन के योगदान का राष्ट्रीय इतिहास में भावी पीढ़ियों की प्रेरणा के लिए उचित और ठोस उल्लेख होना चाहिए.

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भिलंगना क्षेत्र विकास समिति के महासचिव शिव सिंह राणा ने कहा कि आजादी के 74 वर्ष बाद और पृथक राज्य बनने के 21 वर्ष बाद भी सुमन की टिहरी हर क्षेत्र में उपेक्षित और पिछड़ी ही है. गोष्ठी में कवि बीर सिंह राणा ने श्रीदेव सुमन के क्रांतिकारी जीवन पर एक कविता प्रस्तुत की. उत्तराखंड एकता मंच की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी so नेगी, शिंजन योग ट्रस्ट के अध्यक्ष शशिमिहन शर्मा,  भाजपा दिल्ली कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप चौधरी,भाजपा बौद्धिक प्रकोष्ठ के सह संयोजक इंजीनियर मान सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मनोज चौधरी,प्रवासी प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष लकी नेगी, पंचन्नद से जुड़ी आरती चौहान, अंजलि रावत, वंदना रेड्डी,  मीनू रावत, आचार्य रमेश भट्ट, धीरज नेगी, उदय बर्तवाल, सावित्री जोशी और हरीश लोहनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए.

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समारोह की अध्यक्षता करते हुए मीडियाकर्मी और पर्वतीय लोकविकस समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि श्रीदेव सुमन जी के जन्मशताब्दी वर्ष पर समिति ने सुमन जी की so स्मृति में केंद्र सरकार से उन पर डाक टिकट जारी करने का आग्रह किया था, हमें आशा है देर सवेर उस पर विचार होगा. दुख इस बात का होता है कि देश को प्रकाशित करने वाली टिहरी के डूब क्षेत्र के गांव ही पानी के संकट से जूझ रहे हैं और उपेक्षित और बदहाल टिहरी विकास से वंचित है. सुमन जी के बलिदान दिवस पर हमें गूंगी बहरी टिहरी के लिए आवाज उठाने का संकल्प लेना होगा.

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इस अवसर पर विभिन्न so संस्थाओं की ओर से सूर्य प्रकाश सेमवाल का संस्था प्रतिनिधियों ने स्वागत किया. विचार गोष्ठी का संचालन पर्वतीय लोकविकास समिति के महासचिव दीवान सिंह रावत ने किया और धन्यवाद ज्ञापन उत्तराखंड सांस्कृतिक विकास समिति के अध्यक्ष गंभीर सिंह नेगी ने किया.

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हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

5 Comments

    Jai Uttrakhand Jai Bharat
    बाहरी लोगों के लिए पहाड़ी राज्य में भूमि खरीद पर प्रतिबंध की मांग को लेकर उत्तराखंड के नेटिज़न्स राज्य में आंदोलन शुरू कर दिया है। ‘उत्तराखंड मांगे भुकानून’ (उत्तराखंड भूमि कानून चाहता है) नामक आंदोलन धीरे-धीरे कलाकारों, कार्टूनिस्टों के शामिल होने और नवीन रणनीति पेश करने के साथ गति पकड़ रहा है।

    Manoj Negi

    Jai Uttarakhand Jai Bharat

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि राज्य में बाहरी लोगों को कृषि भूमि खरीदने से रोककर भूमि सुधारों पर फिर से विचार करने का समय आ गया है।

    Manoj Negi

    उत्तराखंड (यूके) के लोग राज्य में लागू वर्तमान भूमि कानून को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मुख्य मुद्दा उत्तरांचल (यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम 1950 – अनुकूलन और निगमन) संशोधन अध्यादेश 2003 दिनांक 12 सितंबर, 2003 को बाद के संशोधनों के साथ बहाल करना है।

    उत्तराखंड राज्य (जो उस समय उत्तरांचल राज्य के रूप में अधिसूचित किया गया था) के निर्माण की शुरुआत में, बाहरी लोगों को कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर हस्तांतरण को देखते हुए, लोगों ने कृषि भूमि के अनियंत्रित हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए एक भूमि कानून बनाने की मांग की और यहां तक ​​कि अधिरोपण की भी मांग की थी। अनुच्छेद 371, जैसा कि जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, सिक्किम आदि राज्यों के लिए किया गया था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और गुजरात राज्यों में लागू भूमि कानून का उदाहरण दिया। राज्य के एक सामाजिक कार्यकर्ता समूह के आग्रह पर तत्कालीन सरकार ने अध्यादेश जारी किया।

    Jai Uttarakhand Jai Bharat

    उत्तराखंड मांगे भुकानून’ (उत्तराखंड भूमि कानून चाहता है), गति धीरे-धीरे संगीतकारों, चित्रकारों के साथ साइन अप करने और सरल तरीकों को प्रस्तुत करने के साथ दर का चयन कर रही है।
    कई लोग इसी तरह पूर्वोत्तर राज्यों, गोवा और कई अन्य राज्यों की तरह अनुच्छेद 371 को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

    महानगरीय प्रतिबंधों और राजधानी राज्य के छावनी स्थानों जैसे नैनीताल, मसूरी, देहरादून, हरिद्वार और कई अन्य क्षेत्र के प्रधान कार्यालय के भीतर आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति या निवास खरीदने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। किसी भी प्रकार के विशिष्ट या कंपनी से मिलकर महानगरीय प्रतिबंधों के भीतर जितनी चाहें उतनी जमीन खरीद सकते हैं।

    Savirti Joshi

    Jai Uttarakhand Jai Bharat

    यह निर्णय स्थानीय लोगों के जीवन, भाषा और आने वाली पीढ़ी को प्रभावित करेगा। व्यक्तियों को अपना चरित्र
    खोने और उत्तर भारत में सिर्फ एक और राज्य बनने का डर है। अपराध प्रतिशत की बात करें तो, राज्य में आपराधिक गतिविधियों में मामूली वृद्धि देखी जा रही है, इसका निश्चित रूप से नए भूमि नियमों से कुछ लेना-देना है, क्योंकि स्थानीय लोग बाहरी लोगों को दोष दे रहे हैं।

    मूल निवासियों ने धर्मांतरण और चर्चों और मस्जिदों के अवैध निर्माण की शिकायत की है। उत्तराखंड के श्रीनगर जैसी जगहों पर बलात्कार में अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी शामिल रहे हैं। ये अप्रवासी घरों में घुस जाते हैं या उन मूल निवासियों की भूमि पर कब्जा कर लेते हैं जिन्होंने नौकरी के लिए गांवों को छोड़ दिया है।

    इंटरनेट पर लोग अपना दर्द दिखा रहे हैं और इस तरह की गतिविधि को रोकने और स्थानीय लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए एक नए कानून की मांग कर रहे हैं।

    Meenakshi Negi

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