
हैंडमेड राखियों की बढ़ी मांग, NRML एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार की राह पर | दून के प्रमुख मॉल और सचिवालय में लगेंगे स्टॉल
- नीरज उत्तराखंडी
रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की बनाई हस्तनिर्मित राखियों की मांग बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।
रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में अपनी अलग पहचान बना रही है। नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उनका लक्ष्य दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का है, जिनमें करीब 1,500 राखियां बन चुकी हैं।
पिछले साल 1,200 राखियों से 25 हजार रुपये का मुनाफा
लीला और अलका के मुताबिक पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिला। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बेचीं, जिससे लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। पिछले वर्ष मिली सफलता और ग्राहकों की बढ़ती मांग को देखते हुए इस बार उन्होंने उत्पादन बढ़ाया है।
प्राइवेट नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया कारोबार
अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला रावत के साथ स्वरोजगार की राह चुनी। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। यहां राखियों के साथ अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जा रहे हैं।
अलका का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय बढ़ाने का बेहतर अवसर मिला। सरकारी योजनाओं और समूह के माध्यम से मिले सहयोग ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

सोशल मीडिया से भी मिल रहे ऑर्डर
हैंडमेड राखियों की मांग अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए भी ग्राहकों से ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑनलाइन ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को स्थानीय बाजार के साथ डिजिटल बाजार का भी लाभ मिल रहा है।
पारंपरिक से आधुनिक डिजाइन तक की राखियां
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे और रिबन समेत विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। डिजाइनिंग से लेकर प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार तक का काम महिलाएं स्वयं संभाल रही हैं।
वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं लीला
आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक इस दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने से स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। समूह की महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कारोबार का भी विस्तार कर रही हैं।
सहसपुर और डोईवाला में भी बड़े स्तर पर उत्पादन
रायपुर के अलावा सहसपुर और डोईवाला विकासखंड में भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं अलग-अलग डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।
सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर से जुड़ी महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनके उत्पादों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ सेलाकुई, सहसपुर और विकासनगर में बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
दून के प्रमुख मॉलों में लगेंगे स्टॉल
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉल में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने लोगों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और अन्य स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की।
24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में पांच स्टॉल
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बेहतर गुणवत्ता वाली राखियां बाजार में उतार रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे।
इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री करेंगी।
रक्षाबंधन के अवसर पर राखी निर्माण से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की यह पहल नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार को नई मजबूती दे रही है। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी समेत जिलेभर की महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
