अंतरराष्ट्रीय योग विभूषण अवार्ड से सम्मानित हुए योग गुरु डॉ. नवदीप जोशी

Dr Navdeep Joshi Yoga Teacher

 

वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नादयोग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के
क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला सम्मान

वियतनाम। नादयोग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए योग गुरु डॉ. नवदीप जोशी को ‘अंतरराष्ट्रीय योग विभूषण अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। वियतनाम के हनोई स्थित आई.वी.एस. इंटरनेशनल स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वियतनाम योग फेडरेशन के अध्यक्ष वु चोंग लोई ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

सम्मेलन का आयोजन वियतनाम योग फेडरेशन, एसकेएम योग, हॉक विए योग सॉन्ग खोए, वियतनाम, हे थोंग जिओ डक एविस, वियतनाम तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में वियतनाम के खेल, योग और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।

इस अवसर पर वियतनाम योग फेडरेशन के अध्यक्ष वु चोंग लोई, मैडम न्यूंग तथा वु होंग एन सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में डॉ. नवदीप जोशी को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अन्य साधकों एवं विशेषज्ञों को भी सम्मानित किया गया। इनमें स्वामी सुनील भगत, योगाचार्य ढाकाराम, डॉ. निशा जोशी, मनमोहन योगी और डॉ. आर.एस. डबास सहित अन्य योग साधकों एवं विशेषज्ञों को ‘योग रत्न अवार्ड’ प्रदान किया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. नवदीप जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता तनाव, मानसिक दबाव और विद्यार्थियों में बढ़ती चिंताएं गंभीर विषय हैं। उन्होंने कहा कि ‘22 मिनट का नादयोग चिकित्सा अभ्यास’ तनाव प्रबंधन और मानसिक एकाग्रता में सहायक हो सकता है। उनके अनुसार नादयोग के अभ्यास से आंतरिक शांति, एकाग्रता और मानसिक संतुलन की दिशा में सहायता मिल सकती है।

कार्यक्रम के भारतीय संयोजन में डॉ. विनोद कश्यप और योगाचार्य शिवम मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सम्मेलन में भारत और वियतनाम के बीच योग, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।

डॉ. नवदीप जोशी को अंतरराष्ट्रीय योग विभूषण अवार्ड मिलने पर योग जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने इसे नादयोग और भारतीय योग परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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