उत्तरकाशी

उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के विकासखंड नौगांव के अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंगसी में शिक्षा व्यवस्था भय और असुरक्षा के साए में संचालित हो रही है. करीब पांच दशक पहले बने इस विद्यालय भवन को वर्ष 2023 में ही तकनीकी संस्था लोनिवि बड़कोट द्वारा निष्प्रयोज्य (अनफिट) घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद यहां नन्हे बच्चों को उसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है. विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है. छत से टपकते पानी से बचाव के लिए ऊपर काली तिरपाल बिछाई गई है. टिन की चादरों को सहारा देने के लिए लगाए गए तख्ते और लकड़ी की बल्लियां भी सड़ चुकी हैं. भवन की एक दीवार में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और वह तिरछी हो गई है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है. कमरों में फैली नमी (सीलन) के कारण बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा भी लगातार बना ...
कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

उत्तरकाशी
  मुखौटे पहनकर जीवंत होती लोककथा ढोल-दमाऊ की थाप पर पीढ़ियों से निभाई जा रही अनूठी परंपरा, लोकसंस्कृति को सहेज रहे ग्रामीणनीरज उत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीरवांई घाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति आज भी अनेक प्राचीन परंपराओं के माध्यम से जीवंत दिखाई देती है. विकासखंड पुरोला के कंडियाल गांव में आज भी मुखौटे पहनकर शेर और भालू का पौराणिक लोकनृत्य प्रस्तुत किया जाता है. यह अनूठा नृत्य गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को ग्रामीण आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. गांव में विशेष अवसरों, पारंपरिक उत्सवों और सामुदायिक आयोजनों के दौरान युवक शेर और भालू के रूप में सजे विशेष मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं. ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर होने वाला यह नृत्य पूरे वातावरण को उत्साह और रोमांच से भर देता है. नृत्य के दौरान कलाकार शेर ...
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

उत्तरकाशी
 नीरजउत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र की लोक गायिका, कवयित्री और मैक्रम डिजाइन प्रशिक्षिका राजुली बत्रा आज क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान है। मटियानी (दुडोनी) में जन्मी और मंजियाली (नौगांव) में ससुराल होने के बावजूद राजुली बत्रा ने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।बचपन से ही संस्कृति के संरक्षण का संकल्प राजुली बत्रा ने वर्ष 2001 में मटियाली छानी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर रामलीला का आयोजन शुरू करवाया। इस राम...
सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी/पुरोला/उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्रों मोरी, सरबडियार, हर्षिल और डुंडा में सदियों पुरानी पारम्परिक कताई-बुनाई की कला आज संकट के दौर से गुजर रही है। भेड़-बकरी पालन से प्राप्त ऊन पर आधारित यह कुटीर उद्योग कभी स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन हुआ करता था, लेकिन बदलते समय, बाजार की कमी और आधुनिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धा के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले लगभग हर गांव में कई घरों में चरखा और करघा चलता था, लेकिन आज गिने-चुने परिवार ही इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।इन क्षेत्रों में विशेषकर महिलाएं घरों में चरखे से ऊन कातकर हाथकरघे पर शॉल, थुलमा, टोपी, मफलर और अन्य ऊनी वस्त्र तैयार करती रही हैं। यह शिल्प स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।भेड़-बकरी पालन से...
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने रविवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “नारी तू नारायणी” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा, समाज सेवा, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, संस्कृति और जल संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्यभर की 38 वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया. सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज उन महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है, जिनके त्याग, संघर्ष, स्नेह और संस्कारों ने परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्नेह, त्याग और आशीर्वाद से पीढ़ियाँ आगे बढ़ती हैं और समाज निरंतर प्रगति करता है. महिलाएँ माँ के रूप मे...
उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी, उत्तराखंड हलचल
  जौनसार-बावर की आस्था चौहान का प्रथम प्रयास में चयन, मुहम्मद उमर हाशमी को AIR 549 रैंक नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीशुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम में उत्तराखंड के युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।जनपद उत्तरकाशी के दो होनहार युवाओं ऋषभ नौटियाल और आशुतोष नौटियाल ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।वहीं जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था चौहान ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में चयन हासिल कर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी मिसाल पेश की है।इसके अलावा AIMIM उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नय्यर काजमी के भतीजे मुहम्मद उमर हाशमी ने भी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 549 प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उत्तरकाशी के दो युवाओं ने बढ़ाया जिले का मान जनपद उत्तरकाशी के ऋषभ नौटियाल,...
सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

उत्तरकाशी
  पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे सर बडियारनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड पुरोला अंतर्गत सीमांत उच्च हिमालयी क्षेत्र सर बडियार में स्थित सरुताल ट्रेक पर्यटन एवं रोजगार की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। यह ट्रेक न केवल साहसिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत स्रोत भी साबित हो सकता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे 2024 में ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किए जाने के बाद अब इसकी प्रसिद्धि बढ़ रही है और विकास की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। आवश्यकता है इसे पूर्ण रूप से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की, ताकि पर्यटन को नए पंख लगें और दूरस्थ गांवों में आर्थिक उन्नति हो। सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी के सर बडियार क्षेत्र (सरनौल-सोतरी या आसपास के गांवों से शुरू) एक अद्वितीय हिमालयी पदयात्रा है, जो लगभग 40+ किलोमीटर लंबा है और सामान्यतः 5 स...
पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडीहिमालयी क्षेत्रों की समृद्ध पाक परंपरा का अहम हिस्सा रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’ आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं. कभी त्योहारों, मेलों और विशेष अवसरों की शान माने जाने वाले ये व्यंजन अब धीरे-धीरे पहाड़ी रसोई से गायब होते जा रहे हैं.बदलती जीवनशैली का असरविशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता, शहरीकरण और नई पीढ़ी की बदलती खान-पान आदतों ने पारम्परिक व्यंजनों को पीछे धकेल दिया है. पहले जहां घरों में गेहूं या मंडुए के आटे से सिड़ा (भाप में पका व्यंजन) और असका (स्थानीय शैली की रोटी/पकवान) बनाए जाते थे, वहीं अब उनकी जगह बाजारू खाद्य पदार्थों ने ले ली है.मेहनत और समय की मांगग्रामीण महिलाओं के अनुसार, सिड़ा–असका बनाने की प्रक्रिया समय और धैर्य की मांग करती है. आटे को विशेष तरीके से गूंथना, उसे खमीर उठाने देना और पारम्पर...
सौड़-सांकरी का देवगोत मेला: देव आस्था, मैती-धियाणी मिलन और लोक संस्कृति का भव्य संगम

सौड़-सांकरी का देवगोत मेला: देव आस्था, मैती-धियाणी मिलन और लोक संस्कृति का भव्य संगम

उत्तरकाशी
  देव आस्था, रिश्तों की गरमाहट और लोक संस्कृति का संगम नीरज उत्तराखंडीसौड़-सांकरी (मोरी),  उत्तरकाशी   हिमालय की शांत वादियों में जब ढोल-दमाऊ की थाप गूंजती है और रणसिंघा की ध्वनि देवदार के जंगलों से टकराकर लौटती है, तब समझ लीजिए कि पहाड़ में कोई बड़ा लोक उत्सव आकार ले चुका है. सीमांत विकासखंड मोरी के सौड़-सांकरी गांव में आयोजित देवगोत मेला और मैती-धियाणी मिलन कार्यक्रम ने इस बार भी आस्था, परंपरा और भावनाओं को एक सूत्र में पिरो दिया.लोक देवता सोमेश्वर महादेव के सानिध्य में सजे इस मेले की शुरुआत विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना और देवडोली के स्वागत के साथ हुई. मंदिर परिसर में उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़, जयकारों की अनुगूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर थाप ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. श्रद्धालुओं ने भगवान सोमेश्वर महादेव के श्रीचरणों में नमन कर क्षेत्र की सुख-सम...
 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

उत्तरकाशी
पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका की रीढ़ बना भेड़-बकरी पालन, हजारों परिवारों को मिल रहा सहारानीरज उत्तराखंडी, पुरोलापर्वतीय क्षेत्रों में खेती की सीमित जमीन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच भेड़-बकरी पालन पहाड़ की आर्थिकी और आजीविका की मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है. सर बड़ियार क्षेत्र के दुर्गम गांवों में हजारों परिवार इस पारंपरिक व्यवसाय से सीधे जुड़े हुए हैं.आय और आत्मनिर्भरता का आधार विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ में छोटे और सीमांत किसानों के लिए भेड़-बकरी पालन कम लागत और शीघ्र आमदनी देने वाला व्यवसाय है.बकरी का दूध, मांस और खाद स्थानीय बाजार में आसानी से बिक जाते हैं. भेड़ों से ऊन का उत्पादन होता है, जो हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग में उपयोगी है. प्राकृतिक चरागाहों की उपलब्धता से चारे की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है.महिलाओं की बढ़ती भागीदारी...