उत्तराखंड हलचल

मूली की ‘थिचवानी’: एक स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजन 

मूली की ‘थिचवानी’: एक स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजन 

हिमालयन अरोमा, अल्‍मोड़ा
डॉ. मोहन चंद तिवारीअपने गांव जोयूं जब भी जाता हूँ तो मूली की थिच्वानी मुझे बहुत पसंद है. हमारे पड़ोस के गांव मंचौर की मूली की तो बात ही और है. दिल्ली जब आता हूं तो पहाड़ की मूली लाना कभी नहीं भूलता. सर्दियों में तो यह मूली की थिच्वानी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है. मूली तो मैदानों की भी बहुत लाभकारी है किंतु पहाड़ों की शलगमनुमा मूली की बात ही कुछ और है. इसमें हिमालय की वनौषधि के गुण समाविष्ट रहते हैं जो मैदानों में कैमिकल खाद से पैदा हुई मूली में नहीं मिलते. हमारे इलाके मंचौर की मूली इस दृष्टि से भी बहुत प्रसिद्ध है कि वहां की ताजी-ताजी मूली मिलती बड़ी मुश्किल से है क्योंकि पैदा ही बहुत कम होती है.आज मैं अपने इस लेख द्वारा पहाड़ी मूली से बनने वाली सब्जी 'थिचवानी' पर कुछ जानकारी शेयर करना चाहुंगा.कुमाऊं के स्थानीय व्यंजनों में एक स्थानीय कहावत है मनुवौ रवॉट, झुंगरौ भात, मुअकि थेच...
पिंक प्लाजो नहीं, परंपरागत परिधान में दिखी महिलाएं

पिंक प्लाजो नहीं, परंपरागत परिधान में दिखी महिलाएं

हरिद्वार
हिमांतर ब्यूरो, हरिद्वारजब अपने गांव से दूर दूसरे शहर में रहते हैं, तो हम अपने बार-त्योहार और संस्कृति से भी दूर हो जाते हैं. हालांकि, किसी ना किसी रूप में हम गांव से जुड़े तो रहते हैं. लेकिन, शहरों में नौकरी की मजबूरी और दो वक्त की रोटी के लिए अक्सर व्यस्त रहते हैं और इस व्यस्तता के बीच यह भी भूल जाते हैं कि जिस शहर में हम रह रहे हैं, वहां मेरे गांव, गांव के पास के दूसरे गांव के लोग भी रहते हैं.इनमें कुछ नौकरी में साथ हैं. कुछ दूसरे विभागों में तैनात हैं. कुछ का रोज मिलना हो जाता है, जबकि कुछ चाहकर भी एक-दूसरे से मिल पाते हैं. इसी दूरी को मिटाने के लिए हरिद्वार में रह रहे राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता उत्तरकारी जिले के नौगांव ब्लॉक की बनाल पट्टी के रचनात्मक शिक्षक दिनेश रावत भी शिक्षा विभाग में तैनात हैं. उनकी पत्नी भी यहीं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं. दिनेश रावत ने हमेशा की तरह ...
दादी के कैनवास से शुरू हुई पेटिंग की शुरुआत…

दादी के कैनवास से शुरू हुई पेटिंग की शुरुआत…

उत्तरकाशी
आशिता डोभाल उत्तराखंड देवभूमि ऋषिमुनियों की तपस्थली होने के साथ साथ मां गंगा-यमुना का उद्गम स्थल ही नही बल्कि कुछ ऐसे साधकों की जन्मभूमि और कर्मभूमि भी है जो आज इक्कसवीं सदी में भी अपनी थाती माटी प्रेम से ओत प्रोत होकर सिर्फ यहां को संस्कृति और कला को देश दुनिया में पहचान दिला रहे हैं, उन साधकों में एक नाम है मुकुल बडोनी, जो मूल रूप से कांदला बड़ेथी चिन्यालीसौड़ के एक साधारण परिवार में जन्मे हैं, जिनके पिता एक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं और माताजी कुशल गृहणी. विद्यार्थी जीवन में अव्वल रहने वाला मुकुल हमेशा अध्यापकों के चहेते विद्यार्थियों में रहता था. स्नातकोत्तर चित्रकला से करने के बाद बीएड किया व तत्पश्चात पिट्स बीएड कॉलेज उत्तरकाशी में चित्रकला प्रशिक्षक के रूप में तैनात हैं.मुकुल बताते हैं कि अपनी थाती और माटी से जो उन्हे लगाव हुआ उसमे उनके परिवार का विशेष सहयोग रहा. घर मे...
जोशीमठ भू-धंसाव : इस स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार?

जोशीमठ भू-धंसाव : इस स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार?

चमोली
जोशीमठ में भू-धंसान की त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित की जाए!डॉ. मोहन चंद तिवारीधार्मिक,पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर जोशीमठ भू-धंसाव के कारण इस साल की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है. उत्तराखंड के जोशीमठ शहर में भू-धसाव की त्रासदी को लेकर हर तरफ चिंता है. जोशीमठ के डीएम ने बताया है कि नगर में कुल 561 भवनों में दरार आई है. साथ ही दो बहुमंजिला होटलों के खतरे की जद में आए पांच भवन खाली कराए गए हैं. उत्तराखंड डिजास्टर एंड एक्सीडेंट सिनोप्सिस (उदास) की रिपोर्ट के अनुसार, भी जोशीमठ में 500 घर रहने के लायक नहीं हैं. जोशी मठ की ग्राउंड जीरो से मिली मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कहा जा सकता है कि जोशीमठ में भू-धंसाव किसी बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रहा है. इस ऐतिहासिक शहर में पड़ी दरारें, इस बात की गवाह हैं कि हालात ठीक नहीं. वहीं प्रशासन के राहत बचाव कार्य संतोष जनक नहीं हैं, जिससे प्रभावितों को ...
उत्तराखंड के गांधी: जब मैनें उन्हें पहली बार उदास, हताश और निराश देखा! 

उत्तराखंड के गांधी: जब मैनें उन्हें पहली बार उदास, हताश और निराश देखा! 

टिहरी गढ़वाल
सूर्य प्रकाश सेमवाल पहाड़ के गाँधी कहलाने वाले हिमालय गौरव स्व. इन्द्रमणि बडोनी अपने विराट एवं उदात्त  व्यक्तित्व तथा सादगी व सहज व्यवहार के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं वरन् सामान्य जनमानस के लिए भी सदैव प्ररणाप्रद एवं वदनीय बने रहेंगे. अपने अनुकरणीय आचरण एवं निश्च्छल कार्यशैली के बल पर जहां उन्होंने दलगत व क्षेत्रीय भावना से ऊपर होकर समूचे पहाड़ी क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान व साख बनाई थी वहीं संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक जागरण से जुड़े अन्य विविध क्षेत्रों में क्रांतिकारी पहल की. बडोनी जी चीन के तिब्बत बॉर्डर से सटे अंतिम सीमांत गाँव गंगी से लेकर पूरे टिहरी गढ़वाल, पर्वतीय क्षेत्र, लखनऊ और दिल्ली तक भी सभी  लोगों के बीच आदरणीय बने रहे. पृथक उत्तराखंड आंदोलन के पुरोधा व उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापकों में से एक जनता के लोकप्रिय प्रतिनिधि बडोनी जी...
अनूठी पहल: फ्रांस से उच्च शिक्षा ग्रहण कर नीरज ने ठानी पहाड़ की राह

अनूठी पहल: फ्रांस से उच्च शिक्षा ग्रहण कर नीरज ने ठानी पहाड़ की राह

चम्‍पावत
रिवर्स माइग्रेशन की पेश की मिसाल   चम्पावत के पाटी ब्लॉक में स्थित सुदूर ग्राम करौली निवासी नीरज जोशी ने फ्रांस से उच्च शिक्षा ग्रहण कर अपनी पैतृक भूमि पर होमस्टे का निर्माण कर गांव में रोजगार के स्रोतों को विकसित कर रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल कायम की.  नीरज की प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा गोशन स्कूल नानकमत्ता व जवाहर नवोदय विद्यालय रुद्रपुर एवं उच्च शिक्षा डी०एस०बी० कैंपस नैनीताल (B.Sc.), पंतनगर विश्विद्यालय पंतनगर (M.Sc.) एवं मोंटपेलियर सुपएग्रो फ्रांस (M.S.) से हुई. नीरज ने अधिकांश समय महानगरों की चकाचोंद में बिताने के पश्च्यात, 30 वर्षों से पूर्वजों द्वारा छोड़ी गयी बंजर भूमि को आबाद करने का निर्णय लिया. विगत तीन वर्षों से लगातार विभिन्न विभागों के सहयोग से, वे कृषि सम्बंधित कार्यों का विश्लेषण कर आय के स्रोतों का लाभ ग्रामीणों को साझा कर पहाड़ों से हो रहा पलायन को रोकने का अथक प्रयास कर...
रचा इतिहास: चमोली की मानसी नेगी ने जीता गोल्ड, 10 किमी वॉक रेस में तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

रचा इतिहास: चमोली की मानसी नेगी ने जीता गोल्ड, 10 किमी वॉक रेस में तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड

देहरादून
उत्तराखंड की बेटी मानसी नेगी ने एक बार फिर से परचम लहराया है. मानसी नेगी ने 37वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के तहत 10 किमी रेस वॉक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है. मानसी ने गुवाहाटी असम में चल रही 37वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10 किमी रेस वॉक प्रतियोगिता में नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर, स्वर्ण पदक जीतने पर देवभूमि का नाम रौशन किया है.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली निवासी मानसी नेगी द्वारा 37वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 10 किमी रेस वॉक प्रतिस्पर्धा में नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम करते हुए स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी है. मुख्यमंत्री ने कहा की मानसी नेगी की यह स्वर्णिम सफलता देवभूमि उत्तराखंड के अनेक नवोदित खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी. मानसी नेगी उत्तराखंड की सीमांत जनपद चमोली की रहने वाली है. दशोली विकासखंड स्थित मजोठी गांव की मानसी नेगी का जीवन काफ...
पर्वतीय राज्य का सपना क्या 22 वर्षों में पूरा हुआ?

पर्वतीय राज्य का सपना क्या 22 वर्षों में पूरा हुआ?

देहरादून
प्रकाश उप्रेती 9 नवंबर की तारीख़ पर्वतीय राज्य का सपना देखने वालों के लिए ऐतिहासिक महत्व की है.आज पूरे उत्तराखंड की सुबह "चलुक्" (भूकंप) से डोलती धरती के साथ हुई. ऐसा लगा कि गोया धरती भी 22 वर्षों की चिर निंद्रा से उत्तराखंड वासियों को जगाने की कोशिश कर रही है. क्या हम अब भी जागे? उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक- 2000 को 1 अगस्त की देर शाम जब लोक सभा ने ध्वनिमत से पारित किया तो देश के नक्शे पर 27वें राज्य के रूप में उत्तराखंड ( पर्वतीय राज्य की माँग के साथ) बनने का रास्ता साफ हुआ. 10 अगस्त को इस बिल को मंजूरी देने के पश्चात राष्ट्रपति ने 28 अगस्त , 2000 को राज्य के गठन की अधिसूचना जारी कर दी थी. अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने 1 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड की पहली सरकार गठन करने का फैसला किया, लेकिन पता चला कि उक्त दिन "ग्रह नक्षत्रों" के हिसाब से "शुभ" नहीं है. "शुभ" की आशा में 9 नवंबर, 2000 को...
लौहसिद्ध बनवासी हनुमान मंदिर का स्थापना दिवस एवं किसान मेला आयोजित

लौहसिद्ध बनवासी हनुमान मंदिर का स्थापना दिवस एवं किसान मेला आयोजित

पौड़ी गढ़वाल
हिमांतर, ऋषिकेशयमकेश्वर ब्लॉक के तल्ला बनास गांव में आज प्राचीन लौहसिद्ध हनुमान मंदिर का स्थापना दिवस मनाया गया. इस उपलक्ष्य में मंदिर समिति की गौमुख गौशाला ने देश के पहली कृषि विश्विद्यालय जीबी पंत कृषि विश्विद्यालय और राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान केंद्र करनाल के तत्वाधान में किसान मेला का आयोजन किया. शनिवार को यमकेश्वर के तल्ला बनास स्थित गोमुख गौशाला गढ़खाल में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेम चंद अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में संकटमोचन लौहसिद्ध हनुमान जी की पूजा में शामिल के उपरांत कार्यक्रम का अनावरण किया. इस मौके पर कैबिनेट मंत्री श्री प्रेम चंद्र अग्रवाल ने कहा कि संकटमोचन हनुमान के आशीर्वाद से पहाड़ के किसानों को सशक्त बनाने के लिए गौमुख गौशाला की इस पहल से हम अपनी संस्कृति और सनातन धर्म को आगे बढ़ाते हुए पहाड़ के लोगो की आय के स्रोत के लिए साथ मिलकर काम करें.डॉ अग्र...
चारधाम यात्रा : 19 नवंबर को बंद होंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट  

चारधाम यात्रा : 19 नवंबर को बंद होंगे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट  

देहरादून
हिमांतर वेबडेस्कचारधाम यात्रा शनै शनै समापन की ओर बढ़ रही है. चारों धामों में साढे़ तैतालीस लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किये तथा हेमकुंट साहिब लक्ष्मण मंदिर को मिला कर तीर्थयात्रियों की  यह संख्या छयालीस लाख से अधिक पहुंच गयी. इस यात्रावर्ष श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर शनिवार को शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे. चारो धामों में से श्री केदारनाथ धाम के कपाट तथा यमुनोत्री धाम के कपाट 27 अक्टूबर तथा 26 अक्टूबर को गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो गये है.  श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालु  निरंतर  पहुंच रहे है. आज तक 1680775 (सोलह लाख अस्सी  हजार सात  सौ पिच्चतर) तीर्थयात्री  बदरीनाथ धाम पहुंच गये है. वर्ष 2019 में इस दो  दशकों में सर्वाधिक 10 लाख 40 हजार श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचे थे. इसी तरह श्री केदारनाथ धाम में इस यात्रा वर्ष 1563278 तीर्थ यात्री पहुंचे हैं. यमुनोत्री धाम में 485688...