March 5, 2021
समाज/संस्कृति

‘दो व्यक्तियों के बीच का गीतात्मक वाक्य व्यवहार है बाजूबन्द गीत’

  • ध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’

समाज में गायन की अनको विधाओं का because चित्रण देखने व सुनने को मिल जाता है. छौपती, छूड़े, पवाड़े, बाजूबन्द, लामण, तांदी गीत, आदि  मनोरंजन तो हैं ही साथ ही जीवन यथार्थ से जुड़ी सुख -दुःख,  प्रेम प्रसंगों व अनको घटनाओं पर भी आधारित हैं. इन्हीं विधाओं में गायन की एक विधा है बाजूबन्द.

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बाजूबन्द एक प्रकार के संवाद गीत हैं. so जो प्रायः स्त्री पुरुषों द्वारा वनों में घास- पत्ती, लकड़ी- चारा लाते हुए या भेड़- बकरी, गाय- भैंस चराते और खेतों में काम करते लम्बी सुरीली आवाज में गाये जाते हैं. ये प्रेम व मनोरंजन के लिए भी हो सकते हैं.

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‘‘बाजूबन्द दो व्यक्तियों के but बीच का गीतात्मक वाक्य व्यवहार है जो नितान्त वैयक्तिक होता है वह सामुदायिक मनोरंजन का आधार न हो कर एक प्रकार का आत्म निवेदन है जो वनों के एकान्त में दूसरे के कानों में भले ही पड़ जाये पर वह किसी एक को संबोधित होता है” -डॉ. गोविन्द चातक

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बाजूबन्द गीतों में एक पक्ष दूसरे so पक्ष के प्रश्नों का प्रत्युत्तर गायन शैली में देता हैं जिसे दुवा देना कहते हैं. डॉ. गोविन्द चातक लिखते हैं कि ‘‘बाजूबन्द दो व्यक्तियों के बीच का गीतात्मक वाक्य व्यवहार है जो नितान्त वैयक्तिक होता है वह सामुदायिक मनोरंजन का आधार न हो कर एक प्रकार का आत्म निवेदन है जो वनों के एकान्त में दूसरे के कानों में भले ही पड़ जाये पर वह किसी एक को संबोधित होता है”.

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इन गीतों में ससुराल में लड़की का दिल न लगना, प्रेमिका का किसी के प्रति आत्मीयता जैसे भाव भी सुनने को मिलते हैं. इनमें दोनों पक्ष दुवों के माध्यम से अपनी बात कहते हैं. दुवों में अनमेल विवाहों की पीड़ा, ससुराल वालों की प्रताड़ना, पति का घर से बाहर रहने की  बिरह वेदना, प्रेमी- प्रेमिका द्वारा रूप सौन्दर्य का बखान बाजूबन्द गीतों का मुख्य विषय होता है.

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बाजूबन्द गीतों में प्रथम पंक्ति but केवल तुक मिलाने के लिए ही प्रयुक्त होती है तथा दूसरी पंक्तियों में बाजूबन्द  के दुवा का समग्र चित्र अर्थात मूल भाव निहित होता है. रवांई-जौनपुर क्षेत्र में गाये जाने वाले कुछ बाजूबन्द गीत इस तरह से हैं-

तमाखु की थैली,
ज्वरू ना मुंडारू कुरेदन खैली

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(नायिका कहती है- ना मुझे बुखार है because और न ही सिर दर्द. दिल की पीड़ा से व्यथित हूं.)

रोटी की पापड़ी,
भाई-भौजा नी होन्दी because कैकी मां होन्दी आपड़ी..

(दिल की पीड़ा so को उजागर करती because हुई कहती है-भाई और ‘भाभी किसी के नहीं होते सिर्फ मां ही अपनी होती है जो बेटी के दर्द को जानती और समझती है.)

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थकुल्या कु कांसु,
बाँज बंण रोंली कु फुंछलु आँसु..

(मैं इस विरान वन में but रो रही हूं पर मेरे आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है. अर्थात न भाई और ना ही भाभी.)

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लिखी ति कलम, 
विमातान दिणी बेटी कु जलम.

(ईश्वर ने बेटी because का जन्म दिया है.)

सुनारकु गाँठू,
बेटी कु जलम पराई घर कू बाँटू..

(ईश्वर ने बेटी को जन्म दिया जो सिर्फ पराये घर so का हिस्सा मान लिया जाता  है.)

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सुनारकु गाँठु,
बेटा लाटू होलू कालू खालू आपड़ घर कू बाँटू..

(बेटा लाटा हो या काला वह अपने ही because घर रहता है और अपने भाग्य या पितृ सम्पत्ति को खाकर भी जीवन यापन कर सकता है।

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बाघ कु नाँदणु, because ज्यूं जागु बैठली गैलेणी सी जागा बाँदणी..

जिन-जिन जगहों मेरी so/span> सहेलियाँ बैठती थी उन जगहों को मैं प्रणाम करता हॅं.

थचलकी थाच but सच की गैल्या होलू पच्छांणलू बाच..

(मेरी अपनी सहेलियां होंगी because तो मेरी आवाज ही पहचान जाएंगे.)

लड्डू गुल गूल so मैन सुपिन मा देखी तेरी बुलबुल..

(प्रेमिका अपने प्रेमी को but सम्बोधित कर कहती हैं कि आज मैंने स्वप्न में तेरे बालों को देखा है.)

थाली गोटी हींग,because एक पाँव आगू रखी ज्यू पछिन्डू रिंग..

(मैं अपनी ससुराल नहीं जा पाso रही हूं जैसी ही एक पैर आगे सरकाती हूँ तो मेरा दिल पीछे मुड़ जाता है. )

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गीतों में ससुराल में लड़की का दिल न लगना, प्रेमिका का किसी के प्रति आत्मीयता जैसे भाव भी सुनने को मिलते हैं. इनमें दोनों पक्ष दुवों के माध्यम से अपनी बात कहते हैं.  दुवों में अनमेल विवाहों की पीड़ा, ससुराल वालों की प्रताड़ना, पति का घर से बाहर रहने की  बिरह वेदना, प्रेमी- प्रेमिका द्वारा रूप सौन्दर्य का बखान बाजूबन्द गीतों का मुख्य विषय होता है.

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सुपारी दखीण because हंसणी की दांतुड़ी मंजाई रखण..

(हंसते हुए इन दांतों का because साफ- सुथरा रखना चाहिए.)

पाणी भरी लौंकी because मैकु जागी रया मुई भी तेर गाँव की..
घंडोली कु राऊ चल मैंण because घर दुधी रोंदू बाऊ..
पाणी कु हुमकु चल मैणा because घर पड़ी गु रूमकु..
पंणी भरी
दूध भरी छनी आपु कर ठाट मुंई बिड़ कन्नी.

(अपने पति को सम्बोधित पत्नी कहती है कि अपने आप तो तुम ठाट से रह रहे हो और मेरे पास ये आफतें हैं.)

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पाठुड़ु दूधकू जरू ना because मुन्डारू मुंई मरी खुदाकु.
काटी तु घास सुहा की आद आन्दी जुकिड़ी कु नाश .

(प्रेमी कहता है कि तेरी यादbecause करके मेरे जिगर का नाश हो गया है.)

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काई चुड़ी कांच because सुहा जी की चिट्ठी फिरी फिरी बांच.
दली ती मसुरू जैक् दिल धोख होलू देखलू ईश्‍वर.

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(प्रेमी -प्रेमिका एक दूसरे को प्यार का because भरोसा देते हुए कहते हैं कि जिस किसी के दिल में धोखा उसे ईश्वर ही देख because सकता है और वही इस पर विचार करेगा.)

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साग लाई कोई राम जी because न सीता जपी मुंई जपौनु तोई.

(प्रेमिका कहती है कि जिस because प्रकार राम जी ने सीता को चाहा मैं भी तुम्हें उसी रूप में चाहती हूं.)

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मेरा प्यार इतना
सिन्दुर की डबी जोड़ी because रली जवानी त मिली हौलू कभी.
भैंसी बटी दांऊ ब्याख्नीक् क् बाजु राम जी कु नऊ ले. 
बाजूबन्द गीतों में स्त्री पुरुष केbecause बीच सीधा प्रश्नोत्तर होता हैं.
काटी गाली घास, मिलान्दारू because कु भलू खोन्दारू कू नाश. 
सिया तू सुलार दुई दिन की because ज्वानी जवानी कु उलार.
बान कु हरील रिंगदू रिटन्दु because शरील त्वेमुंग शरील.
मारी तू सेटौलू तेरी याद आंन्दी because कोई मुग मिटौलू.
सदरी बटन अबक जमान हंसणू कठिन.

(लेखक प्राध्यापक एवं साहित्यकार हैं)

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