September 28, 2020
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संस्मरण

राष्ट्र नायक

बुदापैश्त डायरी-11 डॉ. विजया सती बुदापैश्त में रहते हुए हमने जाना कि 15 मार्च हंगरी के इतिहास में एक विशेष दिन है. यह 1948 की क्रान्ति की स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय दिवस है. इस क्रान्ति के प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में पेतोफ़ी शांदोर को याद किया जाता है. हंगरी की क्रान्ति और आज़ादी […]
समसामयिक

सोनू सूद ने साझा तो बियर ग्रिल्स ने सराहया राजेश के बनाए पोस्टर

हिमांतर डेस्‍क ऋषिकेश के प्रसिद्ध चित्रकार राजेश चन्द्र ने कोरोना काल के महानायक सुपरस्टार सोनू सूद का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें समर्पित एक पोस्टर बना के उन्हें ट्वीट किया, जिसे सोनू सूद ने खुद 2 बार पसन्द कर शेयर किया है. पोस्टर ट्विट होते ही वायरल हो चुका है और सोशल मीडिया में लोग […]
किस्से/कहानियां

मन बावरा

लघुकथा डॉ. कुसुम जोशी मन्दी बुआ’ छोटी कद काठी ,गोल मटोल, चपटी सी नाक, पक्का गेंहुआ रंग. और आदतें-“गांव में किसी से लड़ के आयेगीं, तो गाड़ी पकड़ सीधे हमारे घर और  सीढ़ीयों से ही अपने दुश्मनों में गालियों के गोले दागते हुये आयेगीं. मन्दी बुआ  बाबूजी के काका “बंशी काका  की इकलौती पुत्री थी, […]
संस्मरण

एक ऐसा पहाड़ जो हर तीसरे साल लेता है ‌मनुष्यों की बलि!

एम. जोशी हिमानी  हमारे देश के अन्य हिस्सों की तरह उत्तराखंड में भी हर खेत, हर पहाड़ का कोई न कोई नाम होता है. मेरी जन्मभूमि पिथौरागढ़ के ‘नैनी’ गांव के चारों तरफ के पहाड़ों के भी नाम हैं जैसे- कोट, हरचंद, ख्वल, घंडद्यो, भ्यल आदि. नैनी के पीछे सीधे खड़ा दुर्गम, बहुत ही कम […]
स्मृति शेष

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक

विपिन त्रिपाठी की पुण्यतिथि (30 अगस्त) पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी “गांव से नेतृत्व पैदा होने तक मैं गांव में रहना पसंद करूंगा. सत्ता पगला देती है. समाजवादी बौराई सत्ता से दूर रहें.”                                 -विपिन त्रिपाठी 30 अगस्त को उत्तराखंड […]
संस्मरण

‘खोपड़ा’ यही तो नाम मेरे गाँव का है

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—46 प्रकाश उप्रेती आज बात ‘खोपड़ा’ की. ये मेरे ‘गाँव’ का नाम है. गाँव मेरे लिए सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि पूरा जीवन है. गाँव सुनते ही चेहरा खिल उठता है. आँखों के सामने ‘वारे-पारे’ (आमने-सामने) बाखे और हमारी ‘बीचेक कुड़ी’ (बीच वाला घर) तैरने लगती है. गाँव सुनते […]
उत्तराखंड

‘पत्थरों का उपासक, प्रकृति का पुजारी’

डॉ. अरुण कुकसाल ‘सबकी अपनी जीवन कहानी होती है और सबका अपना संघर्ष होता है, सबके अपने सौभाग्य और सफलताएं होती हैं, तो अवरोध और असफलताएं भी. फिर भी हर जीवन अपने जमाने से प्रभावित होता है. अनेक जीवन अपने जमाने को जानने और बनाने में बीत जाते हैं और उनके जीवन को जमाना यों […]
समसामयिक

यूसर्क द्वारा एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार

हिमांतर ब्‍योरो उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) एवं अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के संयुक्त तत्वाधान में “Psychological Well-being among Youth” विषय पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन गया. अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार के मुख्य अतिथि प्रो. एन. के. जोशी, कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने अपने सम्बोधन में वेबिनार के आयोजन
जल विज्ञान

महिलाएं भी करती थी मानसूनी वर्षा की भविष्यवाणियां

भारत की जल संस्कृति-13 डॉ. मोहन चंद तिवारी प्राचीन भारतीय जलवायु विज्ञान का उद्भव तथा विकास भारतवर्ष के कृषितन्त्र को वर्षा की भविष्यवाणी की जानकारी देने के प्रयोजन से हुआ. इसलिए वैदिक काल से लेकर उत्तरवर्ती काल तक भारत में जलवायु विज्ञान की अवधारणा कृषि विज्ञान से जुड़ी रही है. भारत के ऋतुवैज्ञानिकों ने राष्ट्र […]
पुस्तक समीक्षा

गागर में सागर भरती है ज्ञान पंत की कविता

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… रेखा उप्रेती ज्ञान पंत जी की फेसबुक वॉल पर सेंध लगाकर कुछ ‘कणिक’ चख लिए तो ‘टपटपाट-सा’ पड़ गया. जिज्ञासा स्वाभाविक थी, ‘किताब’ कहाँ से मिलेगी!! संकेत समझ कर ज्ञान दा ने झट ‘भिटौली’ वाले स्नेह के साथ अपने दोनों काव्य-संग्रह भिजवा दिए… ‘कणिक’ और ‘बाटुइ’… कुमाउनी में रचित इन […]