Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
संघर्ष, समाधान और वैज्ञानिक दृष्टि : डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

संघर्ष, समाधान और वैज्ञानिक दृष्टि : डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

स्मृति-शेष
 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र सहायक प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय किसी राष्ट्र का विकास केवल उसकी आर्थिक समृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों या सैन्य शक्ति से निर्धारित नहीं होता, बल्कि यह भी महत्त्वपूर्ण है कि वह अपने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार करता है, संघर्षों का समाधान कैसे खोजता है और ज्ञान-विज्ञान को सामाजिक कल्याण से किस सीमा तक जोड़ पाता है। आधुनिक विश्व में संसाधनों की असमान उपलब्धता, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, आर्थिक विषमता, सामाजिक विभाजन और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियाँ विकास की दिशा को प्रभावित करती हैं। ऐसे परिदृश्य में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, प्रख्यात वैज्ञानिक और शिक्षाविद् डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, संसाधन-प्रबंधन, वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक समरसता का  उदाहरण है। डॉ. कलाम का जीवन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि सीमित आर्थिक संसाध...
शारीरिक असमर्थता भी नहीं रोक पाई अभिलाषा जोशी की अभिलाषा

शारीरिक असमर्थता भी नहीं रोक पाई अभिलाषा जोशी की अभिलाषा

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 5विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ा हौसला, उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को दी नई पहचान उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में रची-बसी ऐपण कला केवल एक कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यहां की परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। कुमाऊं के घरों की देहरी, पूजा की चौकियों और मांगलिक अवसरों पर बनाई जाने वाली यह लोककला आज घरों की चौखट से निकलकर देश-विदेश में अपनी पहचान बना रही है। इस पारंपरिक कला को आधुनिक स्वरूप देकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाली कलाकारों में एक नाम है हल्द्वानी की अभिलाषा जोशी का। अभिलाषा की कहानी केवल एक सफल उद्यमी और कलाकार की नहीं, बल्कि अदम्य साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष की भी है। जीवन में आई एक गंभीर दुर्घटना ने उनकी शारीरिक क्षमताओं को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन कला के प्रति उनका समर्पण और कुछ नया करने की अभिलाषा ...
देवभूमि की ‘पधानी’: सेवा, साधना और समर्पण

देवभूमि की ‘पधानी’: सेवा, साधना और समर्पण

अभिनव पहल
 नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 4सेवा ही साधना और प्रकृति ही आराधना- इस जीवनदृष्टि को अपने कर्मों से साकार कर रही हैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद की माहेश्वरी रावत। दाई के रूप में मातृसेवा, ग्रामसभा में नेतृत्व, पारंपरिक घराट का संचालन, सामुदायिक हित में अपना मकान समर्पित करने और देववृक्षों के रोपण तक उनका जीवन लोककल्याण तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रेरणादायक उदाहरण है।कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान किसी बड़े पद, प्रतिष्ठा या उपलब्धि से नहीं, बल्कि उनके निस्वार्थ कर्मों से बनती है। वे अपने जीवन को परिवार तक सीमित रखने के बजाय समाज, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला हैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि विकासखंड स्थित भटवाणी-बड़ेथ गाँव की निवासी माहेश्वरी रावत, जिन्हें स्थानीय स्तर पर स्नेह...
बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

बेटियां जब ठान लें तो झुकता है आसमान: ‘मशरूम गर्ल’ दीपिका कैंतुरा की प्रेरक कहानी

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 3पहाड़ की मिट्टी से जुड़कर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही हैं उत्तरकाशी की दीपिका कैंतुरा। गांव के खाली और अंधेरे कमरों से शुरू हुआ मशरूम उत्पादन आज एक बड़े उद्यम का रूप ले चुका है। अपनी मेहनत, संकल्प और परिवार के सहयोग से दीपिका ने साबित किया है कि पहाड़ की बेटियां केवल सपने देखती ही नहीं, उन्हें साकार करना भी जानती हैं। पढ़ाई में सामान्य, कक्षा में अक्सर डरी-सहमी रहने वाली, लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान लिए एक लड़की ने शायद ही कभी सोचा होगा कि एक दिन उसकी पहचान पूरे क्षेत्र में ‘मशरूम गर्ल’ के रूप में होगी। विद्यालयी जीवन में खेलकूद और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली दीपिका कैंतुरा बचपन से ही अपनी अलग पहचान बनाने का हुनर रखती थीं। पढ़ाई में भले ही वह असाधारण नहीं थीं, लेकिन उनकी सक्रियता, सहज स्वभाव और कुछ नया करने की ललक ने उन्हे...
भगवान तुंगनाथ की लोकपरंपरा की ध्वजवाहक पुष्पा देवी

भगवान तुंगनाथ की लोकपरंपरा की ध्वजवाहक पुष्पा देवी

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  - 2 लोकसंस्कृति की ध्वजवाहक पुष्पा देवी तीन दशकों से लोकगायन, आस्था और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं को सहेज रही हैं लोकगायिका पुष्पा देवीउत्तराखंड की लोकसंस्कृति केवल गीतों और संगीत तक सीमित नहीं है। यह यहां के लोगों के जीवन, आस्था, प्रकृति, परंपराओं और सामूहिक स्मृतियों की जीवंत अभिव्यक्ति है। यहां के लोकगीतों में पहाड़ों की पीड़ा भी सुनाई देती है और देवभूमि की आध्यात्मिक चेतना भी। इन्हीं परंपराओं को अपनी आवाज के माध्यम से जीवंत बनाए रखने वाली लोकगायिका हैं पुष्पा देवी, जो रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ विकासखंड की जगपुड़ा ग्रामसभा की निवासी हैं। पुष्पा देवी और उनके साथी पिछले लगभग तीन दशकों से देवताओं के जागर गायन और प्रस्थान गीतों की परंपरा से जुड़े हुए हैं। उनका गायन केवल सुरों का संयोजन नहीं, बल्कि लोकविश्वास, आध्यात्मिक अनुभूति और हिमालयी जनजीवन का ऐ...
नवदुर्गा विशेष: पहाड़ों से स्वाद की सौगात- आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर पहाड़, आत्मनिर्भर युवा

नवदुर्गा विशेष: पहाड़ों से स्वाद की सौगात- आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर पहाड़, आत्मनिर्भर युवा

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष श्रृंखला  - 1 ऋचा डोभाल बंधानी की कहानी: पहाड़ के पारंपरिक स्वादों को पहचान और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने की पहलपहाड़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य, ऊँचे पर्वतों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि यहाँ की मिट्टी में आत्मनिर्भरता, संघर्ष और संभावनाओं की अनगिनत कहानियाँ भी रची-बसी हैं। इन्हीं संभावनाओं को पहचानकर उन्हें आजीविका का आधार बनाने में जुटी हैं उत्तरकाशी के नौगाँव की बहू ऋचा डोभाल बंधानी। ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर पहाड़, आत्मनिर्भर युवा’ की सोच को साकार करने के उद्देश्य से ऋचा पहाड़ के पारंपरिक उत्पादों को हर घर की रसोई तक पहुँचाने का प्रयास कर रही हैं। उनकी यह पहल केवल स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम भी बन रही है, जो वर्षों से खेती...
उत्तराखंड: पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी!

उत्तराखंड: पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी!

पर्यटन
 डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत  पर्यटन का मॉडल कैसा हो? अगर पर्यटकों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन पार्किंग, ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन, जल व्यवस्था और पहाड़ों की भार वहन क्षमता को ध्यान में नहीं रखा गया, तो आने वाले समय में पर्यटन खुद पहाड़ों के लिए संकट बन सकता है। ऐसे में यदि पहाड़ों को बचाना है, तो पर्यटन को रोकना नहीं, बल्कि नियंत्रित और टिकाऊ बनाना होगा। समय रहते कैरीइंग कैपेसिटी के आधार पर पर्यटकों और वाहनों की संख्या तय करना, पार्किंग व्यवस्था मजबूत करना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को नियंत्रित करना जरूरी होगा। उत्तराखंड में पर्यटन का दबाव इन दिनों कुछ चुनिंदा स्थलों तक सिमटता नजर आ रहा है। बाबा नीब करौरी महाराज के प्रसिद्ध कैंची धाम में जहां देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों क...
कन्या पूजन तभी सार्थक, जब बेटियों को मिले सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर: धामी

कन्या पूजन तभी सार्थक, जब बेटियों को मिले सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर: धामी

देहरादून
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुख्यमंत्री ने 149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन देकर किया सम्मानित, बालिका शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया जोरहिमांतर वेब डेस्कदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब बेटियों को सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। बेटियां केवल परिवार की खुशियों का आधार नहीं, बल्कि समाज की शक्ति और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। मुख्यमंत्री रविवार को देहरादून स्थित आईआरटीडी प्रेक्षागार में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बालिका...
एकलव्य विद्यालय: ₹45.76 करोड़ की परियोजना, फिर भी अधूरा भवन! चार साल में कहां पहुंचा निर्माण?

एकलव्य विद्यालय: ₹45.76 करोड़ की परियोजना, फिर भी अधूरा भवन! चार साल में कहां पहुंचा निर्माण?

देहरादून
  मेहरावना एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल; ₹42 करोड़ खर्च और महज 40 प्रतिशत काम होने का दावा, अभिभावक संघ अध्यक्ष शूरवीर डोभाल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की उच्चस्तरीय जांच की मांगनीरत उत्तराखंडी/हिमांतर वेब डेस्क, चकराता/देहरादूनजनजातीय बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मेहरावना स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की निर्माण परियोजना सवालों के घेरे में है। लगभग ₹45.76 करोड़ की अनुमानित निविदा लागत वाली इस परियोजना का भवन चार साल बाद भी अधूरा होने का आरोप है। निर्माण की धीमी गति, सरकारी धन के उपयोग और कार्य की गुणवत्ता को लेकर अभिभावक संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विद्यालय अभिभावक संघ के अध्यक्ष शूरवीर डोभाल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और ...
नाना पाटेकर : सरहद से सिनेमा तक

नाना पाटेकर : सरहद से सिनेमा तक

कला-रंगमंच
 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र सहायक प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालयभारतीय सिनेमा में कुछ अभिनेता ऐसे होते हैं जिन्हें केवल उनके किरदारों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। उनका व्यक्तित्व उनके निभाए हुए पात्रों से कहीं बड़ा होता है। वे पर्दे पर आते हैं तो लगता है कि कोई किरदार बोल नहीं रहा, बल्कि समाज की कोई दबाई हुई आवाज हमारे सामने खड़ी है। नाना पाटेकर इसी श्रेणी के अभिनेता थे। उनकी आवाज में खुरदुरापन था, संवादों में आक्रोश था, चेहरे पर जीवन के संघर्षों की रेखाएं थीं और उनके व्यक्तित्व में एक ऐसी बेचैनी थी, जो केवल अभिनय की बेचैनी नहीं थी।नाना पाटेकर का जीवन भारतीय सिनेमा, रंगमंच, सेना, सामाजिक सरोकार और किसानों के प्रश्नों से होकर गुजरता है। उनका राष्ट्रवाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता से परिभाषित नहीं होता था। बल्कि उन्होंने स्वयं राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात कही थी। एक पु...