Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

उत्तरकाशी
 नीरजउत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र की लोक गायिका, कवयित्री और मैक्रम डिजाइन प्रशिक्षिका राजुली बत्रा आज क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान है। मटियानी (दुडोनी) में जन्मी और मंजियाली (नौगांव) में ससुराल होने के बावजूद राजुली बत्रा ने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।बचपन से ही संस्कृति के संरक्षण का संकल्प राजुली बत्रा ने वर्ष 2001 में मटियाली छानी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर रामलीला का आयोजन शुरू करवाया। इस राम...
सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी/पुरोला/उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्रों मोरी, सरबडियार, हर्षिल और डुंडा में सदियों पुरानी पारम्परिक कताई-बुनाई की कला आज संकट के दौर से गुजर रही है। भेड़-बकरी पालन से प्राप्त ऊन पर आधारित यह कुटीर उद्योग कभी स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन हुआ करता था, लेकिन बदलते समय, बाजार की कमी और आधुनिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धा के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले लगभग हर गांव में कई घरों में चरखा और करघा चलता था, लेकिन आज गिने-चुने परिवार ही इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।इन क्षेत्रों में विशेषकर महिलाएं घरों में चरखे से ऊन कातकर हाथकरघे पर शॉल, थुलमा, टोपी, मफलर और अन्य ऊनी वस्त्र तैयार करती रही हैं। यह शिल्प स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।भेड़-बकरी पालन से...
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने रविवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “नारी तू नारायणी” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा, समाज सेवा, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, संस्कृति और जल संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्यभर की 38 वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया. सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज उन महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है, जिनके त्याग, संघर्ष, स्नेह और संस्कारों ने परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्नेह, त्याग और आशीर्वाद से पीढ़ियाँ आगे बढ़ती हैं और समाज निरंतर प्रगति करता है. महिलाएँ माँ के रूप मे...
उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी, उत्तराखंड हलचल
  जौनसार-बावर की आस्था चौहान का प्रथम प्रयास में चयन, मुहम्मद उमर हाशमी को AIR 549 रैंक नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीशुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम में उत्तराखंड के युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।जनपद उत्तरकाशी के दो होनहार युवाओं ऋषभ नौटियाल और आशुतोष नौटियाल ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।वहीं जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था चौहान ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में चयन हासिल कर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी मिसाल पेश की है।इसके अलावा AIMIM उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नय्यर काजमी के भतीजे मुहम्मद उमर हाशमी ने भी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 549 प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उत्तरकाशी के दो युवाओं ने बढ़ाया जिले का मान जनपद उत्तरकाशी के ऋषभ नौटियाल,...
फाल्गुनी प्रीत का रंगोत्सव: भील संस्कृति का जीवंत पर्व ‘भगोरिया’

फाल्गुनी प्रीत का रंगोत्सव: भील संस्कृति का जीवंत पर्व ‘भगोरिया’

उत्तराखंड हलचल
  भगोरिया पर्व 2026: भील जनजाति का अनोखा प्रेम उत्सव, जानें इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक महत्वमंजू काला, देहरादून जब हवाएँ गर्मी के तेवर दिखाने लगती हैं, जब उनमें मादक खुशबू तैरने लगती है, गीतों में उन्माद भरने लगता है, पत्थर तोड़ने वाले हाथों की उँगलियों पर मेहँदी की लाली सजने लगती है, ताड़ी और महुआ में रस भरने लगता है, टेसू के फूल खिल उठते हैं और वसंत यौवन की सीमा पर पहुँच जाता है, तो समझ लीजिए कि भगोरिया का आगमन हो रहा है। यह भील समुदाय का अपना विशेष त्योहार है, जिसे हम फाल्गुन मास की प्रीत या भगोरिया के नाम से जानते हैं। यह ऐसा पर्व है जो हर युग की नई चमक को अपनी प्राचीन तहजीब और संस्कृति से जोड़ता है। यह न केवल मनुष्य का उत्सव है, बल्कि प्रकृति भी अपने संकेतों, फूलों, हवाओं और रंगों के साथ इसमें शामिल हो जाती है। भगोरिया उन लोगों का त्योहार है जिनकी हड्डियाँ रोज़ाना कठिन श...
सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

उत्तरकाशी
  पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे सर बडियारनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड पुरोला अंतर्गत सीमांत उच्च हिमालयी क्षेत्र सर बडियार में स्थित सरुताल ट्रेक पर्यटन एवं रोजगार की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। यह ट्रेक न केवल साहसिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत स्रोत भी साबित हो सकता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे 2024 में ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किए जाने के बाद अब इसकी प्रसिद्धि बढ़ रही है और विकास की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। आवश्यकता है इसे पूर्ण रूप से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की, ताकि पर्यटन को नए पंख लगें और दूरस्थ गांवों में आर्थिक उन्नति हो। सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी के सर बडियार क्षेत्र (सरनौल-सोतरी या आसपास के गांवों से शुरू) एक अद्वितीय हिमालयी पदयात्रा है, जो लगभग 40+ किलोमीटर लंबा है और सामान्यतः 5 स...
पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडीहिमालयी क्षेत्रों की समृद्ध पाक परंपरा का अहम हिस्सा रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’ आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं. कभी त्योहारों, मेलों और विशेष अवसरों की शान माने जाने वाले ये व्यंजन अब धीरे-धीरे पहाड़ी रसोई से गायब होते जा रहे हैं.बदलती जीवनशैली का असरविशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता, शहरीकरण और नई पीढ़ी की बदलती खान-पान आदतों ने पारम्परिक व्यंजनों को पीछे धकेल दिया है. पहले जहां घरों में गेहूं या मंडुए के आटे से सिड़ा (भाप में पका व्यंजन) और असका (स्थानीय शैली की रोटी/पकवान) बनाए जाते थे, वहीं अब उनकी जगह बाजारू खाद्य पदार्थों ने ले ली है.मेहनत और समय की मांगग्रामीण महिलाओं के अनुसार, सिड़ा–असका बनाने की प्रक्रिया समय और धैर्य की मांग करती है. आटे को विशेष तरीके से गूंथना, उसे खमीर उठाने देना और पारम्पर...
विश्व के बाल लेखकों का लेखक गाँव में सम्मान

विश्व के बाल लेखकों का लेखक गाँव में सम्मान

उत्तराखंड हलचल
  65 से अधिक देशों के साहित्यकार जुड़े, 30 नवोदित रचनाकार अलंकृतहिमांतर ब्यूरो, देहरादून (थानो)अंतर्राष्ट्रीय लेखक दिवस के अवसर पर लेखक गाँव, थानो (देहरादून) में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया. यह आयोजन अपनी विशिष्टता के कारण देश में पहली बार इस स्वरूप में संपन्न हुआ, जिसमें भारत सहित विश्व के 65 से अधिक देशों के साहित्यकार एक मंच से जुड़े. कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित 26 वरिष्ठ लेखकों तथा विभिन्न देशों से ऑनलाइन जुड़े हिंदी एवं प्रवासी हिंदी साहित्यकारों को ‘लेखक सम्मान’ प्रदान किया गया. साथ ही 30 बाल रचनाकारों- जिनकी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं- को ‘नवोदित लेखक सम्मान’ से अलंकृत कर उनके साहित्यिक अवदान का अभिनंदन किया गया. सम्मानित बाल लेखकों में प्रणवी भारद्वाज (व्हिस्पर्स ऑफ़ हिल्स), लावण्या कुशवाहा (ट्रेवलिंग थ्रू ए सोलो वेंडरर), देवांश गुप्त...
यमुना घाटी के लाल CA अरविंद सिंह रावत बने आईसीएआई देहरादून के सचिव, CA अंकित गुप्ता अध्यक्ष निर्वाचित

यमुना घाटी के लाल CA अरविंद सिंह रावत बने आईसीएआई देहरादून के सचिव, CA अंकित गुप्ता अध्यक्ष निर्वाचित

देहरादून
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनThe Institute of Chartered Accountants of India (आईसीएआई) की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल (सीआईआरसी) की देहरादून शाखा की नई कार्यकारिणी घोषित कर दी गई है। इसमें अंकित गुप्ता को अध्यक्ष तथा अरविंद सिंह रावत को सचिव निर्वाचित किया गया है। इसके अतिरिक्त, जस्मीत सिंह चौधरी को उपाध्यक्ष और प्रणय सेठ को कोषाध्यक्ष चुना गया है। वहीं, साहेब आनंद को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (सीआईसीएएसए) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि परिमल पटेट को कार्यकारिणी समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। नव-निर्वाचित अध्यक्ष अंकित गुप्ता ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नई कार्यकारिणी पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, सतत शिक्षण कार्यक्रमों के संचालन और सदस्यों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, सामूहिक नेतृत्व और ...
ढांटु: महिला के सिर की सर्वोच्च आन-बान-शान

ढांटु: महिला के सिर की सर्वोच्च आन-बान-शान

देहरादून, साहित्‍य-संस्कृति, हिमालयन अरोमा
 फकीरा सिंह चौहान स्नेही वरिष्ठ कवि, गायक कलाकार तथा गीतकार ग्राम गोरछा, जौनसार जौनसारी विवाहित महिलाओं के सिर पर धारण किया जाने वाला ढांटु मात्र एक रंगीन कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि गौरव और गरिमा की पहचान है। जौनसार-बावर, रवांई-जौनपुर, बंगाण, बिनार तथा हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सिर पर ढांटु बांधना केवल एक परिधान या आवरण नहीं, बल्कि मान-सम्मान, स्वाभिमान, मर्यादा और जिम्मेदारी का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। ढांटु धारण करने की परंपरा विरासत, संस्कृति और नारीत्व की गरिमा को दर्शाती है। इसे नारी स्वाभिमान का मुकुट और सिर की शोभा माना जाता है। किसी के सामने सम्मानपूर्वक ढांटु उतारना विश्वास, जिम्मेदारी तथा क्षमा-याचना का अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। जौनसार-बावर क्षेत्र में विवाहित महिलाओं के लिए ढांटु धारण करना सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और गौरव का प्रतीक है...