Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
पहाड़ों में प्रकृति, परम्परा, पवित्रता का पर्व- बसंत पंचमी

पहाड़ों में प्रकृति, परम्परा, पवित्रता का पर्व- बसंत पंचमी

उत्तराखंड हलचल
 डॉ. प्रकाश उप्रेती आज पूरे उत्तराखंड में बसंत पंचमी पर्व के साथ बर्फबारी भी हो रही है। प्रकृति के उत्साह और उल्लास का पर्व बसंत पंचमी है। पर्वतीय समाज में बसंत पंचमी, प्रकृति, परम्परा, ऋतु स्वागत, कृषि और मनुष्य के साहचर्य का पर्व है। आज का दिन पहाड़ों के निवासियों के लिए 'खास' 'शुभ' और 'पवित्र' होता है। पहाड़ों में लोग आज के दिन अपने आस-पास की नदियों में स्नान करने जाते हैं। उनके आज के दिन अपनी आस- पास की नदियों में स्नान का महात्म्य गंगा में स्नान के बराबर माना जाता है। बंसत पंचमी के दिन की पवित्रता और शुभदायी होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 'पैट- अपैट' की गणना के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं करने वाले पहाड़ का समाज आज के दिन बिना दिन-बार-मुहर्त देखे सभी (विवाह, मुंडन संस्कार,जनेऊ संस्कार ) शुभ कार्य करते हैं। बहुत सारे लोग आज के दिन विवाह की मंग-जंगनी भी करते हैं और जि...
विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन

दिल्ली-एनसीआर
 मेहक, नई दिल्लीमहाविद्यालय के विकसित भारत संकल्प क्लब द्वारा बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तीन विशेष कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। संपूर्ण महाविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण, सकारात्मक एवं अनुशासित वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रमों की शुरुआत पतंग सजावट प्रतियोगिता से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतियोगिता के अंतर्गत विद्यार्थियों ने पतंगों को आकर्षक ढंग से सजाया तथा उन पर सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रेरक संदेश और नारे अंकित किए। छात्रों ने अपनी कलात्मक क्षमता एवं विचारशीलता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। ...
भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी

भारत पर्व पर प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” की झांकी

दिल्ली-एनसीआर
हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीरक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न प्रदेशों एवं मंत्रालयों की झांकियों का प्रेस के समक्ष अपने-अपने राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की. इस अवसर पर जानकारी दी गई कि उत्तराखण्ड राज्य की झांकी इस वर्ष “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” थीम के अंतर्गत भारत पर्व में प्रदर्शित होगी. भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखण्ड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे. इस वर्ष उत्तराखण्ड की झांकी की थीम “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” रखी गई है, जो आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पारंपरिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है.सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी श्री के.एस. चौहान ने बताया कि “आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” झां...
दिल्ली के सेन्ट्रल पार्क में साकार हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान

दिल्ली के सेन्ट्रल पार्क में साकार हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान

दिल्ली-एनसीआर
हजारों लोगों की उपस्थिति में अध्यात्म, संस्कृति, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रभावी संदेशहिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीपर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा प्रकृति के सम्मान,पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पर्व के रूप में वर्ष 2005 से निरंतर संचालित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव इस बार सुखी परिवार फाउंडेशन और दिल्ली सरकार के सहयोग से नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुआ. सर्वप्रथम सुप्रसिद्ध जैन संत डॉ.गणी राजेन्द्र विजय जी महाराज के सान्निध्य में आचार्य मोहन भट्ट और आचार्य रमेश भट्ट ने सृष्टि रक्षा समरसता महायज्ञ पूर्ण किया. जन परिसंवाद में विद्वान् विशेषज्ञ वक्ताओं ने तीन शताब्दी व्यक्तित्वों-राजनीति क्षेत्र के अजातशत्रु नेता भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी,पर्यावरण पुरोधा पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा और पृथक उत्तराखंड राज्य के जनक हिमालय गौरव इंद्रमणि...
जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान

उत्तराखंड हलचल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक ही दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंची सरकारहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है. यह अभियान सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तव में जन-केंद्रित बना रहा है.13 जिलों में 408 जनसेवा शिविर 20 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं. केवल आज के दिन ही 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया. इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने सहभागिता की है, जिनमें आज के दिन 7,876 नागरिकों क...
विकास ऐसा न हो कि उत्तराखंडी ही खो जाए: अजीत डोभाल

विकास ऐसा न हो कि उत्तराखंडी ही खो जाए: अजीत डोभाल

दिल्ली-एनसीआर
  ‘रैबार’ ने किया खबरदार!व्योमेश जुगरान, वरिष्ठ पत्रकार देश की कद्दावर शख्सियत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, बीते शनिवार राजधानी के मावलंकर हॉल में आयोजित ‘रैबार’ कार्यक्रम में उत्तराखंडी समाज से मुखातिब थे. उन्होंने गढ़वाली में संबोधन किया और इस बोली पर अपनी शानदार पकड़ से माहौल को चमत्कृत कर दिया. उनके वक्तव्य का केंद्रीय फोकस पर्वतीय लोक-परंपरा और संस्कृति के संरक्षण पर था, लेकिन इसी क्रम में उन्होंने पर्वतीय पहचान पर मंडराते खतरों की ओर भी संकेत किया. उन्होंने पर्वतीय समाज को खबरदार करते हुए कहा कि संभव है कल का उत्तराखंड फाइव-स्टार संस्कृति वाला एक विशाल टूरिस्ट सेंटर बन जाए. बनना भी चाहिए, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि बदले में हम खुद ही खो जाएँ. माटी से गहरे जुड़े अजीत डोभाल यदि उत्तराखंड में पर्यटन के किसी उद्दात रूप को पहाड़ और पहाड़ियत के लिए खतरे की तरह...
माघ मेला: कवि सम्मेलन में गूंजा लोकभाषाओं का स्वर, हास्य-व्यंग्य ने बांधा समां

माघ मेला: कवि सम्मेलन में गूंजा लोकभाषाओं का स्वर, हास्य-व्यंग्य ने बांधा समां

उत्तरकाशी
 आशिता डोभाल, उत्तरकाशीमाघ मेला (बाड़ाहाट कु थौलू) के पांचवें दिन रामलीला मैदान में आयोजित रवांल्टी-गढ़वाली-हिंदी कवि सम्मेलन ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. लोकभाषाओं की मिठास, सामाजिक सरोकारों की धार और हास्य-व्यंग्य की चुटीली प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया. कार्यक्रम का संयोजन प्रभव साहित्य संगीत कला मंच, उत्तरकाशी एवं लेखक-शिक्षक राघवेंद्र उनियाल के तत्वावधान में संपन्न हुआ. सम्मेलन में मंचासीन प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा की ओजस्वी कविता ने युवाओं में जोश भर दिया. उन्होंने आज-कल सस्ती लोकप्रियता के लिए डिग्रियां खरीदने की प्रवृत्ति पर तीखा कटाक्ष कर समाज को आईना दिखाया. अनोज बनाली ने सामाजिक जागरूकता से जुड़ा व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए शराब-नशे पर करारा प्रहार किया. वहीं प्रदीप रावत की हास्य कविता “मोबाइल” ने श्रोताओं को ठहाकों में डुबो ...
भाषा की ओर लौटता रास्ता

भाषा की ओर लौटता रास्ता

उत्तरकाशी, संस्मरण
  रवांई गौरव सम्मान, स्मृति और बँगानी लेखन की पहली शुरुआतजगमोहन बंगाणीएक सुबह, एक फ़ोन और भीतर उतरती खुशी सुबह का समय था। बाहर हल्की-सी ठंड थी और कमरे में अब भी रात की नमी बची हुई थी। खिड़की से आती धुँधली रोशनी बता रही थी कि दिन धीरे-धीरे जाग रहा है। इसी बीच अचानक फ़ोन की घंटी बजी। यह कोई ऐसी तेज़ या बेचैन कर देने वाली आवाज़ नहीं थी, बल्कि ऐसी घंटी थी जो नींद को तोड़ती नहीं, बल्कि भीतर की चुप्पी को छू लेती है। फ़ोन उठाया तो दूसरी ओर से शांत और स्नेह भरी आवाज़ आई- “जगमोहन भाई, बधाई हो। रवांई लोक महोत्सव 2025, नौगाँव की ओर से इस वर्ष का ‘रवांई गौरव सम्मान’ आपके नाम घोषित किया गया है और 28 दिसंबर 2025 को सम्मान ग्रहण करने के लिए आपकी उपस्थिति आवश्यक है।” कुछ पल के लिए शब्द कानों में ही अटक गए। समझ तो आ गया था कि क्या कहा गया है, लेकिन मन उसे पूरी तरह स्वीकार करने में थोड़ा समय...
माल्टा को मिले स्टेट फ्रूट का दर्जा

माल्टा को मिले स्टेट फ्रूट का दर्जा

देहरादून
  सिट्रस फल बदल सकते हैं पहाड़ के आर्थिक तंत्र का चेहराहिमांतर ब्यूरो, देहरादून‘माल्टा का महीना’ अभियान के तहत सिट्रस आर्थिकी पर दून लाइब्रेरी में एक विचार-विमर्श आयोजित किया गया. हरेला गांव, धाद की पहल पर आयोजित इस संवाद में विशेषज्ञों ने माल्टा सहित सिट्रस फलों को पहाड़ की आर्थिकी का मजबूत आधार बताते हुए इसे स्टेट फ्रूट का दर्जा देने की माँग रखी. कार्यक्रम में आगाज फेडरेशन के जगदम्बा मैठानी, कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव अजय डबराल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. तेजपाल बिष्ट ने अपने विचार रखे. स्वागत संबोधन में हरेला उद्यान के संयोजक पवन बिष्ट ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से चल रहा ‘माल्टा का महीना’ अभियान इस वर्ष निर्णायक मोड़ पर पहुंचा है. समाज से लेकर शासन तक इसकी धमक बनी है और आम लोगों ने अभियान के तहत लगभग 12 टन माल्टा की खरीद कर किसानों को सीधा समर्थन दिया...
नई दिल्ली में गूंजा उत्तराखंड का ‘रैबार’, डोभाल-चौहान-रावत-लखेड़ा ने रखा भविष्य का विज़न

नई दिल्ली में गूंजा उत्तराखंड का ‘रैबार’, डोभाल-चौहान-रावत-लखेड़ा ने रखा भविष्य का विज़न

दिल्ली-एनसीआर
  राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शिरकत की हिल मेल द्वारा आयोजित 'रैबार -7 आयोजन मेंसी एम पपनै, नई दिल्लीनई दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच 17 जनवरी की वह शाम कुछ अलग थी। कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर सभागार में उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि स्मृति, संस्कृति और संकल्प के रूप में उपस्थित था। अवसर था प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान हिल मेल द्वारा आयोजित ‘रैबार–7 : ब्रांड उत्तराखंड’ का—एक ऐसा मंच, जहां नीति, परंपरा, सुरक्षा और समाज एक-दूसरे से संवाद कर रहे थे।राष्ट्रीय नेतृत्व, उत्तराखंड की आत्मा के साथ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल थे। विशिष्ट अतिथियों में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, महानिदेशक असम राइफल्स लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, पौड़ी गढ़वाल सांसद अनिल बलून...