Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
युवा शक्ति के संकल्प से साकार होगा नशामुक्त उत्तराखंड : डॉ. धन सिंह रावत

युवा शक्ति के संकल्प से साकार होगा नशामुक्त उत्तराखंड : डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून
  पित्थूवाला पॉलिटेक्निक में छात्र-छात्राओं ने ली नशामुक्ति की शपथ | प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में 100 दिन चलेगा महाभियानहिमांतर वेब डेस्कदेहरादून। विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि युवाओं के दृढ़ संकल्प और जनभागीदारी से नशामुक्त उत्तराखंड का लक्ष्य साकार होगा। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।डॉ. रावत राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पित्थूवाला में 100 दिवसीय नशामुक्ति महाभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाते हुए स्वयं नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बन...
कचरे और सीवर में दम तोड़ती रिस्पना, ‘टेम्स’ बनाने का सपना आठ साल बाद भी अधूरा!

कचरे और सीवर में दम तोड़ती रिस्पना, ‘टेम्स’ बनाने का सपना आठ साल बाद भी अधूरा!

देहरादून
  कभी देहरादून की जीवनरेखा थी रिस्पना, अब कई हिस्सों में नाले जैसी हालत; सीवर, कचरा और अतिक्रमण बड़ी चुनौती, पुनर्जीवन के लिए फिर बनी टास्क फोर्सप्रेम पंचोली, वरिष्ठ पत्रकारदेहरादून। कभी देहरादून की जीवनरेखा कही जाने वाली रिस्पना आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। मसूरी की पहाड़ियों के जलागम क्षेत्र से निकलने वाली इस नदी का साफ पानी शहर में प्रवेश करते-करते कई स्थानों पर सीवर और गंदे नालों के प्रवाह में बदलता दिखाई देता है। नदी में कूड़ा, अनुपचारित गंदा पानी और लगातार बढ़ता मानवीय दबाव इसके प्राकृतिक स्वरूप को खत्म कर रहा है। करीब आठ वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रिस्पना को पुनर्जीवित कर ‘ऋषिपर्णा’ बनाने का महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया था। लंदन की टेम्स नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने जनभागीदारी के जरिए रिस्पना को फिर से जीवित करन...
बड़कोट की यमुना पंपिंग पेयजल योजना 15 साल से अधर में, चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी इंतजार

बड़कोट की यमुना पंपिंग पेयजल योजना 15 साल से अधर में, चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी इंतजार

उत्तरकाशी
  डेढ़ दशक से बड़कोट को इंतजार, कभी सर्वे तो कभी डीपीआर में उलझी योजना; अब फिर नई डीपीआर अंतिम चरण मेंहिमांतर ब्यूरो, बड़कोट (उत्तरकाशी)चार मुख्यमंत्रियों की घोषणा और करीब डेढ़ दशक का इंतजार। इसके बावजूद बड़कोट नगर की बहुप्रतीक्षित यमुना पंपिंग पेयजल योजना सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। कभी सर्वे, कभी डीपीआर तो कभी शासन की मंजूरी के फेर में योजना अटकती रही। अब जल निगम से गढ़वाल जल संस्थान पुरोला को योजना हस्तांतरित होने के बाद एक बार फिर नई डीपीआर तैयार की जा रही है। विभाग का दावा है कि डीपीआर अंतिम चरण में है और जल्द शासन को भेज दी जाएगी। बड़कोट में आबादी बढ़ने के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन मौजूदा पेयजल स्रोत नाकाफी साबित हो रहे हैं। पुरानी पेयजल योजना के साथ नलकूप से भी आपूर्ति की जा रही है, फिर भी गर्मियों में नलों का हलक सूख जाता है। कई क्षेत्रों में ...
जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

जब खेतों से लौटती है गौरा : सातूं-आठूं में अन्न, बेटी और पहाड़ की स्मृति

पिथौरागढ़, लोक पर्व-त्योहार
 प्रकाश चन्द्र पुनेठा सिलपाटा, पिथौरागढ़ भादो की पंचमी से अष्टमी तक चलने वाला कुमाऊं का यह लोकपर्व केवल गौरा-महेश्वर की आराधना नहीं, बल्कि अन्न, कृषि-चक्र, स्त्री-स्मृति और सामुदायिक जीवन का उत्सव भी है। पहाड़ में त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं होते। वे मौसम के साथ आते हैं, खेतों के साथ बदलते हैं और घर-परिवार के रिश्तों में अपना अर्थ खोजते हैं। कुछ पर्व ऐसे भी हैं, जिनमें देवता और मनुष्य के बीच की दूरी बहुत कम रह जाती है। गौरा-महेश्वर का सातूं-आठूं ऐसा ही एक लोकपर्व है। कुमाऊं के सीमांत अंचल, विशेषकर पिथौरागढ़ में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर सप्तमी और अष्टमी तक चलने वाला यह पर्व अपने भीतर पहाड़ के जीवन की कई परतें समेटे हुए है। इसे शिव-पार्वती अर्थात गौरा-महेश्वर से जोड़ा जाता है, लेकिन इसके अनुष्ठानों में जितनी जगह देवताओं की है, उतनी ही खेत की मिट्टी, अन...
किम्मी गांव की बदलेगी तस्वीर, ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना में गोद, 70 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

किम्मी गांव की बदलेगी तस्वीर, ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना में गोद, 70 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

उत्तरकाशी
  बीज से बाजार तक किसानों को मिलेगी मदद, प्रशिक्षण, मृदा परीक्षण, खरीद कैंप और भंडारण की सुविधाओं से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाहिमांतर ब्यूरो, नौगांव /उत्तरकाशी उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में कृषि उत्पादन मंडी समिति नौगांव ने महत्वपूर्ण पहल की है। ‘एक मंडी, एक गांव योजना’ के तहत मंडी समिति ने रवांई घाटी के शून्य प्रतिशत पलायन वाले किम्मी गांव को गोद लिया है। अब मंडी के सहयोग से गांव को आदर्श मंडी गांव के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य गांव में कृषि एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रगतिशील किसानों को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि उनकी सफलता से अन्य किसान...
उत्तरकाशी: रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार मनेगा बटर फेस्टिवल

उत्तरकाशी: रूपनौल सौड़ बुग्याल में पहली बार मनेगा बटर फेस्टिवल

उत्तरकाशी
  कृष्ण जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को होगा आयोजन, चार पट्टियों के ग्रामीणों ने शुरू की तैयारियां; पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाने की उम्मीदनीरज उत्तराखंडी, नौगांव (उत्तरकाशी)उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल बटर फेस्टिवल की तर्ज पर अब बौख टिब्बा डांडा स्थित रूपनौल सौड़ बुग्याल को भी पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की पहल शुरू हो गई है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर को पहली बार रूपनौल सौड़ बुग्याल में बटर फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर दशगी, भंडारस्यु, बड़कोट और पल्ली मुंगरसन्ति पट्टियों के ग्रामीणों में खासा उत्साह है और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वन देवियों की पूजा-अर्चना और स्थानीय लोक परंपराओं के साथ होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ रूपनौल सौड़ की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के पर्यटकों ...
देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल

देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल

चम्‍पावत
  ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु, मुख्यमंत्री धामी ने की कई विकास घोषणाएंहिमांतर ब्यूरो, चम्पावतविश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस अनूठे मेले में आस्था, लोक परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। फलों और फूलों की बरसात के बीच चार खाम-सात थोक के बग्वालियों ने सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मेले में पहुंचकर माँ वाराही के दर्शन किए और बग्वाल का अवलोकन किया।मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे, जहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पारंपरिक छोलिया नृत्य के साथ उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद उन्होंने माँ वाराही देवी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। ...
ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

ऊन कटाई पर्व: देवक्यारा बुग्याल से लौटीं भेड़-बकरियां, ढोल-दमाऊं और तांदी नृत्य से जीवंत हुई लोक संस्कृति

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला/मोरीउत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के दूरस्थ पर्वतीय गांव इन दिनों सदियों पुरानी लोक परंपरा ऊन कटाई पर्व के उल्लास में डूबे हुए हैं। देवक्यारा बुग्याल सहित ऊंचाई वाले चरागाहों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों और मवेशियों को चराने के बाद अगस्त-सितंबर में भेड़पालकों यानी स्थानीय बोली में ‘भेड़ाल’ की गांवों में वापसी शुरू हो गई है। पशुधन के साथ गांव लौटते भेड़ालों के स्वागत को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।तीन माह बाद घर लौटता है पशुधन, शुरू होती है पर्व की रौनकगर्मियों की शुरुआत के साथ मोरी क्षेत्र के कई गांवों से भेड़पालक अपने पशुधन को लेकर ऊंचे बुग्यालों और पारंपरिक चरागाहों की ओर निकल जाते हैं। देवक्यारा कुयाल और आसपास के बुग्यालों में करीब तीन माह तक भेड़-बकरियों एवं अन्य मवेशियों को चराने के बाद अब उनकी वापसी शुरू ह...
हिलजात्रा: मुखौटों में जीवित सोर घाटी की 500 साल पुरानी लोक-स्मृति

हिलजात्रा: मुखौटों में जीवित सोर घाटी की 500 साल पुरानी लोक-स्मृति

पिथौरागढ़, लोक पर्व-त्योहार
 प्रकाश चन्द्र पुनेठा सिलपाटा, पिथौरागढ़ पिथौरागढ़ की सोर घाटी में हिलजात्रा केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि पहाड़ के उस सामूहिक जीवन की स्मृति है, जिसमें खेती, पशु, जंगल, देवता और मनुष्य एक-दूसरे से अलग नहीं थे। कुमौड़ में मनाया जाने वाला यह पर्व लगभग पाँच सौ वर्षों की परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। समय बदला, खेतों की मेड़ें सूनी होने लगीं, गांवों से पलायन बढ़ा और खेती का स्वरूप भी बदलता गया, लेकिन हिलजात्रा आज भी उस लोक-संसार की बची हुई आवाज की तरह हमारे सामने आती है। हिलजात्रा के केंद्र में उसके मुखौटे और पात्र हैं—लखिया भूत, वीरभद्र तथा खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन से जुड़े अनेक रूप। ये मुखौटे केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं। इनके पीछे पहाड़ के लोकजीवन की गहरी स्मृतियां छिपी हैं। जब कलाकार इन्हें धारण करते हैं, तो उनके चेहरे भले ही ओझल हो जाते हैं, लेकिन उन्हीं मुखौटों के भीतर...
हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून
  मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को किया संबोधितहिमांतर ब्यूरो, देहरादून/पिथौरागढ़मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ में आयोजित ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है। घर-घर में मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की भक्ति धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने कामना की कि इसी प्रकार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और ...