Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
बागेश्वर मॉडल: गुलाबी गोभी की खेती से बढ़ रही किसानों की आय, जानें कैसे करें शुरुआत

बागेश्वर मॉडल: गुलाबी गोभी की खेती से बढ़ रही किसानों की आय, जानें कैसे करें शुरुआत

बागेश्‍वर
 नीरज उत्तराखंडीउत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत खेती के साथ अब किसान नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जनपद बागेश्वर में कुछ किसानों द्वारा शुरू की गई गुलाबी गोभी (पिंक कॉलीफ्लावर pink cauliflower) की खेती अब अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। यह नई फसल न केवल बाजार में अलग पहचान बना रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम साबित हो रही है।बागेश्वर मॉडल से मिली नई राह बागेश्वर जिले के किसानों ने पारंपरिक सफेद गोभी के स्थान पर गुलाबी गोभी की खेती शुरू कर बेहतर दाम हासिल किए हैं। आकर्षक रंगत के कारण बाजार में इसकी मांग अधिक है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ होटल और बड़े शहरों में भी इसकी अच्छी खपत हो रही है, जिससे किसानों को सामान्य गोभी की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है।क्यों खास है गुलाबी गोभी गुलाबी गोभी पोषण के लि...
हरकीदून घाटी ट्रेक: देहरादून के छात्रों ने तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण में लिया प्रकृति और रोमांच का अनुभव

हरकीदून घाटी ट्रेक: देहरादून के छात्रों ने तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण में लिया प्रकृति और रोमांच का अनुभव

उत्तराखंड हलचल
 नीरज उत्तराखंडी, देहरादूनदेहरादून के वेलियम वाइस स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सुदूरवर्ती हरकीदून घाटी में आयोजित तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण के दौरान प्रकृति, रोमांच और स्थानीय संस्कृति का अद्भुत अनुभव प्राप्त किया। यह भ्रमण हिमालयन हाइकर्स टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भ्रमण के दौरान छात्रों और अध्यापकों ने घाटी के मनोरम स्थलों के साथ-साथ बनिया, देवसू और बंया टॉप जैसे खूबसूरत बुग्यालों में ट्रेकिंग की। बर्फ से आच्छादित ऊंची पर्वत चोटियां, घने देवदार व भोजपत्र के जंगल, कल-कल बहती नदियां और समृद्ध जैव विविधता ने सभी प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच छात्रों ने न केवल ट्रेकिंग का आनंद लिया, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित की।शनिवार को टीम ने सांकरी और सौड़ गांव का भ्रमण कर स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और रीति-रिवाजों क...
लॉ एंड ऑर्डर पर सीएम धामी सख्त, अधिकारियों को कड़ी चेतावनी

लॉ एंड ऑर्डर पर सीएम धामी सख्त, अधिकारियों को कड़ी चेतावनी

देहरादून
कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ सघन अभियान चलाने के दिए निर्देश. कुठालगेट चौकी इंचार्ज और उप आबकारी निरीक्षक निलंबित देहरादून में हाल ही में हुई कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोबन सिंह, उप आबकारी निरीक्षक (क्षेत्र-3, मसूरी, जनपद देहरादून) और कुठालगेट चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अशोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर में तत्काल व्यापक चेकिंग अभियान चलाया जाए और सभी अवांछित एवं हुड़दंग करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि रोड रेज, फायरिंग और देर रात...
उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान 2025: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. जितेन ठाकुर को ‘साहित्य भूषण’ से किया सम्मानित

उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान 2025: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. जितेन ठाकुर को ‘साहित्य भूषण’ से किया सम्मानित

देहरादून
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025’ में प्रतिभाग किया. इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान’ से डॉ. जितेन ठाकुर को सम्मानित किया. समारोह में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय एवं अताए साबिर अफजल मंगलौरी को ‘उत्तराखंड दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार’ प्रदान किया गया. इसके अतिरिक्त विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों तथा ‘युवा कलमकार प्रतियोगिता’ के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया. ‘साहित्य नारी वंदन सम्मान’ के अंतर्गत प्रो. दिवा भट्ट, उत्कृष्ट बाल साहित्य के लिए प्रो. दिनेश चमोला तथा ‘उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार’ के अ...
विलुप्ति की कगार पर पहाड़ की पारंपरिक आभूषण संस्कृति: ‘बुलाक’ से ‘खगाली’ तक खोती विरासत

विलुप्ति की कगार पर पहाड़ की पारंपरिक आभूषण संस्कृति: ‘बुलाक’ से ‘खगाली’ तक खोती विरासत

उत्तरकाशी, साहित्‍य-संस्कृति
नीरजउत्तराखंडी, पुरोला, उत्तरकाशीहिमालयी क्षेत्रों- विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों की पारंपरिक आभूषण संस्कृति आज धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंचती जा रही है. कभी महिलाओं की पहचान और सामाजिक स्थिति का प्रतीक रहे ये आभूषण अब आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी चमक खोते नजर आ रहे हैं. परंपरा में बसती थी पहचान पहाड़ों में आभूषण केवल सजावट नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. ‘बुलाक’ (नाक का आभूषण), ‘मुर्की’ (कानों का छोटा गहना), ‘लाबी’ और ‘खगाली’ जैसे आभूषण पीढ़ी-दर-पीढ़ी विरासत के रूप में संजोए जाते थे. इन गहनों का संबंध केवल सौंदर्य से ही नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न संस्कारों—जैसे विवाह, त्योहार और पारिवारिक आयोजनों से भी गहराई से जुड़ा रहा है. कई आभूषण वैवाहिक स्थिति और आर्थिक सम्पन्नता के प्रतीक माने जाते थे.‘बुलाक’ से ‘मु...
कुटज (इंद्र जौ) की खेती: कम लागत में लाखों की आय देने वाला आयुर्वेदिक खजाना

कुटज (इंद्र जौ) की खेती: कम लागत में लाखों की आय देने वाला आयुर्वेदिक खजाना

खेती-बाड़ी, देहरादून
 जे. पी. मैठाणी आज हम आपको आयुर्वेद की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण पौधे कुटज के बारे में जानकारी दे रहे हैं ... कुटज को आम बोल चाल की भाषा में इंद्र जौ या कूड़ा भी कहते हैं. देहरादून में रायपुर थानों रोड से सड़क के किनारे इसके पेड़ दिखने शुरू हो जात एहेन और आजकल इन पेड़ों पर गुच्छों में सफ़ेद फूल खिले हुए हैं . भारत में इस पेड़ को कुछ स्थानों पर दूधि भी कहते हैं .कुटज के पौधे भी दो प्रकार के होते हैं एक मीठा कुटज और एक कडुवा कुटज - दोनों के वानस्पतिक नाम अलग अलग है , जैसे - मीठा इंद्र जौ- Wrightia tinctoria  और कडुवा इंद्र जौ- Holorrhena dysentrica. मीठा इंद्र जौ के पौधे बहुत कम पाए जाते हैं यहां तक की देहरादून और इसके आस पास इसके बहुत कम पौधे हैं,जबकि रानीपोखरी से नटराज चौक ऋषिकेश के बीच सात मोड़ और लच्छीवाला  के जंगलों में इंद्र जौ  के काफी सारे पेड़ आपको आसानी से दिख जायेंगे. कुटज भ...
सौरभ बहुगुणा बने उत्तरकाशी के प्रभारी मंत्री, विकास कार्यों को मिलेगी नई दिशा

सौरभ बहुगुणा बने उत्तरकाशी के प्रभारी मंत्री, विकास कार्यों को मिलेगी नई दिशा

उत्तराखंड हलचल
हिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशी  प्रदेश सरकार ने जनपद उत्तरकाशी के लिए नई जिम्मेदारी तय करते हुए सौरभ बहुगुणा को प्रभारी मंत्री नियुक्त किया है। उनके इस मनोनयन से जनपद में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से समृद्ध सौरभ बहुगुणा के नेतृत्व में उत्तरकाशी में आधारभूत सुविधाओं, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की संभावना है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके मार्गदर्शन में जिले की विकास योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से लागू होंगी। जनपदवासियों का मानना है कि प्रभारी मंत्री के रूप में उनकी सक्रियता से चारधाम यात्रा, सड़क संपर्क, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसे अहम क्षेत्रों में ठोस सुधार देखने को मिलेंगे। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी विशेष ध्यान दिए जान...
राम नवमी : आइए श्रीराम को जीवन में स्थापित करें!

राम नवमी : आइए श्रीराम को जीवन में स्थापित करें!

उत्तराखंड हलचल
  राम नवमी पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा   शाश्वत मूल्य बोध के विग्रह स्वरूप श्रीराम भारतीय संस्कृति के एक ऐसे लोक-विश्रुत मानवीय उत्कर्ष हैं जो पढ़े-लिखे और अनपढ़ समाज के हर वर्ग के लिए युगों-युगों से प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं । साहित्य जगत राम-कथा में कल्पना और रस का अजस्र स्रोत ढूंढा है और पिछली पीढ़ियों के कवियों और लेखकों ने अपने सृजन का आधार बनाया । साहित्य की यह परम्परा आज भी अप्रतिहत रूप से चल रही है। इस परंपरा का स्पष्ट संदेश है कि पृथ्वी पर श्रीराम का आविर्भाव और अवतरण मात्र लोक कल्याण के हित हुआ था। उनको अयोध्या के राजा के पुत्र दशरथनंदन के व्याज से मानुष भाव में प्रतिष्ठित करते हुए भारतीय मनीषा मनुष्यता की चुनौतियों, उसके द्वन्द्वों, संघर्षों और उपलब्धियों से परिचित कराते हैं। महर्...
न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

उत्तरकाशी
इला चंद्र जोशी पुरस्कार के तहत ₹50,000 नगद, सम्मान-पत्र, स्मृति-चिन्ह और अंगवस्त्र से होगा सम्मानितहिमांतर ब्यूरो, नौगांव-बड़कोटसीमांत जनपद उत्तरकाशी ग्राम बिरगाड़ी से निकली एक सशक्त आवाज़ आज पूरे उत्तराखंड में गूंज रही है। अनोज सिंह ‘बनाली’, जो वर्तमान में उत्तराखंड के न्याय विभाग में कार्यरत हैं, को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (इला चंद्र जोशी पुरस्कार) के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों की भी बड़ी पहचान है।कविताओं में जीवंत होता गांव और समाज अनोज सिंह ‘बनाली’ की कविताएं केवल साहित्यिक रचनाएं नहीं, बल्कि गांव और समाज का जीवंत दस्तावेज़ हैं। उनके शब्दों में सास-बहू के रिश्तों की जटिलता, बेटी-बेटे की भावनाएं, माता-पिता की उम्मीदें, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सरकारी सेवकों की जिम्मेदारियां- सभी ...
विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

उत्तरकाशी
  ग्रामीण जीवन की पहचान रही हस्तचालित चक्की और पनचक्की पर संकटनीरज उत्तराखंडीपहाड़ के गांवों में कभी हर घर की धड़कन रही हस्तचालित चक्की (जांदरा/जांजो) और जलधारा से संचालित पनचक्की (घराट) आज विलुप्ति की कगार पर हैं। आधुनिक तकनीक, बदलती जीवनशैली और तेजी से हो रहे पलायन के बीच ये पारंपरिक साधन अब बुजुर्गों की यादों और पुराने घरों के कोनों तक सीमित होकर रह गए हैं।संस्कृति और सामूहिक जीवन का केंद्रग्रामीण क्षेत्रों में जांदरा केवल अनाज पीसने का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। महिलाएं सुबह-शाम जांदरे पर काम करते हुए लोकगीत गाती थीं, जिससे न केवल श्रम सहज होता था बल्कि आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता था।वहीं घराट, पहाड़ों की नदियों और गाड़-गदेरों के पानी से चलने वाली पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण था। बिना बिजली के आटा पीसन...