Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
आंदोलन, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और इतिहास: स्वतंत्रता के बाद भारत

आंदोलन, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और इतिहास: स्वतंत्रता के बाद भारत

समसामयिक
 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र राजनीति एवं मीडिया विशेषज्ञ भारत की स्वतंत्रता केवल सत्ता के हस्तांतरण की घटना नहीं थी; यह एक ऐसे राष्ट्र के पुनर्निर्माण की शुरुआत थी, जिसने सदियों की राजनीतिक अस्थिरता, औपनिवेशिक शासन, विभाजन और सामाजिक चुनौतियों के बाद स्वयं को लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। 1947 के बाद भारत का इतिहास केवल सरकारों और राजनीतिक दलों का इतिहास नहीं है। यह आंदोलनों, जनभावनाओं, असहमतियों, संघर्षों, बलिदानों और उन निर्णयों का इतिहास भी है, जिन्होंने देश की दिशा को बार-बार प्रभावित किया। यदि हम स्वतंत्र भारत के इतिहास को ध्यान से देखें, तो पाएँगे कि अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन आंदोलनों और जनदबाव के परिणामस्वरूप हुए। कभी आंदोलन ने सरकार को अपनी नीति बदलने के लिए विवश किया, कभी उसने लोकतंत्र को मजबूत किया और कभी किसी आंदोलन ने देश की एकता तथा संवैधानिक व्यवस्था ...
पारंपरिक कृषि एवं पहाड़ी अनाजों के संरक्षण की मिसाल बनीं ‘रेड राइस लेडी’ स्वतंत्री बंधानी, मिला तीलू रौतेली सम्मान-2026

पारंपरिक कृषि एवं पहाड़ी अनाजों के संरक्षण की मिसाल बनीं ‘रेड राइस लेडी’ स्वतंत्री बंधानी, मिला तीलू रौतेली सम्मान-2026

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, नौगांव (उत्तरकाशी)उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि, स्थानीय अनाजों के संरक्षण एवं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पिछले करीब दो दशकों से निरंतर कार्य कर रहीं स्वतंत्री बंधानी को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए तीलू रौतेली सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया है। लाल चावल के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के चलते उन्हें ‘रेड राइस लेडी’ के नाम से पहचान मिली है।स्वतंत्री बंधानी का कार्य केवल लाल चावल के संरक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक एवं पोषक फसलों कोणी, चीना सहित विभिन्न मिलेट्स और स्थानीय अनाजों के संरक्षण, संवर्धन और इनके महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लंबे समय से कार्य किया है। बदलते कृषि परिवेश में पारंपरिक फसलों की घटती खेती के बीच इन फसलों को बचाने और किसानों को इनके उत्पादन के लिए प्रोत्...
नई पीढ़ी लिखेगी नए उत्तराखंड की कहानी…

नई पीढ़ी लिखेगी नए उत्तराखंड की कहानी…

देहरादून
  ‘कैसा हो अपना उत्तराखंड?’ - मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर तीन लाख से अधिक विद्यार्थीरखेंगे अगले पांच वर्षों का विजन; 150 श्रेष्ठ विचारों पर मुख्यमंत्री खुद करेंगे आमने-सामने मंथनहिमांतर वेब डेस्क, देहरादूनकल्पना कीजिए—उत्तराखंड के किसी दूरस्थ पहाड़ी गांव के स्कूल में पढ़ने वाला कक्षा 11 का एक विद्यार्थी अपने राज्य के भविष्य को लेकर एक विचार लिखता है। शायद वह अपने गांव तक बेहतर सड़क पहुंचाने की बात करे। शायद उसके पास पहाड़ों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने का कोई नया मॉडल हो। हो सकता है वह पर्यटन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने का सुझाव दे या तकनीक के जरिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाने का रास्ता सुझाए। उसका यही विचार कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री के सामने चर्चा का विषय बन सकता है। उत्तराखंड में 10 अगस्त से शुरू होने जा रहा ‘मुख्...
कॉर्बेट नेशनल पार्क के 90 साल: भारत के पहले नेशनल पार्क की अनसुनी कहानी और गौरवशाली इतिहास

कॉर्बेट नेशनल पार्क के 90 साल: भारत के पहले नेशनल पार्क की अनसुनी कहानी और गौरवशाली इतिहास

देहरादून
 नरेन्द्र सिंह पूर्व वनाधिकारी हैली नेशनल पार्क भारत का ही पहला नेशनल पार्क नहीं है, बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप का भी पहला नेशनल पार्क है, जिसकी स्थापना 8 अगस्त 1936 को हुई थी। अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क और अफ्रीका के क्रूगर नेशनल पार्क के बाद यह दुनिया का तीसरा नेशनल पार्क था। जब लोग नेशनल पार्क का कॉन्सेप्ट और उद्देश्य भी नहीं समझते थे, तब भारत में हैली नेशनल पार्क की स्थापना की गई थी। यूनाइटेड प्रोविंस जो वर्तमान उत्तरप्रदेश है, के तत्कालीन गवर्नर मालकॉम हेली के नाम पर इसका नामकरण किया गया था, क्योंकि उन्होंने इसकी स्थापना में विशिष्ट रुचि दिखाई थी। दरअसल यह पार्क और भी पहले अस्तित्व में आ गया होता, अगर उस समय पर्सी विंढम कुमाऊँ के कमिश्नर न होते! वे 1911 में मिर्जापुर से यहाँ आये थे, जहाँ वे कलेक्टर हुआ करते थे। उनके नाम से वहाँ विंढमगंज, और विंढम फॉल भी हैं। वे अविवाह...
प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन

प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन

देहरादून
 भारत के प्रख्यात आयुर्वेद चिकित्सक और भारत के राष्ट्रपति के पूर्व मानद चिकित्सक रहे पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का आज, 7 अगस्त 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से आयुर्वेद एवं चिकित्सा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान और शोध-आधारित चिकित्सा पद्धतियों के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1999 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया था।वैद्य बालेंदु प्रकाश उत्तराखंड के देहरादून स्थित प्रसिद्ध आयुर्वेदिक सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल ‘पड़ाव’ (Padaav) के संस्थापक थे। उन्होंने विशेष रूप से कैंसर, एप्लास्टिक एनीमिया और माइग्रेन जैसी जटिल बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार पर गहन शोध किया और अपने कार्यों के माध्यम से देश-विदेश में आयुर्वेद को प्रतिष्ठा दिलाई।उनका निधन भारतीय आयुर्वेद और चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उ...
डाटमीर बना नशामुक्ति की मिसाल, ग्रामसभा ने शराब-चरस समेत सभी नशीले पदार्थों पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

डाटमीर बना नशामुक्ति की मिसाल, ग्रामसभा ने शराब-चरस समेत सभी नशीले पदार्थों पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, पुरोलाविकासखंड मोरी के सुदूरवर्ती ग्राम डाटमीर ने नशामुक्त समाज की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए ग्रामसभा की आम बैठक में गांव को पूर्णतः नशामुक्त घोषित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। ग्रामसभा ने शराब, अफीम, स्मैक, चरस, गांजा, नशीली गोलियों सहित सभी प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन, खरीद-बिक्री एवं सार्वजनिक रूप से नशे से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सोमेश्वर महादेव चौक पर आयोजित ग्रामसभा की बैठक में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने एकमत होकर संकल्प लिया कि गांव में किसी भी प्रकार के नशे को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर ताश खेलने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। ग्रामसभा ने यह भी तय किया कि नशे की हालत में सार्वजनिक स्थानों पर अशांति फैलाना, झगड़ा करना अथवा अभद्र व्यवहार करना पूरी तरह वर्जित होगा। ...
उत्तराखंड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दी बधाई

उत्तराखंड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दी बधाई

देहरादून
राज्य ने उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के तहत हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धिहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखण्ड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राज्य सरकार को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को प्रदेश की सामूहिक प्रतिबद्धता, दूरदर्शी नेतृत्व तथा शिक्षा के प्रति जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे अपने बधाई संदेश में कहा कि दुर्गम एवं विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड ने उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) के अंतर्गत निर्धारित समय से पूर्व ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ का दर्जा प्राप्त कर पूरे देश के लिए प्रेरणादायी मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार के प्रभावी नेतृत्व, शिक्षा विभाग के अधिकारिय...
देश के पहले लेखक गांव में आयुर्वेद विशेषज्ञों का राष्ट्रीय मंथन, शोध और नवाचार पर जोर

देश के पहले लेखक गांव में आयुर्वेद विशेषज्ञों का राष्ट्रीय मंथन, शोध और नवाचार पर जोर

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनदेहरादून। हिमालयीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, डोईवाला की ओर से शनिवार को देश के पहले लेखक गांव, थानों में एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'हिम आयु स्पर्श–2026' का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय "आयुर्वेद शल्य-शालाक्य तंत्र में नवाचार" रहा, जिसमें देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' तथा पद्मश्री सम्मानित उत्तर प्रदेश आयुर्वेद विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. के. के. ठकराल ने दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान धन्वंतरि के पूजन के साथ किया।संस्था के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार भारद्वाज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. पी. जे. देशपांडे का जीवन और योगदान नई पीढ़ी के विद्यार्थियो...
खास खबर : उत्तराखण्ड गौरव सम्मान हेतु आवेदन आमंत्रित, 30 अगस्त तक करें आवेदन

खास खबर : उत्तराखण्ड गौरव सम्मान हेतु आवेदन आमंत्रित, 30 अगस्त तक करें आवेदन

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशीउत्तराखण्ड शासन ने वर्ष 2026 के लिए प्रतिष्ठित "उत्तराखण्ड गौरव सम्मान पुरस्कार" हेतु पात्र व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह सम्मान उन महानुभावों को प्रदान किया जाएगा, जिनके उत्कृष्ट कार्यों से उत्तराखण्ड का नाम राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ हो, राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ी हो अथवा जिन्होंने राज्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। जिला प्रशासन के अनुसार शासन के निर्देशानुसार इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रारूप पर आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र में अंकित तथ्यों का जिलाधिकारी से सत्यापन कराने के बाद इसे सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, उत्तराखण्ड शासन, सचिवालय परिसर, सुभाष रोड, देहरादून-248001 के पते पर भेजना होगा।आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। जिला प्रशासन ने जनपद के पात्र व्यक्तियों, संस्...
फिर महकेगी दून बासमती की खुशबू: 160 किसानों ने संभाली विरासत बचाने की जिम्मेदारी

फिर महकेगी दून बासमती की खुशबू: 160 किसानों ने संभाली विरासत बचाने की जिम्मेदारी

खेती-बाड़ी
  मुख्यमंत्री के संकल्प, जिला प्रशासन की पहल और किसानों की मेहनत से देहरादून की पहचान रही दून बासमती के पुनर्जीवन की नई कहानीनीरज उत्तराखंडी, देहरादूनकभी अपनी प्राकृतिक सुगंध और बेमिसाल स्वाद के कारण देश-विदेश में पहचान बनाने वाली दून बासमती एक समय विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई थी। बदलती खेती, अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों की बढ़ती मांग और घटते रकबे ने इस पारंपरिक धान को लगभग भुला दिया था। लेकिन अब उत्तराखंड की इसी ऐतिहासिक कृषि विरासत को फिर से जीवित करने की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संकल्प, जिला प्रशासन की योजनाबद्ध पहल और किसानों की बढ़ती भागीदारी ने दून बासमती की वापसी की नई उम्मीद जगाई है। वर्ष 2025 में हुए सफल ट्रायल के बाद इस बार इसकी खेती का दायरा बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है और 160 किसान इसकी खेती से जुड़ चुके हैं। यह पहल अब केवल एक क...