Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
दशहरा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी, प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

दशहरा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी, प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

देहरादून
 हिमांतर, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए सत्य, धर्म, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, संयम, कर्तव्यपालन और आदर्श आचरण की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी सत्य की विजय और अधर्म के अंत का प्रतीक है। रावण के पास अपार संपत्ति, सामर्थ्य और विशाल सेना होने के बावजूद अहंकार तथा मर्यादा का उल्लंघन उसके पतन का कारण बना। वहीं भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए राजसुख त्यागकर चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत...
विजयादशमी 2026: धर्म की रक्षा, श्रीराम की विजय और रामराज्य का शाश्वत संदेश

विजयादशमी 2026: धर्म की रक्षा, श्रीराम की विजय और रामराज्य का शाश्वत संदेश

लोक पर्व-त्योहार
विजयादशमी (20 अक्टूबर, 2026)  पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा       कठिन और लंबे वनवास के बाद श्रीराम द्वारा रावण के साथ लंका में युद्ध के बाद विजय प्राप्त करने की स्मृति को सजीव करता विजयादशमी का पर्व भारत के जन-जीवन में विशेष महत्व रखता है। यह याद दिलाता है कि आसुरी वृत्तियाँ जीवन-द्रोही होती हैं और उनका प्रतिकार करने के लिए तत्पर रहना आवश्यक है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में जीवन मूल्यों को स्थापित करने की सतत कामना और उसके लिए संघर्ष की अनिवार्यता को भी व्यंजित करता है। श्रीराम की मंगलदायी छवि पौरुष और चरित्र के उत्कर्ष के रूप में लोक मन में अंकित है। पर उत्कर्ष से वह दूर नहीं, बल्कि पास आ जाते हैं। उनकी विशिष्टता यही है कि उनका जैसा आत्मीय कोई और नहीं मिलता। लोक से श्रीराम का तादात्म्य इतना गहरा...
पीढ़ियों पुराने पारंपरिक स्वाद को लोगों तक पहुंचा रही हैं दीपिका डोभाल

पीढ़ियों पुराने पारंपरिक स्वाद को लोगों तक पहुंचा रही हैं दीपिका डोभाल

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला – 9पहाड़ और पहाड़ी महिला सदियों से एक दूसरे के पूरक रहे हैं और पहाड़  जैसे कठोर ने अपनी अस्मिता और गौरव के लिए स्त्रियों की कठिन से कठिन परीक्षा भी ली है और उसमें हमेशा पहाड़ जैसी अडिग रहने वाली स्त्रियों ने पहाड़ को कभी झुकने नहीं दिया एक कहावत है ‘पहाड़ की रीढ़ पहाड़ी महिला’ क्योंकि पुरुषों को तो रोजगार के लिए बाहर जाना ही हैं।घर के काम काज,पशुपालन,खेती किसानी में 75 प्रतिशत महिला का श्रम होता है जिसे कभी उस स्तर पर सराहा नहीं गया राज्य निर्माण के समय आंदोलन में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पहाड़ को गौरवान्वित करवा रही है उसने साबित कर दिया है कि महिलाएं सिर्फ चूल्हे चौके के लिए नहीं बनी है उसने करछी से कलम,कलम से लेकर जहाज उड़ाने का सफर,संभव हुआ और परिस्थितियों ने मजबूर किया तो तलवारे भी उठाई और बुलंदियों को छूना हुआ तो सागरमा...
पुरटाड़ में 8 परिवारों ने खाली किए मकान, अनुसूचित जनजाति की जमीन से छोड़ा कब्जा; जमीन हुई कब्जामुक्त!

पुरटाड़ में 8 परिवारों ने खाली किए मकान, अनुसूचित जनजाति की जमीन से छोड़ा कब्जा; जमीन हुई कब्जामुक्त!

देहरादून
  रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की पांच साल की मुहिम के बीच बड़ा घटनाक्रम, किसान अजमेर सिंह चौहान बोले— राकेश उत्तराखंडी की मुहिम हमारे लिए वरदान साबित हुई राकेश उत्तराखंडी ने उठाई मांग-  जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन मूल निवासी किसानों को नियमानुसार मिले जमीनहिमांतर ब्यूरो, पुरटाड़/ विकासनगर जौनसार-बावर क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की भूमि से जुड़े मामले में आज पुरटाड़ गांव में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। यहां आठ परिवारों ने मकान खाली कर संबंधित जमीन से कब्जा छोड़ दिया। इस घटनाक्रम के बाद भूमि अधिकारों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों में उम्मीद जगी है। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी आज मौके पर पहुंचे। उनके साथ किसान अजमेर सिंह चौहान, सियाराम सहित अन्य क्षेत्रवासी भी मौजूद रहे।जौनसार-बावर की भूमि से जुड़े इस प्रकर...
शशि कुड़ियाल चंद्रभा: सौम्यता, शक्ति और लेखनी का संगम

शशि कुड़ियाल चंद्रभा: सौम्यता, शक्ति और लेखनी का संगम

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 8"प्रतिभा कभी मंच की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रतिभा होने पर मंच स्वतः ही आपकी तलाश करते हैं और आपके सहयोगी बन जाते हैं।" प्रतिभा कई बार हमें आनुवंशिक रूप से मिलती है तो कुछ लोग अपने हुनर को निखारने के लिए अपने व्यक्तित्व पर निरंतर काम करते हैं। ऐसे लोग समाज में आम जनमानस के बीच एक विशेष पहचान बनाते हैं और अपनी प्रतिभा से एक सकारात्मक संदेश देते हैं। जब प्रतिभा दादा-दादी, नाना-नानी और माता-पिता से विरासत में मिलती है, तो वह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है कि ‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं’। इसे लिखते हुए महाभारत का वह प्रसंग अवश्य याद आ जाता है, जब वीर योद्धा अभिमन्यु ने अपनी मां के गर्भ में ही चक्रव्यूह तोड़ने की बात सुन ली थी। यानी प्रतिभा मां के गर्भ से ही संचित होने वाली एक अद्भुत प्रक्रिया है। इसी कड़ी में ‘गर्भधान संस्कार’ का स्मरण भी ...
बाल पत्रकार से सीनियर पत्रकार बनने का सफर: “बेटियों को जिम्मेदारी नहीं, जिम्मेदार बनना आज की आवश्यकता है” रेनू सकलानी

बाल पत्रकार से सीनियर पत्रकार बनने का सफर: “बेटियों को जिम्मेदारी नहीं, जिम्मेदार बनना आज की आवश्यकता है” रेनू सकलानी

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 7भारतवर्ष में मातृशक्ति प्राचीन काल से ही सदैव पूजनीय और वंदनीय रही है l जीवन का हर प्रसंग नारीत्व की दिशा के बिना अधूरा है। अपाला, गार्गी, सावित्रीबाई फुले, महारानी लक्ष्मीबाई, दुर्गावती, तीलू रौतेली, महारानी कर्णावती और महारानी गुलेरिया जैसी अनेक वीर नारियों ने भारत मां का मान बढ़ाया है।  इन्हीं की भांति हमारे पहाड़ की महिलाओं ने भी अपने अदम्य साहस, शौर्य और अद्भुत कृतियों से देवभूमि का वैभव और श्रृंगार किया है। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने देवभूमि को वीरांगनाओं और देवियों की भूमि में तब्दील किया है। बात जब पहाड़ों की होती है तो संघर्ष और अभाव के कुछ पथ स्वतः ही जुड़ जाते हैं। पहाड़ के पहाड़ जैसे विराट और संकीर्ण गांवों के पथों से उभरकर सफलता की एक अलग कहानी लिख जाना ही हमारी इन महिलाओं एवं बेटियों की वीरता का एक पृथक परिचय कराता है। बरसों ...
जोहार घाटी में शिक्षा की अलख जगाने वाले विपिन चंद्र जोशी को क्यों भुला दिया गया?

जोहार घाटी में शिक्षा की अलख जगाने वाले विपिन चंद्र जोशी को क्यों भुला दिया गया?

पिथौरागढ़
 मनोहर सिंह रावतहमारे समाज में अनेक ऐसी शख्सियतें हुई हैं, जिन्होंने नाम और धन की अपेक्षा किए बिना समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। लेकिन समय के साथ उनके योगदान को भुला दिया जाना उन लोगों को पीड़ा देता है, जिन्होंने उनके कार्यों को करीब से देखा और महसूस किया है। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसे सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी में ऐसी ही एक शख्सियत थे शिक्षाविद् विपिन चंद्र जोशी। उन्होंने उस दौर में दुर्गम जोहार घाटी में शिक्षा की अलख जगाई, जब विद्यालय तक पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। उनका मानना था कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, अनुशासित और संस्कारवान भी बनाना चाहिए। जोशी जी की दूरदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पहाड़ों में कंप्यूटर शिक्षा की आवश्यकता भी महसूस की और मुनस्यारी में कंप्य...
महिला अधिकारों की बुलंद आवाज़ : दीपा कौशलम

महिला अधिकारों की बुलंद आवाज़ : दीपा कौशलम

अभिनव पहल
  नवदुर्गा विशेष | श्रृंखला  – 6दो दशकों से सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पित दीपा कौशलम न केवल घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव से जूझ रही महिलाओं की आवाज़ बन रही हैं, बल्कि उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही हैं।समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए अनेक कानून बने, जागरूकता अभियान चले और महिला सशक्तीकरण के बड़े-बड़े दावे किए गए। इसके बावजूद लैंगिक भेदभाव, घरेलू हिंसा और रूढ़िवादी सामाजिक सोच आज भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। आए दिन समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ अन्याय और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं। अधिकांश लोग इन घटनाओं के मूकदर्शक बने रहते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पीड़ित महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं। ऐसी ही ...
फर्जी फोन कॉल पर लगेगी लगाम! मोदी सरकार का बड़ा फैसला, Caller ID के नए नियम जारी; 1 नवंबर से होंगे लागू

फर्जी फोन कॉल पर लगेगी लगाम! मोदी सरकार का बड़ा फैसला, Caller ID के नए नियम जारी; 1 नवंबर से होंगे लागू

देश—विदेश
 1 नवंबर से लागू होगी कॉलर पहचान की नई परिभाषा, टेलीफोन नंबर के साथ उपभोक्ता का नाम भी होगा शामिलहिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीअनजान नंबरों से आने वाली फोन कॉल और उनसे जुड़ी धोखाधड़ी की बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) की परिभाषा में बदलाव करते हुए दूरसंचार कंपनियों के रिकॉर्ड में दर्ज उपभोक्ता के नाम को भी इसमें शामिल किया है। यह संशोधन 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। दूरसंचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह आदेश यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट में संशोधन से संबंधित है और सभी यूनिफाइड लाइसेंसधारकों को संबोधित किया गया है।अब कॉलर की पहचान में नाम भी शामिल अब तक कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेश...
बर्नीगाड़ को 215 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात, महाविद्यालय और मिनी स्टेडियम की घोषणा

बर्नीगाड़ को 215 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात, महाविद्यालय और मिनी स्टेडियम की घोषणा

उत्तरकाशी
  मुख्यमंत्री धामी ने सेवा सेतु अभियान में किया प्रतिभाग, कहा- योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकतानीरज उत्तराखंडी, बर्नीगाड़/उत्तरकाशीमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राजकीय इंटर कॉलेज बर्नीगाड़ (कुंवा) में आयोजित सेवा सेतु अभियान के तहत जिलास्तरीय शिविर में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने करीब 215 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। साथ ही राजकीय महाविद्यालय बर्नीगाड़ का शुभारंभ कर क्षेत्र को उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण सौगात दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना और शासनादेश जारी करना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। सेवा सेतु अभियान इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।महाविद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण जल्द मु...