Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
भालुओं का बढ़ता आतंक: सेब बागानों में तबाही, वनकर्मी पर हमला

भालुओं का बढ़ता आतंक: सेब बागानों में तबाही, वनकर्मी पर हमला

उत्तराखंड हलचल
  मसरी-भीतरी-सदना में सेब के पेड़ों को नुकसान, नटीण गांव में वनकर्मी गंभीर घायल बागवानों ने पार्क प्रशासन से मुआवजे और स्थायी घेरबाड़ की मांग कीनीरज उत्तराखंडी, मोरी  (उत्तरकाशी)उत्तरकाशी जिले के मोरी और भटवाड़ी क्षेत्रों में भालुओं की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। गोविंद पशु विहार एवं राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र की रूपिन रेंज में भालू सेब के बागानों में घुसकर पेड़ों और तैयार फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, भटवाड़ी विकासखंड के नटीण गांव में भालू के हमले में वन विभाग का एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों और बागवानों ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने के साथ ही फसल नुकसान का आकलन कर समयबद्ध मुआवजा देने क...
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग में उत्तरकाशी के चार बाल वैज्ञानिकों का राज्य स्तर के लिए चयन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग में उत्तरकाशी के चार बाल वैज्ञानिकों का राज्य स्तर के लिए चयन

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशीके विज्ञान भवन में जनपद स्तरीय द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग-2026 का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जनपद के भटवाड़ी, डुंडा, चिन्यालीसौड़, नौगांव एवं पुरोला विकासखंडों के बाल वैज्ञानिकों ने अपनी वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता और नवाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम ‘सतत भविष्य के लिए परिवर्तनकारी विचार एवं दृष्टिकोण’ रही। जिला स्तरीय प्रतियोगिता में विभिन्न विकासखंडों से चयनित 36 बाल वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर आधारित लिखित परीक्षा के साथ ही क्विज के बहुविकल्पीय, विजुअल, वीडियो, रैपिड फायर एवं बजर राउंड आयोजित किए गए। प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में छवि नौटियाल, राजकीय इंटर कॉलेज डुंडा ने प्रथम, इशांत कोठारी, सरस्वती विद्या मंदिर चिन्यालीसौड़ ने द्वितीय तथा आ...
माँ नंदा देवी राजजात: उत्तराखंड की बेटी की कैलाश यात्रा और सदियों पुरानी परंपरा

माँ नंदा देवी राजजात: उत्तराखंड की बेटी की कैलाश यात्रा और सदियों पुरानी परंपरा

लोक पर्व-त्योहार
 डॉ. प्रवेश कुमार जा मेरी लाड़ली नंदा ते ऊँचा कैलाश। ना-ना बाबा, मैं नी जानदू ते ऊँचा कैलाश।। इस गीत की पंक्तियों के साथ माँ नंदा देवी की यात्रा शुरू हो जाती है। हमारी भारत भूमि अपनी विविधता और उसमें विद्यमान एकता के लिए विश्व में पहचानी जाती है। इस विविधता को हम एक उत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी प्रकार हमारे पहाड़ों में हर चोटी पर एक देवता और उसे पूजने वाले भक्त हमें मिल जाते हैं। इस लेख में मैंने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में रची-बसी माँ नंदा देवी लोकजात और राजजात पर चर्चा की है। अभी पिछले दिनों यह यात्रा (लोकजात) प्रत्येक वर्ष की भाँति प्रारंभ हुई, हालाँकि लोकजात तो प्रत्येक वर्ष होती है। लेकिन पहले तो यह सुनने में आया कि इस बार लोकजात के साथ राजजात भी होगी। फिलहाल इस पर स्थानीय लोगों में कुछ संशय बना, लेकिन फिर भी चौसिंघा खाड़ू के साथ 5 सितंबर को यह यात्रा प्रारंभ हो गई।...
यमुना की लहरों पर 2100 दीपों की रोशनी: हरिपुर-कालसी में आस्था से विकास तक नई शुरुआत

यमुना की लहरों पर 2100 दीपों की रोशनी: हरिपुर-कालसी में आस्था से विकास तक नई शुरुआत

देहरादून
  माँ यमुना की प्रतिमा, हरिघाट और यमुना-कृष्ण मंदिर से मजबूत होगी कालसी की आध्यात्मिक पहचान; हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की स्वीकृति ने जौनसार-बावर में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को दिया नया आधारहिमांतर वेब डेस्क, देहरादूनसांझ उतर रही थी। पहाड़ों के बीच बहती माँ यमुना की धारा पर आखिरी धूप ठहरने लगी थी। घाट पर साधु-संतों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा बढ़ रहा था। हाथों में छोटे-छोटे दीप लिए लोग यमुना तट की ओर बढ़ रहे थे। फिर एक-एक कर दीप जलने शुरू हुए और कुछ ही देर में हरिपुर-कालसी का यमुना तट 2100 दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। दीपों की लौ नदी की लहरों पर प्रतिबिंबित हुई तो पूरा तट मानो प्रकाश की चादर में लिपट गया। आरती के स्वर, माँ यमुना का जयघोष और दीपों की कतारों के बीच हरिपुर की वह शाम केवल एक धार्मिक आयोजन की साक्षी नहीं थी। यह जौनसार-बावर में आस्...
2.67 लाख विद्यार्थियों में से चुने गए 140 युवा, सीएम धामी से सीधे करेंगे ‘नए उत्तराखण्ड’ की बात

2.67 लाख विद्यार्थियों में से चुने गए 140 युवा, सीएम धामी से सीधे करेंगे ‘नए उत्तराखण्ड’ की बात

देहरादून
  18 सितंबर को मुख्यमंत्री धामी के सामने रखेंगे ‘सपनों के उत्तराखण्ड’ का विजन, वरिष्ठ IAS अधिकारी भी करेंगे युवाओं से मंथन युवाओं के चुनिंदा सुझावों को नीति-निर्धारण से जोड़ेगी सरकार; चयनित विद्यार्थियों को 12वीं के बाद 2 लाख रुपये तक की करियर स्कॉलरशिपहिमांतर वेब डेस्कदेहरादून। उत्तराखण्ड कैसा हो, विकास की प्राथमिकताएं क्या हों और आने वाले वर्षों में देवभूमि को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए- अब इन सवालों पर युवा सीधे सरकार के सामने अपना विजन रखेंगे। प्रदेश के 2,67,744 विद्यार्थियों से मिले विचारों में से चयनित 140 छात्र-छात्राएं 18 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे संवाद करेंगे। ‘कैसा हो मेरे सपनों का उत्तराखण्ड?’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के इस अंतिम चरण को केवल संवाद तक सीमित नहीं रखा गया है। मुख्यमंत्री ने शासन के वरिष्ठ IAS अधिकारि...
उत्तराखंड में पहली बार फिल्म पुरस्कार, स्थानीय सिनेमा और प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच

उत्तराखंड में पहली बार फिल्म पुरस्कार, स्थानीय सिनेमा और प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच

देहरादून
  2024 और 2025 में बनी व उत्तराखंड में फिल्मांकित फिल्मों को मिलेगा सम्मान; 15 सितंबर से 16 अक्टूबर तक आवेदन, सात वर्षों में 1,440 से अधिक शूटिंग गतिविधियां दर्जहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनफिल्मों के लिए खूबसूरत लोकेशन के रूप में पहचान बना चुका उत्तराखंड अब अपनी फिल्म संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे लाने की तैयारी में है। प्रदेश में पहली बार उत्तराखंड फिल्म पुरस्कार-2024 एवं 2025 आयोजित किए जा रहे हैं। इसके जरिए उत्तराखंड में बनी अथवा फिल्मांकित फिल्मों के साथ क्षेत्रीय सिनेमा, कलाकारों और तकनीशियनों को सम्मानित किया जाएगा।उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद की इस पहल के लिए 15 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। पुरस्कारों में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी समेत उत्तराखंड की अन्य बोलियों में बनी फिल्मों के साथ हिंदी तथा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भ...
अल्मोड़ा के चिराग उप्रेती ने किया कमाल, 4 घंटे 17 मिनट में पूरी की लद्दाख हाई-एल्टीट्यूड मैराथन

अल्मोड़ा के चिराग उप्रेती ने किया कमाल, 4 घंटे 17 मिनट में पूरी की लद्दाख हाई-एल्टीट्यूड मैराथन

अल्‍मोड़ा, देश—विदेश
 हिमांतर वेब डेस्कलेह, लद्दाख: उत्तराखंड की पहाड़ियों में ट्रैकिंग और पहाड़ी रास्तों पर दौड़ने के शौकीन चिराग उप्रेती ने 13 सितंबर को प्रतिष्ठित लद्दाख मैराथन सफलतापूर्वक पूरी की। उन्होंने 4 घंटे 17 मिनट के आधिकारिक चिप टाइम के साथ फिनिश लाइन पार की। नैनीताल में जन्मे और पले-बढ़े चिराग ने अपनी स्कूली शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल से पूरी की। उनका परिवार मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के खेती गाँव का रहने वाला है। गाँव में उनका पैतृक घर भी है, जिसकी इन दिनों मरम्मत कराई जा रही है। स्कूल के दिनों में चिराग अक्सर अपने पैतृक गाँव जाया करते थे। वर्तमान में चिराग न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंटिस्ट हैं। उनकी रिसर्च का फोकस मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को समझने पर है। ऐसे में अपनी रनिंग जर्नी की सबसे कठिन रेसों में से एक के लिए हिमालय लौटना उनके ल...
विश्व ओजोन दिवस 2026 : आसमान की अदृश्य ढाल और धरती के भविष्य का संकल्प

विश्व ओजोन दिवस 2026 : आसमान की अदृश्य ढाल और धरती के भविष्य का संकल्प

शिक्षा
 विज्ञान ने संकट पहचाना, दुनिया ने हाथ मिलाया; अब लक्ष्य है- ओजोन-सुरक्षित और जलवायु-अनुकूल शीतलन डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल विज्ञान शिक्षक पी एम श्री कमलाराम नौटियाल राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज, धौंतरी (उत्तरकाशी) (राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी भारत द्वारा उत्कृष्ट विज्ञान शिक्षक सम्मान 2022)  कभी किसी शांत सुबह हिमालय की ऊंची पहाड़ी से आकाश की ओर देखिए। दूर तक फैला नीला विस्तार, बादलों की सफेद परतें और उनके बीच से उतरती सूर्य की सुनहरी किरणें हमें प्रकृति की विराटता का अनुभव कराती हैं। हम प्रकाश को देखते हैं, सूर्य की गर्माहट महसूस करते हैं और हवा के स्पर्श को अनुभव कर सकते हैं। किंतु इसी आकाश में प्रकृति ने जीवन की रक्षा के लिए एक ऐसी ढाल बना रखी है, जो न दिखाई देती है और न हाथों से छुई जा सकती है।  यही अदृश्य प्रहरी है—ओजोन परत।धरती पर जीवन की कहानी में ओजोन की मात्रा ब...
No Cap! Gen Z की भाषा समझनी है तो पहले उसकी ‘Vibe’ समझिए

No Cap! Gen Z की भाषा समझनी है तो पहले उसकी ‘Vibe’ समझिए

समसामयिक, सोशल-मीडिया
  Slay, Rizz, Delulu, Sus से लेकर Ghosting तक-नई पीढ़ी ने तैयार किया अपना शब्दकोश; शब्द कम हैं, एक्सप्रेशन ज्यादा और इमोजी भी कह देते हैं पूरी बातशशि मोहन रवांल्टा आर्ट डायरेक्टर पाञ्चजन्य एवं Organiser “भाई, ये तो बहुत sus है!” “उसका rizz देखा?” “Stop being delulu!” “आज तो तुम slay कर रहे हो!”इन वाक्यों को पढ़कर अगर आपके मन में पहला सवाल आया कि ‘आखिर ये बोल क्या रहे हैं?’, तो आप अकेले नहीं हैं। आज Gen Z की बातचीत सुनकर पिछली पीढ़ियों के बहुत से लोग कई बार खुद को किसी नई भाषा के सामने खड़ा पाते हैं। आए दिन सोशल मीडिया पर कोई नया शब्द ट्रेंड करता है और फिर उसका मतलब जानने के लिए हम गूगल का सहारा लेते नजर आते हैं।पीढ़ियां बदलती हैं तो वे अपने साथ सिर्फ नया फैशन, नई तकनीक और नई सोच ही नहीं लातीं, वह अपनी एक अलग भाषा भी गढ़ती है। कभी नए मुहावरे पैदा होते हैं, कभी पुराने...
42 वीं ऐतिहासिक पाँचवां धाम खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा

42 वीं ऐतिहासिक पाँचवां धाम खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा

टिहरी गढ़वाल
दिल्ली से अखोड़ी और वहां से सीमान्त गंगी गाँव तक साकार दिखा बडोनी का संकल्पहिमांतर ब्यूरो, टिहरीहिमालय गौरव स्वर्गीय इन्द्रमणि बडोनी द्वारा 1983 में प्रवर्तित और पर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा 2015 से नई दिल्ली से प्रतिवर्ष संचालित ऐतिहासिक पाँचवां धाम खतलिंग हिमालय जागरण महायात्रा का 42 वां संस्करण नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में “नेपाल की त्रासदी और हिमालय रक्षा की वैश्विक चिंता” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी से प्रारम्भ हुआ। गोष्ठी से पूर्व नेपाल में आई जल प्रलय की त्रासदी में मृत निरीह लोगों को दो मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि प्रदान की गई। राष्ट्रीय गोष्ठी के मुख्य अतिथि उत्तराखंड विधानसभा के सदस्य और टिहरी के विधायक श्री किशोर उपाध्याय थे,अतिविशिष्ट अतिथि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मीडिया सलाहकार श्री मदनमोहन सती थे और इस गोष्ठी की अध्यक्षता स...