Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्वर में रिवर्स माइग्रेशन की मिसाल: आधुनिक कृषि और कीवी खेती से पलायन पर लगाम, बढ़ी किसानों की आय

बागेश्‍वर
  पहाड़ में लौटती उम्मीद: आधुनिक कृषि से बदल रहा बागेश्वर का भविष्यहिमांतर ब्यूरो, बागेश्वरउत्तराखंड के पहाड़ों में वर्षों से पलायन एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती रहा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुविधाओं की तलाश में गांवों से शहरों की ओर बढ़ता कदम अक्सर सूने घरों और वीरान खेतों की कहानी कहता था। लेकिन अब इसी पहाड़ में एक नई कहानी जन्म ले रही है- “रिवर्स माइग्रेशन” की कहानी, जहां लोग लौट रहे हैं… और सिर्फ लौट ही नहीं रहे, बल्कि अपने गांवों की तस्वीर बदल रहे हैं। बागेश्वर इस बदलाव की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। यहां आधुनिक कृषि, सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है।बदलती सोच, बदलती ज़मीन जिलाधिकारी आकांक्षा कोंड़े के नेतृत्व में जनपद में कृषि को केवल आजीविका नहीं, बल्कि उद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस प्रयास क...
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा फोकस: 45 दिन में 520 किलो शहद उत्पादन, उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा फोकस: 45 दिन में 520 किलो शहद उत्पादन, उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा

देहरादून
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस वर्ष मात्र 45 दिनों की अवधि में यहां 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर पर्वतीय और वन क्षेत्रों में। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स की स्थापना के लिए एक प्रभावी नीति तैयार की जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता दी जाएगी और इससे जुड़े किसानों एवं उद्यमियों को विशेष सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा तथा ...
हजारों महिलाओं के साथ सड़क पर उतरे CM धामी, देहरादून में निकली जन आक्रोश पदयात्रा

हजारों महिलाओं के साथ सड़क पर उतरे CM धामी, देहरादून में निकली जन आक्रोश पदयात्रा

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने हजारों महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक निकाली गई जन आक्रोश पदयात्रा में भी हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, लेकिन लोकसभा में संख्या बल के अभाव में इसे पारित नहीं किया जा सका। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस विधेयक को पारित होने से रोककर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है।उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तत्पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिल...
त्यूणी में जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन का आयोजन, बच्चों ने लोकभाषा संरक्षण का दिया संदेश

त्यूणी में जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन का आयोजन, बच्चों ने लोकभाषा संरक्षण का दिया संदेश

देहरादून
 नीरज उत्तराखंडीआखर लोक बोली भाषा समिति के तत्वावधान में पंडित शिवराम राजकीय महाविद्यालय, त्यूणी में जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और स्थानीय बाल प्रतिभाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जौनसारी बोली में कविता पाठ प्रस्तुत किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लोकसंस्कृति और पारंपरिक साहित्य से जोड़ना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। लोकभाषा संरक्षण के संदेश के साथ बच्चों ने जौनसारी बोउरी में सामाजिक जीवन, पहाड़ी संस्कृति, प्रकृति, रिश्तों और लोक परंपराओं पर आधारित कविताओं का प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण किया। बाल प्रतिभाओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और स्थानीय बोली के महत्व को पुनः रेखांकित किया।सम्मेलन में मुख्य अति...
उत्तरकाशी: हॉट मिक्स प्लांट के जहरीले धुएं से दहशत में जरड़ा गांव, ग्रामीणों ने उठाई हटाने की मांग

उत्तरकाशी: हॉट मिक्स प्लांट के जहरीले धुएं से दहशत में जरड़ा गांव, ग्रामीणों ने उठाई हटाने की मांग

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी,  नौगांवबिल्ला–जरड़ा मोटर मार्ग पर संचालित हॉट मिक्स प्लांट से निकल रहे कथित जहरीले धुएं ने जरड़ा गांव के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट नियमों के विपरीत संचालित हो रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी बड़कोट को ज्ञापन सौंपकर प्लांट की जांच कर उसे आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्लांट से उठने वाला धुआं आसपास की फसलों और चारा पत्ती को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडराने लगा है। कास्तकार रणजोर सिंह, प्रताप सिंह, दिवान सिंह, सोमेन्द्र सिंह, अकबर सिंह, राजवीर सिंह, अब्बल सिंह और संदीप सिंह सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट के बेहद करीब उनकी कृषि भूमि स्थित है। गांव और प्लांट के बीच हवाई दूरी ...
रवांई में विलुप्त होती ‘कुनाई तेल पिराई’ परंपरा, रिफाइंड तेल ने छीना पारंपरिक स्वाद

रवांई में विलुप्त होती ‘कुनाई तेल पिराई’ परंपरा, रिफाइंड तेल ने छीना पारंपरिक स्वाद

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला (उत्तरकाशी)रवांई घाटी की सुबहें कभी सिर्फ सूरज की रोशनी से नहीं, बल्कि सरसों और खुबानी (चुलु) के ताजे तेल की खुशबू से भी जगती थीं। आंगन में रखी लकड़ी की कुनाई, आसपास जुटी महिलाएं, और हंसी-ठिठोली के बीच चलती तेल पिराई- यह दृश्य यहां के जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करता था। आज वही खुशबू धुंधली पड़ चुकी है। बाजार के रिफाइंड तेल ने न सिर्फ रसोई का स्वाद बदला है, बल्कि एक पूरी परंपरा को धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर ला खड़ा किया है।जब परंपरा थी सामूहिक उत्सव मोरी क्षेत्र के पंचगाई, अठोर, बढ़ासु, फतेपर्वत और आराकोट जैसे गांवों में सर्दियों की शुरुआत तेल पिराई के मौसम का संकेत होती थी। यह केवल एक काम नहीं, बल्कि सामूहिक उत्सव जैसा अनुभव था। गांव की महिलाएं सप्ताहभर तक एक-दूसरे के घरों में जुटतीं, गीत गातीं और काम के साथ रिश्तों को भी मजबूत करतीं। कुनाई ...
चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज़, खुले यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट

चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज़, खुले यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट

उत्तरकाशी
  कपाटोद्घाटन के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से की पहली पूजा अर्चनाहिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशी/बड़कोटअक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम एवं यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा 2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया। शुभ मुहूर्त के अनुसार गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट 12 बजकर 35 मिनट पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। परंपराओं के साथ निकली डोली यात्रा मां यमुना की डोली अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली (खुशीमठ) से अपने भाई शनिदेव की अगुवाई में यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। खरसाली में ग्रामीणों और लोक देवताओं की डोलियों ने भावुक माहौल में मां यमुना को विदाई दी। यमुनोत्री धाम पहुंचने पर हवन-पू...
अक्षय तृतीया पर खुले यमुनोत्री धाम के कपाट, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ

अक्षय तृतीया पर खुले यमुनोत्री धाम के कपाट, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, बड़कोट (उत्तरकाशी)अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। शुभ लग्नानुसार दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कपाटोद्घाटन हुआ, जिसके साथ ही ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया।कपाट खुलने के बाद अब आगामी छह माह तक देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।अक्षय तृतीया के अवसर पर सुबह मां यमुना की शीतकालीन गद्दी स्थल खरसाली (खुशीमठ) से पारंपरिक विधि-विधान के साथ डोली यात्रा प्रारंभ हुई। शनिदेव की डोली की अगुवाई में सुबह करीब साढ़े आठ बजे मां यमुना की डोली यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई।इस दौरान ग्रामीणों ने भव्य ढंग से मां यमुना को विदाई दी। पूरा क्षेत्र पारंपरिक वाद्य यंत्रों और आईटीबीपी के बैंड की मधुर धुनो...
मोरी में खाड़ी (हाथकरघा) से आत्मनिर्भरता की मिसाल: पारंपरिक ऊनी शिल्प से बढ़ रही ग्रामीणों की आय

मोरी में खाड़ी (हाथकरघा) से आत्मनिर्भरता की मिसाल: पारंपरिक ऊनी शिल्प से बढ़ रही ग्रामीणों की आय

अभिनव पहल, उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला-मोरीविकासखंड मोरी के दूरस्थ गांवों में आज भी परंपरा और आत्मनिर्भरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच यहां खाड़ी (हाथकरघा) पर ऊनी वस्त्र बनाने की सदियों पुरानी परंपरा न केवल जीवित है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका का मजबूत आधार भी बन चुकी है। परंपरा में रची-बसी आजीविका मोरी क्षेत्र के गांवों में महिलाएं और पुरुष मिलकर ऊन से पारंपरिक वस्त्र तैयार करते हैं। भेड़ों से ऊन निकालने से लेकर उसे साफ करने, हाथ से कातने और खाड़ी पर बुनने तक की पूरी प्रक्रिया बड़े धैर्य और कौशल से निभाई जाती है।फजी, सुन्तण, साफ़ा, जुड़की और लखोटि जैसे पारंपरिक ऊनी वस्त्र न केवल कड़ाके की ठंड से बचाते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पहचान और विरासत के प्रतीक भी हैं।तालुका क्षेत्र की महिला केशरमणि कहती हैं, “यह काम सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि हमारी ...
पहाड़ की रसोई से रोजगार तक: ‘असकाई’ ने बदली कारीगरों की तकदीर

पहाड़ की रसोई से रोजगार तक: ‘असकाई’ ने बदली कारीगरों की तकदीर

उत्तराखंड हलचल
  पारंपरिक बर्तन बना कमाई का जरिया नीरज उत्तराखंडीउत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक व्यंजन ‘असका’ बनाने में उपयोग होने वाला मिट्टी का खास बर्तन ‘असकाई’ आज हस्तकला और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।आधुनिकता की दौड़ में जहां पारंपरिक बर्तन धीरे-धीरे गायब हो रहे थे, वहीं ‘असकाई’ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम किया है।असकाई: परंपरा और तकनीक का संगम ‘असकाई’ मिट्टी से बना पारंपरिक बर्तन है, जिसका उपयोग खासतौर पर ‘असका’ बनाने में होता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि भोजन धीमी आंच पर समान रूप से पकता है, जिससे स्वाद और पौष्टिकता दोनों बरकरार रहते हैं।स्थानीय कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं।हस्तकला का अनूठा नमूना ‘असकाई’ केवल एक बर्तन नहीं, बल्कि पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।इसे पूरी तरह हाथों से बनाया जाता है—मिट...