Pantnagar Kisan Mela 2026: पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभ, 560 से अधिक स्टॉल

 

उत्तराखंड के राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘फूड सरप्लस’ से ‘इनकम सरप्लस’ की ओर बढ़ने का किया आह्वान; AI, ड्रोन, हनी, अरोमा और मिलेट्स क्रांति पर दिया जोर

 

  • हिमांतर ब्यूरो, पंतनगर (उधमसिंह नगर)

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ले. ज. गुरमीत सिंह ने किया। मेले में 560 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जबकि 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना है।

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं से निकालकर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाना होगा।

‘Food Surplus’ के बाद ‘Income Surplus’ पर हो फोकस

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब कृषि क्षेत्र को ‘फूड सरप्लस’ से आगे बढ़ाकर ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में ले जाने का समय है, ताकि बढ़ी हुई कृषि उत्पादकता का लाभ किसानों की आय में भी दिखाई दे।

AI और Drone Technology से जुड़े किसान

राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को तकनीक से दूरी बनाने के बजाय उसे अपने काम का सहयोगी बनाना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी होगा, जब नई तकनीक किसान के खेत तक पहुंचे।

किसान मेले में स्टालों का भ्रमण करते माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड ले ज गुरमीत सिंह।
किसान मेले में स्टालों का भ्रमण करते माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड ले ज गुरमीत सिंह।
Honey, Aroma और Millets में उत्तराखंड के लिए बड़ी संभावना

राज्यपाल ने उत्तराखंड में हनी क्रांति, अरोमा क्रांति और श्रीअन्न (मिलेट्स) क्रांति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक शहद, सुगंधित एवं औषधीय फसलों और मोटे अनाज के क्षेत्र में राज्य के पास व्यापक संभावनाएं हैं।

किसान को उत्पादक के साथ उद्यमी भी बनना होगा

राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक किसान को केवल उत्पादन की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। किसानों को पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, बाजार, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को भी समझना होगा।

उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन की सराहना की।

कोदा-झंगोरा, कीवी और ड्रैगन फ्रूट पर जोर

कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड में बागवानी, हाई डेंसिटी एप्पल, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मोटे अनाज की संभावनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि कोदा-झंगोरा जैसे उत्तराखंड के पारंपरिक अनाजों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। युवाओं को कृषि एवं कृषि उद्यमिता से जोड़ने की भी आवश्यकता है।

किसान मेले में महिला क्लब के स्टाल का अवलोकन करते माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड ले ज गुरमीत सिंह एवं अन्य अतिथि।
किसान मेले में महिला क्लब के स्टाल का अवलोकन करते माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड ले ज गुरमीत सिंह एवं अन्य अतिथि।
खेती के साथ पशुपालन और मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी आय

कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कृषि के ‘इंटीग्रेशन मॉडल’ पर जोर देते हुए कहा कि खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों को जोड़ने से किसानों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि में केवल उत्पादकता बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादन लागत कम करने पर भी काम करना होगा।

Pantnagar Kisan Mela में 560 से अधिक स्टॉल

निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा के अनुसार किसान मेले में 560 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं और इस वर्ष 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना है।

मेले में कृषि यंत्र, जैविक उत्पाद, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, फूल एवं सब्जियों की नवीन प्रजातियां, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली और स्मार्ट कृषि उपकरण प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

महिला स्वयं सहायता समूहों ने जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बड़ियां और हस्तशिल्प सहित विभिन्न स्थानीय उत्पाद भी प्रदर्शित किए हैं।

नौ प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से चयनित नौ प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न कृषि साहित्य का विमोचन भी किया गया।

राज्यपाल ने किसानों, वैज्ञानिकों, युवाओं और उद्यमियों से कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और भारत के विकास की राह खेतों से होकर गुजरती है।

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *