
मसरी-भीतरी-सदना में सेब के पेड़ों को नुकसान, नटीण गांव में वनकर्मी गंभीर घायल
बागवानों ने पार्क प्रशासन से मुआवजे और स्थायी घेरबाड़ की मांग की
- नीरज उत्तराखंडी, मोरी (उत्तरकाशी)
उत्तरकाशी जिले के मोरी और भटवाड़ी क्षेत्रों में भालुओं की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। गोविंद पशु विहार एवं राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र की रूपिन रेंज में भालू सेब के बागानों में घुसकर पेड़ों और तैयार फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, भटवाड़ी विकासखंड के नटीण गांव में भालू के हमले में वन विभाग का एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों और बागवानों ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने के साथ ही फसल नुकसान का आकलन कर समयबद्ध मुआवजा देने की मांग की है।
सेब के पेड़ों की टहनियां तोड़ रहे भालू
मोरी विकासखंड के गोविंद पशु विहार पार्क क्षेत्र की रूपिन रेंज के मसरी, भीतरी और सदना तोक में भालुओं ने सेब बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सेब की फसल तैयार होने के समय भालू बागानों में घुसकर पेड़ों की टहनियां तोड़ रहे हैं। इससे पेड़ों को नुकसान पहुंचने के साथ ही तैयार फसल भी बर्बाद हो रही है।
भीतरी क्षेत्र के काश्तकार जगदीश कुंवर के अनुसार फते पर्वत के मसरी, भीतरी और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फसल तैयार हो रही है। ऐसे समय में भालुओं के लगातार बागानों में पहुंचने से बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बागवानों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर सेब सीजन में भालुओं के बागानों में घुसने और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आती हैं। क्षेत्र के काश्तकार कई वर्षों से पार्क प्रशासन से बागानों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग
काश्तकारों का कहना है कि जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के अनुपात में पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता। उन्होंने पार्क प्रशासन से प्रभावित बागानों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
बागवानों ने भालुओं की आवाजाही रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी और स्थायी घेरबाड़ की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि केवल सीजन के दौरान अस्थायी उपाय करने के बजाय बागानों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
गोविंद पशु विहार पार्क की उप निदेशक निधि सेमवाल के अनुसार भालुओं द्वारा फसलों और सेब उद्यानों को होने वाले नुकसान के मुआवजे से संबंधित नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि भालुओं को बागानों से दूर रखने के लिए क्षेत्र में हर वर्ष सोलर एवं अन्य निर्धारित उपकरण भी लगाए जाते हैं।
नटीण में वनकर्मी पर भालू का हमला
इधर, भटवाड़ी विकासखंड के नटीण गांव में भालू के हमले में वन विभाग का दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान द्वारी गांव निवासी करीब 55 वर्षीय मंगल सिंह पोखरियाल के रूप में हुई है।
द्वारी गांव के प्रधान सज्जन सिंह नेगी के अनुसार मंगल सिंह नटीण गांव स्थित वन विभाग की नर्सरी में काम करने जा रहे थे। रास्ते में अचानक भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमले में मंगल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।
उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और भालू को वहां से भगाया। वन विभाग को घटना की सूचना देने के बाद ग्रामीण मंगल सिंह को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भटवाड़ी ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल उत्तरकाशी रेफर कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि मंगल सिंह पर इससे पहले भी भालू हमला कर चुका है। दोबारा भालू के हमले का शिकार होने की घटना से क्षेत्र में ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
फसल से इंसान तक बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
मोरी और भटवाड़ी में सामने आई घटनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की ओर भी ध्यान खींचती हैं। बागवानों के अनुसार भालू सेब और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि जंगली सूअर गेहूं और आलू जैसी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के साथ उनकी आजीविका और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। काश्तकारों ने प्रशासन और पार्क प्रबंधन से नुकसान का पारदर्शी आकलन, समयबद्ध मुआवजा और संवेदनशील गांवों व बागानों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
