अखतीर मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, देववन पहुंचे पवासी महासू देवता

शाही स्नान और परियों से भेंट की मान्यता से जुड़ी है सदियों पुरानी देव परंपरा

  • नीरज उत्तराखंडी | पुरोला

जनपद उत्तरकाशी के सीमावर्ती बंगाण क्षेत्र में आस्था, लोकसंस्कृति और देव परंपरा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब ठडियार मंदिर से श्री पवासी महासू देवता की प्रवास यात्रा शनिवार को ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देववन मंदिर पहुंची। देवता की इस पवित्र यात्रा के साथ देववन के हरे-भरे बुग्यालों में प्रसिद्ध अखतीर मेले का भी भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की और देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मान्यता है कि श्री पवासी महासू देवता वर्ष में एक बार ज्येष्ठ मास में देववन पहुंचकर शाही स्नान करते हैं तथा परियों से भेंट करते हैं। इसी परंपरा के निर्वहन के लिए देवता दो दिवसीय प्रवास पर देववन आते हैं। शनिवार सुबह ठडियार मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा आठ किलोमीटर की कठिन और खड़ी चढ़ाई पार कर पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित प्राचीन देववन मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला और पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा।

पांशीबिल क्षेत्र के टॉस वन प्रभाग से जुड़े घने जंगलों के बीच स्थित देववन मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना, हवन तथा बरवांश पूजा संपन्न हुई। इसके बाद देवता मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हुए।

देव परंपरा के अनुसार रविवार सुबह घूंडा पूजन और हवन-यज्ञ आयोजित किया जाएगा। इसके उपरांत जलकुंड में शाही स्नान की रस्म निभाई जाएगी, जिसे परियों से देवता की भेंट का प्रतीक माना जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर के समीप स्थित विशाल शिला में परियों का वास माना जाता है। कहा जाता है कि परियों को दिए गए वचन के निर्वहन हेतु ही महासू देवता हर वर्ष देववन पहुंचते हैं। यही कारण है कि इस यात्रा को क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण देव यात्राओं में गिना जाता है।

विशेष बात यह भी है कि देववन मंदिर के कपाट वर्षभर में केवल दो दिनों के लिए ही खोले जाते हैं। बरवांश यात्रा और विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट पुनः बंद कर दिए जाते हैं। दो दिन के प्रवास के बाद 25 मई को देवता देवती गांव स्थित मंदिर में विराजमान होंगे। परंपरा के अनुसार महासू देवता बंगाण क्षेत्र की तीनों घट्टियों में क्रमवार एक-एक वर्ष प्रवास करते हैं।

देववन में आयोजित अखतीर मेले ने लोक उत्सव का रूप ले लिया। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मेले में भाग लिया। पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।

इस अवसर पर पुरोला विधायक दुर्गेश लाल, सदर स्याणा अर्जुन सिंह रावत, स्यागा गुलाब सिंह, स्थाणा रघुवीर पंवार, पांशीबिल के वजीर जयपाल पंवार, कनिष्ठ उपप्रमुख कमलेश रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रेम सिंह, जनक सिंह सजवाण, विक्रम सिंह राजगुरु सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

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