
- नीरजउत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशी
उत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र की लोक गायिका, कवयित्री और मैक्रम डिजाइन प्रशिक्षिका राजुली बत्रा आज क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान है।
मटियानी (दुडोनी) में जन्मी और मंजियाली (नौगांव) में ससुराल होने के बावजूद राजुली बत्रा ने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।
बचपन से ही संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
राजुली बत्रा ने वर्ष 2001 में मटियाली छानी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर रामलीला का आयोजन शुरू करवाया। इस रामलीला में उन्होंने स्वयं निर्देशक की भूमिका निभाई। उनके निरंतर प्रयासों से यह आयोजन वर्ष 2014 तक सफलतापूर्वक संचालित होता रहा। यही वह मंच था, जहां से उनके सामाजिक और सांस्कृतिक सफर की मजबूत शुरुआत हुई।

शिक्षा के क्षेत्र में भी रही अग्रणी
वर्ष 2004 में बड़कोट डिग्री कॉलेज में उन्हें “सर्वश्रेष्ठ अनुशासित छात्रा” का पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने विभिन्न मंचों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारते हुए समाज में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।
युवा महोत्सवों में निर्णायक की भूमिका
पिछले लगभग 18 वर्षों से अधिक समय से राजुली बत्रा युवा कल्याण विभाग उत्तरकाशी के अंतर्गत पुरोला में आयोजित युवा द्वारा युवा महोत्सव में हर वर्ष निर्णायक (जज) की भूमिका निभा रही हैं। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों युवाओं को कला, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित किया।

शिक्षा और कौशल विकास में बड़ा योगदान
राजुली बत्रा ने वर्ष 2005 से 2023 तक शिक्षण कार्य करते हुए अनेक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार देने का कार्य किया।
इसके साथ ही उन्होंने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, टिहरी गढ़वाल तथा उत्तरकाशी जिले के कई विद्यालयों में बालिकाओं को मैक्रम डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया।
साथ ही गाइडेंस काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित भी करती रही हैं।
लोक संस्कृति और भाषा की सशक्त आवाज
राजुली बत्रा संगीत और साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं पर आधारित कई गीत लिखे हैं तथा रवांल्टी लोक भाषा में कविताओं की रचना कर स्थानीय संस्कृति को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
राज्य स्तर पर भी मिला सम्मान
वर्ष 2024 में उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग द्वारा भराड़ीसैंण (गैरसैण) में आयोजित उद्यमिता विकास कार्यशाला में भी उन्हें उनके सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया था।

महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश
राजुली बत्रा का मानना है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। उनका कहना है कि शिक्षा, संस्कृति और आत्मविश्वास ही महिलाओं को सशक्त बनाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और उपलब्धियों की पहचान है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का संदेश भी है कि लगन, मेहनत और संकल्प के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
क्या होता है मैक्रम डिजाइन
मैक्रम (Macramé) एक प्रकार की हस्तशिल्प कला है, जिसमें धागों या डोरियों को बिना किसी बुनाई या सिलाई मशीन के केवल हाथों से अलग-अलग प्रकार की गांठें (Knots) लगाकर सुंदर सजावटी या उपयोगी वस्तुएं बनाई जाती हैं।
यह प्राचीन कला आजकल आधुनिक घरों की सजावट के लिए जैसे वॉल हैंगिंग, प्लांट हैंगर, पर्दे, झूला और बैग बनाने में काफी लोकप्रिय हो चुकी है।
