हिमालयी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविधता और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर स्थापित करना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। हम उस समाज की आवाज़ बनना चाहते हैं, जिसने सदियों से न केवल देश की सीमाओं की रक्षा की है, बल्कि अपनी परंपराओं, मूल्यों और जीवन शैली से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है।
हमारा संकल्प है कि हिमालयी क्षेत्र में निवास करने वाले विभिन्न जाति, धर्म और समुदायों की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों और संभावनाओं को प्रमुखता से सामने लाया जाए। साथ ही, इस समाज के सर्वांगीण विकास के लिए नीतिगत संवाद को बढ़ावा देना और एक स्थायी, समावेशी दृष्टिकोण के निर्माण में योगदान देना भी हमारी प्राथमिकता है।
हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हिमालयी संस्कृति के विविध रूप—लोक कला, भाषा, परंपराएं और जीवन पद्धति—देश और दुनिया तक पहुंचे, ताकि इस अद्वितीय समाज की पहचान को वैश्विक स्तर पर उचित स्थान मिल सके।
देहरादून कार्यालय
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अच्छा कार्य। प्रशंसनीय। अनुकरणीय। हार्दिक बधाई।
माननीय सम्पादक जी,
हिमातंर को लेकर आपके उद्देश्य पढ़ कर अच्छा लगा,
आप अपने इस उद्देश्य में सफल हों यहीं शुभकामनाएं है ,आपको बधाई !!
सादर
बहुत ही सराहनीय प्रयास है । पहाड़ की संस्कृति बहुत ही समृद्ध व भव्य संस्कृति है ।मैंने तो पी॰ एच॰डी॰ एवं डी॰ लिट कुमाऊँनी लोक साहित्य पर ही किया है । मेरे पिताजी डॉ. नारायणदत्त पालीवाल ( प्रथम सचिव हिन्दी अकादमी ) जी की हार्दिक इच्छा थी कि मैं कुमाऊँनी लोक साहित्य पर ही काम करूँ।पहाड़ पर तो जितना लिखा जाये उतना कम है ।