
रवांई घाटी की मिट्टी से निकले शिक्षक एवं युवा साहित्यकार को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला सम्मान
- हिमांतर वेब डेस्क
हरिद्वार। रोटरी क्लब-कनखल, हरिद्वार की ओर से शिक्षकों के सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चुनिंदा शिक्षकों को ‘नेशन बिल्डर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। इस दौरान करीब आधा दर्जन शिक्षकों को सम्मानित कर उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की गई।
सम्मानित होने वाले शिक्षकों में रवांई घाटी की माटी में जन्मे प्रसिद्ध शिक्षक एवं युवा साहित्यकार दिनेश रावत भी शामिल रहे। शिक्षा के क्षेत्र में अपने समर्पण, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने के प्रयासों के लिए उन्हें रोटरी क्लब-कनखल की ओर से ‘Nation Builder Award’ प्रदान किया गया।
दिनेश रावत लंबे समय से शिक्षा के साथ साहित्यिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं। शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उनमें रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। वहीं युवा साहित्यकार के रूप में उनकी रचनाओं में पहाड़ की संस्कृति, लोकजीवन, प्रकृति, सामाजिक सरोकार और बदलते ग्रामीण परिवेश की झलक देखने को मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे शिक्षकों को सम्मानित करना समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है।
दिनेश रावत को इससे पूर्व भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान के चलते उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मान प्राप्त हुए हैं। ‘नेशन बिल्डर अवार्ड’ उनके कार्यों और समर्पण के प्रति एक और महत्वपूर्ण सम्मान के रूप में जुड़ा है।
रवांई घाटी से निकलकर शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले दिनेश रावत को मिले इस सम्मान से क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। उनके सम्मान पर शिक्षकों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों ने बधाई देते हुए इसे रवांई घाटी के लिए गौरव का विषय बताया।
