Tag: साहित्य

 ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से सम्मानित हुए साहित्यकार महावीर रवांल्टा

 ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से सम्मानित हुए साहित्यकार महावीर रवांल्टा

उत्तरकाशी, देश—विदेश
 नीरज उत्तराखंडीलखनऊ. हिन्दी साहित्य की गद्य विधा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘बलदेव मल्ल सम्मान’ प्रदान किया गया. यह सम्मान बी.एम.एन. सेवा संस्थान, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार, हजरतगंज, लखनऊ में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया. समारोह में विधानसभा सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, आईएएसए महामहिम राज्यपाल के विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्त तथा प्रभुनाथ राय सहित देशभर से पधारे साहित्य, कला और संस्कृति के साधकों की गरिमामयी उपस्थिति रही.साहित्य साधना की चार दशक लंबी यात्रा 10 मई 1966 को सुदूरवर्ती सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा वर्तमान में महरगांव में निवास कर रहे हैं. उन्होंने अस्सी के दशक में लेखन की शुरुआत की और तब से अब तक साहित...
ऑनलाइन शिक्षा में रचनात्मकता की मिसाल: जश्न-ए-बचपन ग्रुप

ऑनलाइन शिक्षा में रचनात्मकता की मिसाल: जश्न-ए-बचपन ग्रुप

अभिनव पहल
कोरोना महामारी के इस वैश्विक दौर में बुरी तरह प्रभावित होने वाले तमाम क्षेत्रों में से एक है शिक्षा का क्षेत्र. पूरे देश में स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक के लगभग 33 करोड़ विद्यार्थी इस महामारी के कारण अपनी पढ़ाई-लिखाई से समझौता करने को विवश हैं. ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाने की कोशिश तमाम स्कूलों व विश्वविद्यालयों द्वारा की जा रही है लेकिन रचनात्मकता व इंटरनेट की अनुपलब्धता के कारण कई विद्यार्थी इस तरह की कक्षाओं में अपनी रूचि खोते जा रहे हैं. एक ढर्रे में चलाई जा रही ऑनलाइन कक्षाएँ कई बार पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति जैसी ही लगती हैं. इस खानापूर्ति रूपी ऑनलाइन पढ़ाई से परे उत्तराखंड के सरकारी शिक्षकों से जुड़े “रचनात्मक शिक्षक मंडल” ने “जश्न ए बचपन” नाम से एक व्हाट्सऐप ग्रुप का निर्माण किया है जिसकी चर्चा आजकल राज्य के लगभग हर स्थानीय अखबार व सोशल मीडिया ग्रुप में जोर...
ईमानदार समीक्षा-साहित्य का सच्चा पाठक और लेखक

ईमानदार समीक्षा-साहित्य का सच्चा पाठक और लेखक

साहित्यिक-हलचल
ललित फुलाराएक जानकार काफी दिनों से अपनी किताब की समीक्षा लिखवाना चाहते थे. अक्सर सोशल मीडिया लेटर बॉक्स पर उनका संदेश आ टपकता. 'मैं उदार और भला आदमी हूं' यह जताने के लिए उनके संदेश पर हाथ जोड़ तीन-चार दिन बाद मेरी जवाबी चिट्ठी भी पहुंच जाती. यह सिलसिला काफी लंबे वक्त का है. इतना धैर्यवान व्यक्ति मैंने अभी तक नहीं देखा था. एक ही संदेश हर दूसरे दिन ईमोजी की संख्या बढ़ाकर मुझे मिलता और हर तीसरे-चौथे दिन विनम्रतापूर्ण नमस्कार वाली इमोजी की संख्या बढ़ाकर मेरा जवाब उन तक पहुंचता. बीच-बीच में कभी-कभार वो मैसेंजर से फोन भी कर लिया करते.एक शाम फिर दूरभाष. बड़े अधिकार भाव से बोले- 'कुछ ही शब्द लिखकर पोस्ट कर दीजिए.' मैंने उनको समझाना चाहा कि मैं किताब नहीं पढ़ता. और बिना पढ़े शेयर नहीं करता. न ही आदेश पर लिखता हूं और न ही विनती पर. इस पर उनका अधिकार भाव थोड़ा लचीला हुआ और बोले. 'मुझे लगता ...