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जौनसार-बावर : लोक आस्था, शौर्य का उत्सव है ‘पायन्ता’

जौनसार-बावर : लोक आस्था, शौर्य का उत्सव है ‘पायन्ता’

लोक पर्व-त्योहार
  जौनसार-बावर का अनूठा ‘पाइंता पर्व’: देव आराधना, शस्त्र पूजन, वीर गाथाओं और पश्चाताप की सदियों पुरानी परंपराओं का संगमइन्द्र सिंह नेगी वरिष्ठ पत्रकार उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर की लोक संस्कृति अपनी विशिष्ट परंपराओं, देवी-देवताओं के प्रति अगाध आस्था और ऐतिहासिक विरासत के लिए अलग पहचान रखती है। यहाँ विजयदशमी का पर्व देश के अधिकांश हिस्सों से बिल्कुल अलग स्वरूप में मनाया जाता है। जहाँ सामान्यतः दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं जौनसार-बावर में परंपरागत रूप से रावण-दहन के बजाय देव आराधना, शस्त्र पूजन, वीरों के स्मरण और सामूहिक उल्लास का पर्व ‘पाइंता’ मनाया जाता है। जौनसार-बावर के महासू महाराज और सिलगुर महाराज के देवालयों में पाइंता विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। बिस...