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‘शैलेश मटियानी’ राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होंगे पुरोला के शिक्षक पृथ्वी सिंह रावत

‘शैलेश मटियानी’ राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होंगे पुरोला के शिक्षक पृथ्वी सिंह रावत

उत्तरकाशी, देहरादून
 नीरजउत्तराखंडी, देहरादून/पुरोलाउत्तराखंड सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 19 शिक्षकों के नाम ‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार’ के लिए घोषित कर दिए हैं। यह प्रतिष्ठित सम्मान शिक्षकों के नवाचार, समर्पण और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। घोषित सूची में जनपद उत्तरकाशी के पुरोला ब्लॉक स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय, उदकोटी के प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत का नाम भी शामिल है। उन्हें विद्यालयी शिक्षा में सुधार, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के प्रयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए चयनित किया गया है।शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का सम्मान राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रख्यात साहित्यकार शैलेश मटियानी की स्मृति में प्रदान किया जाता है। ...
उत्तराखंड: शैलेश मटियानी पुरस्कार घोषित, यहां देखें लिस्ट

उत्तराखंड: शैलेश मटियानी पुरस्कार घोषित, यहां देखें लिस्ट

उत्तराखंड हलचल
देहरादून: राज्य सरकार ने शैलेश मटियानी पुरस्कार की घोषणा कर दी है। सभी जिलों के शिक्षकों को यह पुरस्कार दिया गया है।
उत्तराखंड: जीवन संघर्ष का नाम था शैलेश मटियानी

उत्तराखंड: जीवन संघर्ष का नाम था शैलेश मटियानी

उत्तराखंड हलचल
देवेन मेवाड़ी जी का संस्मरण आज 14 अक्टूबर शैलेश मटियानी जी का जन्म दिन है। कभी जब मैं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा इंस्टिट्यूट), नई दिल्ली में शोध कार्य कर रहा था तो वे एक दिन अपना बड़ा-सा टीन का बक्सा लेकर मेरे किराए के कमरे में आकर बोले थे,”देबेन, इस बार दो-चार दिन तुम्हारे पास रुकूंगा।”(वे मुझे छोटा भाई मानते थे और देवेन नहीं देबेन कहते थे)। दिन भर शहर की खाक छानने के बाद थके-मांदे लौटते तो फर्श पर दरी में बिस्तर बिछा कर आराम से लेट जाते और दिन भर की घटनाओं के किस्से सुनाते। उनको याद करते हुए उन्हीं में से ये दो किस्से। एक दिन शाम को लौटे तो हाथ में खरौंच थी। पूछा तो कहने लगे, “मामूली चोट है। थोड़ा बंद चोट लग गई।” “क्यों क्या हुआ?” मैंने पूछा। “अरे कुछ नहीं। रिक्शा पलट गया था। लेकिन, रिक्शे वाले की कोई गलती नहीं थी। सामने से गाड़ी आ गई। अंसारी रोड वैसे ही संकरी है, ऊपर से गा...
शैलेश मटियानी जन्मतिथि पर भावपूर्ण स्मरण

शैलेश मटियानी जन्मतिथि पर भावपूर्ण स्मरण

स्मृति-शेष
जन्मतिथि (14  अक्टूबर) पर विशेषडॉ. अमिता प्रकाश“दुख ही जीवन की कथा रही क्या कहूँ आज जो नहीं कही.” निराला जी की ये पंक्तियाँ जितनी हिंदी काव्य के महाप्राण निराला के जीवन को उद्घाटित करती हैं उतनी ही हमारे कथा साहित्य में अप्रतिम स्थान रखने वाले so रमेश चंद्र सिंह मटियानी का, जिन्हें विश्व साहित्य शैलेश मटियानी के नाम से जानता है. जुआरी बिशन सिंह के बेटे और बूचड़ के भतीजे कि रूप में दुत्कारित यह ’मुल्या छोरा’ किस so प्रकार हिंदी साहित्याकाश का दैदिप्यमान नक्षत्र बना यह अपने आप में कम रोचक कथा नहीं है. उनका साहित्य वस्तुतः उनके जीवन का विस्तार है जो कुछ भोगा वही शब्दों में ढाला. because उनके पास लेखन के लिये इतना भी समय नहीं था कि वह अपने लेखन का सौंदर्यीकरण कर पाते,  दस -बीस पृष्ठ लिखे नहीं कि दो पैसे की चाह में उन्हें छपवाने भेज दिया करते थे.मत लेखन उनके लिए जुनून के साथ-सा...