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‘विष का पानी’: जब सामान्य मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद दर्द का जवाब तलाशता है लोकविश्वास

‘विष का पानी’: जब सामान्य मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद दर्द का जवाब तलाशता है लोकविश्वास

देहरादून
  अंधविश्वास, मनोवैज्ञानिक प्रभाव या अदृश्य शक्ति? ग्रामीण अंचलों में आज भी प्रचलित है अभिमंत्रित जल से उपचार की परंपरानीरज उत्तराखंडी, त्यूणी (देहरादून)उत्तराखंड समेत देश के कई ग्रामीण और पारंपरिक समाजों में आज भी ऐसी लोक-चिकित्सा पद्धतियां देखने को मिलती हैं, जिनके पीछे पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास, धार्मिक मान्यताएं और स्थानीय परंपराएं जुड़ी हैं। इन्हीं में एक प्रचलित धारणा है—‘विष का पानी’। लोकविश्वास के अनुसार कभी-कभी किसी व्यक्ति के शरीर पर कथित ‘विष’ या नकारात्मक प्रभाव पड़ जाता है, जिसके कारण उसे लगातार दर्द, बेचैनी, कमजोरी, सिरदर्द, घबराहट या शरीर के विभिन्न हिस्सों में परेशानी महसूस होती है। खास बात यह मानी जाती है कि कई बार शुरुआती मेडिकल जांच में कोई स्पष्ट बीमारी सामने नहीं आती। ऐसे मामलों में कुछ क्षेत्रों में आज भी परंपरागत लोक-ज्ञानी या स्थानीय उपचारकर्ता ...