
माँ नंदा देवी राजजात: उत्तराखंड की बेटी की कैलाश यात्रा और सदियों पुरानी परंपरा
डॉ. प्रवेश कुमार
जा मेरी लाड़ली नंदा ते ऊँचा कैलाश।
ना-ना बाबा, मैं नी जानदू ते ऊँचा कैलाश।।
इस गीत की पंक्तियों के साथ माँ नंदा देवी की यात्रा शुरू हो जाती है। हमारी भारत भूमि अपनी विविधता और उसमें विद्यमान एकता के लिए विश्व में पहचानी जाती है। इस विविधता को हम एक उत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी प्रकार हमारे पहाड़ों में हर चोटी पर एक देवता और उसे पूजने वाले भक्त हमें मिल जाते हैं। इस लेख में मैंने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति में रची-बसी माँ नंदा देवी लोकजात और राजजात पर चर्चा की है।
अभी पिछले दिनों यह यात्रा (लोकजात) प्रत्येक वर्ष की भाँति प्रारंभ हुई, हालाँकि लोकजात तो प्रत्येक वर्ष होती है। लेकिन पहले तो यह सुनने में आया कि इस बार लोकजात के साथ राजजात भी होगी। फिलहाल इस पर स्थानीय लोगों में कुछ संशय बना, लेकिन फिर भी चौसिंघा खाड़ू के साथ 5 सितंबर को यह यात्रा प्रारंभ हो गई।...

