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साहित्‍य-संस्कृति

आज भी प्रासंगिक हैं ‘गांधी-गीता’ के प्रजातांत्रिक मूल्य

डॉ. मोहन चंद तिवारी प्रोफेसर इन्द्र की ‘गांधी-गीता’ दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के स्नातक स्तर के ‘भारतीय राष्ट्रवाद’ के पाठ्यक्रम में निर्धारित एक महत्त्वपूर्ण रचना है. यह पुस्तक सन् 1950 में प्रकाशित हुई थी जो अब दुर्लभप्राय है.मैं अपने फेसबुक पर गांधी जयंती,