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आंदोलन के नाम पर अराजकता

आंदोलन के नाम पर अराजकता

कविताएं
उमेद सिंह बजेठा गणतंत्र दिवस हमारा पर्व है, सभी धर्मों संप्रदायों का गर्व है. हमने ही जय जवान तथा, जय किसान का नारा दिया. फिर क्यों आज किसान ने, जवान पर तलवार से प्रहार किया. लाल किला राष्ट्रीय स्मारक है, राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है. इसकी सुरक्षा व सम्मान प्रत्येक, भारतीय का कर्तव्य पुनीत है. आंदोलन की आड़ में तौहीन, यह कतई बर्दाश्त नहीं. तिरंगे के स्थान पर किसी, अन्य को यह मान प्राप्त नहीं न भाषा मर्यादित है,  न आचरण प्रशंसनीय है. शांति व प्रेम से हल खोजो, टकराव की राह निंदनीय है. इतिहास के पन्ने पढ़कर, तुमने कुछ नहीं सीखा है. बलिदान को उनके भुला दिया, देश को जिन्होंने लहू से सींचा है. मत खेलो उन हाथों में, तोड़ना देश जो चाहते हैं. विफल करो षड्यंत्र सभी, ज्वाला नफ़रत जो फैलाते हैं. मिल बैठकर बातें कर लो, क्रोध विनाश का मूल है. वरना कुछ भी हासिल नहीं ह...