Tag: राष्ट्रभाषा

हिंदी का श्राद्ध अर्थात ‘हिंदी दिवस’  

हिंदी का श्राद्ध अर्थात ‘हिंदी दिवस’  

शिक्षा
हिन्‍दी दिवस (14 सितंबर) पर विशेष प्रकाश उप्रेती हर वर्ष की तरह आज फिर से हिंदी पर गर्व और विलाप का दिन आ ही गया है. हिंदी के मूर्धन्य विद्वानों को इस दिन कई जगह ‘जीमना’ होता है. मेरे एक शिक्षक कहा करते थे कि “14 सितंबर को हिंदी का श्राद्ध होता है और हम जैसे  हिंदी के पंडितों का यही दिन होता जब हम सुबह से लेकर शाम तक बुक रहते हैं”. कहते तो सही थे. because इन 67 वर्षों में हिंदी प्रेत ही बन चुकी है. तभी तो स्कूल इसकी पढाई कराने से डरते हैं और अभिभावक इस भाषा को पढ़ाने में संकोच करते हैं. सरकार ने इसके लिए खंडहर बना ही रखा है. अब और कैसे कोई भाषा प्रेत होगी. because हिंदी का बूढ़ा और नौजवान विद्वान (वैसे तो हिंदी पट्टी का हर व्यक्ति अपने को हिंदी का विद्वान माने बैठा होता है) जिसको की विद्वान होने की मान्यता विश्वविद्यालयों में चलने वाले हिंदी के विभाग, राजेन्द्र यादव इन्हें ‘ज्ञा...
दक्षिणी राज्यों का दबाव नहीं बल्कि राजनीतिक साजिश का शिकार हुई हिन्दी

दक्षिणी राज्यों का दबाव नहीं बल्कि राजनीतिक साजिश का शिकार हुई हिन्दी

शिक्षा
हिन्‍दी दिवस (14 सितंबर) पर विशेष भुवन चन्द्र पन्त  सामान्य हिन्दी प्रेमी के मानस पर यह प्रश्न अवश्य उभरता होगा कि जब भारत सम्प्रभु राष्ट्र है, इसका अपना संविधान है, जो हमारी संविधान सभा द्वारा स्वयं तैयार किया गया, 100 करोड़ से भी अधिक लोग हिन्दी जानते हैं और हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाये जाने के पक्षधर हैं, फिर वे कौन से कारण हैं, जो आजादी के 73 साल बाद भी हम हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सम्मान नहीं दे पाये. सोचना स्वाभाविक है, जब देश धारा 370 जैसे विवादित अनुच्छेद को समाप्त कर सकता है तो हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के because लिए संवैधानिक संशोधन में अड़चन क्या है? आम आम हिन्दी प्रेमी हो अथवा सत्ता पर बैठे राजनेता हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सम्मान न मिलने पर अपनी व्यथा व्यक्त करते नहीं चूकते, विशेष रूप से हिन्दी दिवस soके मौके पर. जब सत्ता में बैठे लोग ही हिन्दी को राष्ट्रभाषा क...