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‘जाति की जड़ता जाये तो उसके जाने का जश्न मनायें’

‘जाति की जड़ता जाये तो उसके जाने का जश्न मनायें’

स्मृति-शेष
बलदेव सिंह आर्य:  जन्मदिन (12 मई) पर विशेष डॉ. अरुण कुकसाल उत्तराखंड के शिल्पकार वर्ग में सामाजिक-शैक्षिक चेतना के अग्रदूत बलदेव सिंह आर्य (12 मई, 1912 से 22 दिसम्बर, 1992) का आज जन्मदिन है. सन् 1930 में 18 वर्ष की किशोरावस्था में निरंकुश बिट्रिश सत्ता का सार्वजनिक विरोध करके 18 महीने की जेल को सर्हष स्वीकार करना उनके अदम्य साहस और दीर्घगामी सोच because का ही परिणाम था. उन्होने ‘डोला पालकी आन्दोलन’ में भाग लेकर भेदभावपूर्ण तत्कालीन सामाजिक परम्परा को खुली चुनौती दी थी. सन् 1942 में उनके संपादन में तैयार ‘सवाल डोला पालकी’ रिपोर्ट देश भर में चर्चित हुई थी. इस रिर्पोट से प्रेरणा लेकर उस दौर में देश के अन्य क्षेत्रों और समुदायों के आम लोगों ने सामाजिक पक्षपात के विरुद्ध आवाज उठाई थी. कुशल राजनीतिज्ञ देश के स्वाधीन होने के बाद एक कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में उनकी ख्याति रही है. उत्तरा...