September 24, 2020
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पुस्तक समीक्षा

जो मजा बनारस में, न पेरिस में, न फारस में…

कॉलम: किताबें कुछ कहती हैं… प्रकाश उप्रेती इस किताब ने ‘भाषा में आदमी होने की तमीज़’ के रहस्य को खोल दिया. ‘काशी का अस्सी’ पढ़ते हुए हाईलाइटर ने दम तोड़ दिया. लाइन- दर- लाइन लाल- पीला करते हुए कोई पेज खाली नहीं जा रहा था. भांग का दम लगाने के बाद एक खास ज़ोन में […]