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साहित्‍य-संस्कृति

पहाड़ पर बस में बैठने की ख्वाहिश…

फकीरा सिंह चौहान ‘स्नेही’ शहरों में बस के विषय में कई बार मैंने अपने पापा से सुना था, कि बस एक घर की तरह होती है. उसमें 40- 50 लोग एक साथ मिलकर बैठते हैं. उसके अंदर खिड़कियां भी होती हैं because जिससे बाहर का नजारा आसानी से देख सकते हैं. नदी के उस पार दूर […]