Home Posts tagged आगरा
कविताएं

अपेक्षा/उपेक्षा

निमिषा सिंघल अपेक्षाएं पांव फैलाती हैं… जमाती हैं अधिकार, दुखों की जननी का हैं एक अनोखा…. संसार। जब नहीं प्राप्त कर पाती सम्मान, बढ़ जाता है क्रोध… आरम्पार, दुख कहकर नहीं आता.. बस आ जाता है पांव पसार। उलझी हुई रस्सी सी अपेक्षाएं खुद में उलझ.. सिरा गुमा देती हैं। भरी नहीं