October 22, 2020
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एडवेंचर, एक्साइटमेंट और थ्रिल से भरपूर है सप्तेश्वर ट्रैक

उत्तराखंड के चम्पावत जिले से 25 becauseकिलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह ट्रैक

हाँ, यह सच है, जिंदगी का हर लम्हाbecause बहुत छोटा-सा है. कितने दिन, महीने और साल निकल गये, पता ही नही चला. जो बात समझ में आई वह यह कि कल की कोई बुनियाद नहीं है और आने वाला कल तो सिर्फ सपनो में ही है. अब बच गये इस पल में और becauseतमन्नाओं से भरी इस जिन्दगी में हम सिर्फ भाग रहे हैं. वो भी अंधाधुन्द, तो दोस्तों रफ़्तार थोड़ी धीमी करो और इस जिन्दगी को जम के जियो.

सप्तेश्वर

वो कहते हैं ना कि दिल से सोचो कहाँ जाना है butतो दिमाग खुद-ब-खुद तरकीब निकाल लेगा. पिछले कई समय से सप्तेश्वर ट्रैक का प्लान था लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से इस ट्रैक का प्लान पूरा नहीं हो पाया. अबकी बार मानो मौका और दस्तूर दोनों ही थे. becauseदिन छुट्टी का और मौसम एकदम सुहावना.

सुहावना

सप्तेश्वर ट्रैक मार्च 2020 के बाद सुर्ख़ियों में तब आया, so जब किसी ने इसका जिक्र अपने ब्लॉग और यूट्यूब चैनल में किया. इससे पहले इसके बारे में बहुत कम लोग जानते थे. इस ट्रैक की ख़ास बात यह है कि इसमें मंजिल तक पहुचने के लिए butआधे से ज्यादा रास्ता आपको खुद ही बनाना becauseपड़ता है. शुरुआत में आधे किलोमीटर तक कच्चा रास्ता है लेकिन उसके बाद बड़े-बड़े पत्थर, पानी और झरनों को कूदते-फांदते ही आगे बढ़ना होता है. हर दूसरे कदम पर एक झरना आपके स्‍वागत के लिए तैयार रहता है और हर झरना ऐसा कि उसे बार-बार निहारने का मन करे.

शुरुआत

आखरी और सबसे बड़े झरने becauseपर पहुंचने में जो आनंद और रोमांच मिलता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. आप घंटों वहां बिता सकते हैं. उसके शोर में छुपे संगीत को महसूस कर सकते हैं, जिसकी गिरने वाली हर बूंद, एक नई धुन पैदा कर रही हो. इन सबके साथ becauseएक डर हमेशा बना रहता है कि इतनी खूबसूरत जगह कहीं पिकनिक स्पॉट के आगोश में आकर कचरे में तब्दील ना हो जाय.

उत्तराखंड

खैर, अगर आप अपनी जिन्दगी में becauseएडवेंचर, एक्साइटमेंट और थ्रिल चाहते हैं तो आप इस छोटे से मगर खुबसूरत यादों को सजोने वाले ट्रैक पर जा सकते हैं. यह ट्रैक उत्तराखंड के चम्पावत जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर है. जिसमें लगभग 22 किलोमीटर की दूरी soकिसी वाहन से और 3 किलोमीटर की दूरी ट्रैक करके तय की जाती है. अकेले ना जाएँ, ग्रुप में जायं क्योंकि ट्रैक का अधिकतर हिस्सा घना जंगल है, जहाँ जंगली जानवरों (बाघ, भालू, सांप आदि) का डर बना रहता है.

सप्तेश्वर

(गौरव चम्पावत जिले से हैं एवं ट्रैकिंग butके शौकीन हैं, खासकर पहाड़ों के. इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं)

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